वक्त सबको वक्त देता है ,
वक्त को सब अपना वक्त नहीं देते ,
जो देते है , वो वक्त का साथ पाते है ,
जो नहीं देते , उनका वक्त निकल जाता है।
वक्त की सबसे अच्छी चीज ये है " आनन्द ",
ये सदा के लिये किसी एक के पक्ष में नहीं रहता ,
बदलने की फितरत रही है सदा इसकी ,
देर सबेर आता हरेक के हिस्से जरूर हैं।
कभी झटके में बदल जाता है ,
किसी को बेइंतेहां इन्तजार करवाता है ,
परीक्षा लेता है ठोक -बजाकर ,
जब आता है , फिर सिर ताज सजा देता है।
वक्त कभी अच्छा या बुरा नहीं होता ,
सब परिस्थितियों का खेल होता है ,
लगता है वक्त को भी समीकरण बदलने में ,
वक्त को भी थोड़ा वक्त
चाहिये होता है।
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