आसमां तुम्हारा, ज़मीन तुम्हारी,
सागर तुम्हारा, ये जहाँ तुम्हारा,
सीमाओं में खुद को मत बाँधो,
हर दिशा में फैला है उजियारा।
सपनों को ऊँची उड़ान दो,
पंखों में हौसलों की आग भरो,
जहाँ तक जाती है नज़र तुम्हारी,
उससे भी आगे कदम धरो।
आज में कल के निर्माता बनो,
अपने समय के तुम शिल्पकार बनो,
हर चुनौती को अवसर समझो,
अपने जीवन के खुद आधार बनो।
ऊर्जा के तुम अटूट भंडार,
साहस का साकार रूप बनो,
ठोकरों से घबराना कैसा,
गिरकर फिर से मजबूत बनो।
तुम ही हो कल का उगता सूरज,
विश्वास का परचम ऊँचा करो,
अंधेरों को चीरती किरण बन,
हर दिल में उजाला भरो।
नौनीहालों, यूँ ही खिलते रहो,
मासूमियत का मान बनो,
माँ-बाप की आँखों का सपना,
उनकी सबसे बड़ी पहचान बनो।
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