Monday, August 13, 2012

नमन शहीदों ! हम गुनाहगार हैं ...........

वो लोग कितने गजब थे, 
हमारे आज के लिए जो शहीद हुए थे, 
उन्होंने अपने आज को न देखा, 
आने वाला कल अच्छा हो , कुर्बान हुए थे. 
आजादी की खातिर जिन्होंने , 
तन मन धन न्योछावर कर दिया था, 
आजाद हवा में सांस ले सके हमारे आने वाले बच्चे, 
सब कुछ झोंक दिया था. 
बदले में हमने उनके सपनो के साथ क्या किया ? 
आजाद हम उनकी कुर्बानियों से हुए , 
हम उसे हमारा हक़ मान लिया, 
उनके सपनो के भारत को हमने क्या से क्या बना दिया?
सत्ता कहने को हमारे हाथ आ गयी मगर, 
हमने ही आजादी का गला घोंट दिया. 
चंद लोगो के हाथो में सियासत चली गयी , 
असली जनता - फिर भी भूखी प्यासी रह गयी. 
कुर्बानियों का हमने क्या सिला दिया, 
अपने देश का पैसा कुछ लोगो ने स्विस बैंक में जमा करा लिया. 
किसान ख़ुदकुशी करते रहे और सूदखोरों का घर मालामाल हुआ. 
तरक्की बहुत की हमने , आम आदमी महंगाई से कभी उभर नहीं पाया. 
रोटी कपडा और मकान के चक्कर में , उसको कभी आजादी का मतलब समझ नहीं आया. 
उसके लिए तो शासको का सिर्फ रंग बदला, 
पहले गोरो का राज था, अब उनकी चमड़ी का रंग थोडा काला हुआ. 
पहले विदेशी का हवाला देते थे, अब अपने बीच से ही लूटेरो का राज हुआ. 
क्या सोचते होंगे वो शहीद अब ऊपर आसमान से , 
उनके बलिदान का अर्थ जाया हो गया. 
तुम्हे नमन शहीदों , शायद हम आजादी का अर्थ कुछ और समझ बैठे हैं.
लम्बे अरसे की गुलाम का दंश शायद हम भूल चुके हैं. 
जो शायद आपने सहा , वो हम अनुमान भी न लगा पाएंगे , 
अपने भीतर ही पैदा हुए इन अंग्रेजो को हम ही दूर भगायेंगे. 

( १५ अगस्त की पूर्व संध्या पर शहीदों को श्रदांजली ) 

Thursday, July 19, 2012

Let me fly......Let me fly....


Let me fly......Let me fly....
I want to touch the sky....
I want to see what next  after the horizon,
Where the sun take rest after the day, Where the moon hide in day...........
I want to see the beautiful earth from the sky, I want to compete with the birds that fly....
I want no boundaries for me, , there is no stoppage for mine.
Let me Fly ....Let me Fly ....I want to touch the sky...
I will follow the river which comes from the mountain, I want to fly over the sea,
I want to see where rich live, I want to see where poor dies,
I want to see everything that God made, I wanna to meet with the clouds.
I want to visit the deserts and want to fly over green fields.
Let me fly.......Let me fly... I want to touch the sky.

Thursday, July 5, 2012

दूसरा भाग - पुन : मिलन


कुछ सालो बाद बेटे का माँ को फ़ोन आया, 
" माँ, राहुल को विदेश में नौकरी मिल गयी हैं , 
अगले महीने वो चला जायेगा , 
कहता हैं , मौका मिलेगा तो यहाँ आऊंगा , 
वर्ना वही सेटेल हो जाऊंगा. 
अब हम क्या करे? एक ही तो बेटा हैं, 
वो भी दूर चला जायेगा , 
तो हम कैसे रहेंगे ? "
माँ बड़ी शांति से बोली , 
" कोई बात नहीं बेटा, उसको जाने दे. 
तू ऐसा कर, अब हमारे पास आ जा. 
हमें भी सहारा हो जायेगा , 
तेरे पापा को अब कम दिखता हैं, 
तू उनकी आँखे  बन जायेगा , 
मैं भी अब बहुत बूड़ी हो गयी हूँ , 
बहु के साथ मेरा टाइम भी कट जायेगा. 
रही तेरे बेटे की बात, 
धीरज रख ! वो भी एक दिन लौट के  आएगा. " 
बेटे को माँ की बातो से बड़ी तसल्ली हुई, 
सोचा , " माँ, सही तो कह रही हैं, 
जिस मकसद से शहर आया था, 
पूरा तो हो गया था, 
बच्चो को लिए सब कुछ तो कर लिया , 
अब जरा माँ -बाप की सेवा की जाये , 
क्या पता ? इसी तरह राहुल भी एक दिन वापस आ जाये. " 

Monday, July 2, 2012

पहला भाग - बिछोह .......


बेटे  ने घर छोड़ते हुए माँ बाप को कहाअच्छा ! अब मैं चलता हूँ , देर हो रही हैं ,
फिर मैं आपको फ़ोन दे के जा रहा हूँ
जब मर्ज़ी हो बात कर लीजियेगा और अगर कोई जरुरी काम पड़ातो मैं जाऊंगा. "
पिता ने कहा , " ठीक हैं बेटाशायद हम तेरे लिए यहाँ वो नहीं कर पाए जो तुझे आज लगता हैं
तेरे बच्चो का भविष्य यहाँ बिगड़ जायेगा, 
तू खूब तरक्की कर और खूब पैसा और नाम कमा
हम तो  बूड़े हो गए हैं , अब इस मिटटी से अलग होने का सवाल ही नहीं होता
बस इतना करना जब कोई बुरी खबर मिलेतो जरुर जाना.  
नहीं तो हम दोनों ने उम्र तो काट ही ली हैं , थोडा जो बची हैं - कट ही जाएगी
मगर तू  अपना ख्याल रखना."
माँ बोली , " ठीक हैं बेटा ! तुझे जो अच्छा लगता हैं , तू कर रहा हैं
फिर तू मुझसे जुदा थोडा हैं
तुझे छींक भी आएगी  परदेश में कभीतो मुझे खबर हो जाएगी
तू मेरा ही तो अंश हैं , मुझे तेरी खबर बिना फ़ोन के भी हो जाएगी
मगर अपना ध्यान रखना , टाइम पर खाना और टाइम पर सोना
पैसो के लिए ही मत भागना
बच्चो को बेमतलब डांटना मतबहु का भी हमारी ख्याल रखना
जा जी ले अपनी ज़िन्दगी , यहाँ क्या रखा हैंसिर्फ हमारे प्यार के सिवाय
सिर्फ प्यार से तो ज़िन्दगी नहीं चलतीज़िन्दगी में  और भी बहुत कुछ चाहिए
शायद हम तुझे कुछ नहीं दे पाएजो अब तू अपने बच्चो को देना चाहता हैं
खुश रहना और कभी कभार हमारी भी सुध ले लेना ."
बेटे , बहु और बच्चो ने माँ बाप के पैर छुए और चल दिए
माँ पल्लू से अपने गीली आँखों को पोछ रही थी
और पिता चुपचाप बच्चो को जाते हुए देख रहा था

(आगे क्या हुआ, अगले भाग में जरुर पढियेगा... )

Friday, June 29, 2012

आत्म -मंथन

रोज़मर्रा की उलझनों से , एक दिन थोडा वक्त अपने लिए निकाला.
थोडा आत्म-मंथन के लिए बैठा , तो अपने आपको को एक बदला हुआ इंसान पाया. 
वो उसूल , वो आदर्श , वो लक्ष्य , वो जूनून - जो देखे थे कभी लड़कपन में, अपने आपको उनसे बहुत दूर पाया.
अब इसे मजबूरी कह ले या  हालातो का सितम , कैसे - कहाँ - कब ये सब हुआ पता ही नहीं चल पाया. 
सोचने को मजबूर हुआ की - चले थे किस ओर हम  , कहाँ पहुच गए. 
पकड़ा तो था हमने नदी का वो किनारा , दुसरे किनारे कैसे पहुच गए. 
तारीखे बदलती गयी , साल न जाने कहाँ चले गए. 
हम भी रोज़ की आपा - धापी में खुद को जैसे भूल गए. 
दिल के जज्बातों को किनारे कर दिया, दिमाग ने हमें दुनिया के पीछे भगा दिया. 
लग गए हम भी वही सब इकठ्ठा करने , दुनिया ने जिसे सफलता का पैमाना बना दिया. 
अब अपने लिए वक्त की कमी हो गयी हैं, क्यूंकि दुनिया को दिखाने की हमें ज्यादा पड़ी हैं. 
दिल अब भी कहता हैं जो बीत गया , वो गया.  अब भी सचेत हो जा. 
मिली हैं एक बार जो ये ज़िन्दगी , उसको कुछ मतलब दे जा. 
जीवन  के उतरार्ध  में कभी जब  खोले  अपने  किताब के पन्ने हम , हमें अपने आप पर फक्र हो जाये. 

बस .. यूँ ही ख्याल आया


सफ़र बहुत तय करना हैं अभी, अभी तो कुछ ही मीलो के पत्थर नापे हैं. 
आगे कितने और मील चलना हैं,इसका कोई पता नहीं. 
छोड़ते चले अपने निशाँ , जहाँ से भी गुजरे अपना कारवां. 
सफ़र ज़िन्दगी का हैं, आज यहाँ हैं , कल कहाँ?
जहाँ भी आज हैं , जिन्दादिली होनी चाहिए . 
कल अगर उधर न भी हो हम, कमी खलनी  चाहिए. 
हमें तो बढते रहना हैं , ज़िन्दगी एक जगह रुक जाये तो कोई काम की नहीं. 

Thursday, June 7, 2012

पलायन .....


उच्चे उच्चे पहाड़, बीच से बहती नदी, 
ताज़ी हवा और वीराने में कूकती चिड्याएं 
दूर दूर तक मनोरम द्रश्य , 
न कोई कोलाहल , न कोई भागमभाग, 
न गाडियों का रेला और दूर दूर बिखरा गाँव. 
मगर न जाने क्यों इन सबको नजर लग गयी हैं, 
हर गाँव सूना सूना सा हैं, 
अपने बच्चो के लौटने का कब से इन्तेजार कर रहा हैं, 
उस गाँव के लाल पैसे कमाने शहर गए हैं, 
अपने पीछे बुड़े माँ बाप छोड़ गए हैं, 
बीवी हर रोज़ आस में जीती हैं, 
बच्चे पापा के इन्तेजार में हर रूकती गाड़ी से आस लगाये रहते हैं. 
और गाँव का बेटा शहर की गर्मी में झुलस रहा होता हैं, 
एक एक पैसे की खातिर हर रोज़ मर रहा होता हैं, 
जब कभी फुर्सत मिलती हैं उसे शहर की दौड़ भाग से , 
अपनी गाँव की याद में जल रहा होता हैं. 
कब ये पहाड़ अपने श्राप से मुक्त होंगे , 
इसके अपने बच्चे कब इसके अपने होंगे , 
इसके रास्ते अपने बच्चो के पदचाप के लिए तरस गए हैं, 
कब वो बुड़े माँ बाप शहर से आने वाली हर गाड़ी को ताकना बंद करेंगे , 
कब  उस पत्नी का वियोग ख़त्म होगा, 
कब बच्चे अपने पिता को हर रोज़ देखेंगे, 
कब अपने बच्चो के पैरो की धमक से ये पहाड़ फिर  गूंजेंगे ,
कब इसके बच्चे इसे छोड़ कर कभी नहीं जायेंगे. 

Monday, May 28, 2012

क्या बदला ? तब और अब में ...........


बचपन में जब चाँद को छूने की बात करते थे
तारो से आगे जाने की सोचते थे
पर्वत शिखरों को खेल खेल में नापने की शर्त लगाते थे
दुनिया में सब चीजों को पाने के  कितने आसान से तरीके सुझाते थे
ख्वाबो में जीते थे और हर चीज़ को दिल से अपना समझते थे
दोस्तों पर हमेशा जान छिडकने को तैयार रहते थे
माँ बाप की डांट को सुनकर उन्हें हम हिटलर समझते थे,  
और अब.......
 हम जरा उस दहलीज को लाँघ कर आगे बढ गए हैं
जो चाँद तब हमें मुट्ठी में लगता था
अब हम उसकी बात भी नहीं करते हैं
तारे तोडना जैसे बात सोच सोच कर उसे हम अपना बचपना समझ कर भूल जाते हैं
पर्वत शिखरों पर चड़ने की बात तो दूर, तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट दूंदते  हैं
ख्वाबो में जीने की आदत कब की धूमिल हो गयी हैं
दोस्तों को  मिले देखे वर्षो बीत गए हैं, नए दोस्तों के लिए नफा नुकसान का ख्याल पहले रखते हैं
माँ बाप की झिडकियो का मतलब अब समझ में आता हैं
बदला क्या हैं?
हम बड़े हो गए हैं
सिर के कुछ बाल सफ़ेद हो गए हैं
जिंदगी के कुछ अनुभव हमें हो गए हैं
हर चीज़ को अपने फायदे के तराजू में तोलने लग गए हैं

Thursday, May 24, 2012

क्या अच्छा , क्या बुरा ?

संसार में अच्छा खोजने के लिए निकलोगे , 
तो हर जगह अच्छाई नजर आएगी. 
बुरा खोजने निकलो तो हर जगह, 
कमियों का अम्बार मिलेगा . 
क्यूंकि जो आपके लिए अच्छा हैं, 
वो सकता हैं अगले के लिए बुरा हो , 
और जो आपके लिए बुरा हैं , 
वो दुसरे के लिए अच्छा हो. 
इसलिए उचित यही हैं, 
सब अच्छा हैं मान के चलो, 
ज्ञान को बढ़ाते चलो, 
फिर अपने विवेक से अच्छे - बुरे की तुलना करो. 
बुरे से बचो और दुसरे को बचाओ , 
अच्छाई के प्रकाश से बुरे के अंधकार को ढकने का प्रयास  करो. 

Sunday, May 13, 2012

मशाल

ताकते रहेंगे एक दुसरे को हम , 
की वो पहल करेगा तो हम भी साथ हो लेंगे, 
कब तक मशाल जलने का हम इन्तेजार करते रहेंगे, 
जलाएंगे एक एक माचिस की तीली भी खुद से हम , 
रोशनी तो खुदबखुद हो जाएगी.