Wednesday, November 25, 2009

जिंदगी बोझ सी लगे

जब न सूझे कुछ ज़िन्दगी में , हर जगह अँधेरा दिखाए दे.

सब लोग पराये से लगने लगे, और हर जगह बेमानी सी लगे.

कुछ न करने का दिल करें और जिंदगी बोझ सी लगे,

तो सुकून से याद करिए अपने वो अच्छे दिन,

जो अपने कभी बिताये हैं, करिए याद उन सपनो को जो आपने देखे हैं,

फिर शुक्रिया अदा कीजिये उस खुदा का, जिसने आपको ज़िन्दगी दी हैं,

आपको को परेशानी में देख उसको कोई ख़ुशी नहीं है.

बस वक़्त आपके हिसाब से नहीं चल रहा हैं , और आपके ज़िन्दगी में कोई कमी नहीं हैं.

सब्र करिए , वक़्त का पहिया सरपट दौड़ता हैं,

बस थोडा अँधेरे को चीरना हैं , आगे सब अच्छा हैं.

Monday, November 16, 2009

क़र्ज़ तेरा जो हैं हम पर उसको चुकाना हैं ......

तेरे लाल फिर निकल पड़े हैं लेकर हाथो मैं तिरंगा, कोई इंग्लैंड , कोई रसिया , कई पहुच गए अमेरिका ! बस एक ही मकसद हैं दिल में , वापस लाना हैं गौरव अपने देश का.

करने पड़े कितने ही जतन , विश्व पटल पर फिर छाना हैं

तुझे बीता हुआ कल मानने वालो का , फिर से मस्तक झुकाना हैं.

कुछ देर हुई और भटके भी हम , माँ !मगर तेरी मिटटी की ताकत ने फिर खड़ा कर दिया हमें माँ.

हम जहाँ भी रहे और जो भी करे , तेरे सम्मान की परवाह हैं माँ !

सबसे पहला तेरा हित , फिर और कोई बात करेंगे माँ.

जो भी डालेगा बुरी नज़र तुझ पर , १ अरब तेरे बच्चे दीवार बन खड़े हो जायेंगे,

प्यार से समझ गए तो ठीक , वर्ना चीर के रख देंगे , माँ.

अब चिंता की कोई बात नहीं , बच्चे तेरे बड़े हो गए माँ,

तेरी शान के खातिर अब सब, कफ़न बाँध के खड़े हो गए माँ !

Monday, November 9, 2009

हम सब कर्ज़दार हैं ...............

" जब मैं पीछे मुड़के देखता हूँ तो में अपने पीछे उन तमाम लोगो का हुजूम देखता हूँ जो मेरी इस ज़िन्दगी को बनाने में किसी न किसी रूप में सहायक बने. किसी ने मुझे प्रेरणा दी, किसी से मैंने सबक सीखा ! सोचिये ! हम अपनी इस जीवन यात्रा में कितने लोगो के कर्ज़दार हैं और हम समझते हैं की इस ज़िन्दगी पर सिर्फ और सिर्फ हमारा हक हैं , हमें अपने जीवन में कुछ तो ऐसे मूल्य स्थापित करने पड़ेगे , जिससे हम दुसरो लोगो के क़र्ज़ को कम कर सके. "

दिमाग की खुराक ...........

"अपनी अच्छी यादो को दिमाग के किसी कोने में इकट्ठा करते रहिये और बुरी यादों को दिमाग से निकालते रहिये. जीवन के उतराध में जब आपके पास समय का अभाव नहीं रहेगा, तब आपको अपना ये खजाना जीने को प्रेरित करता रहेगा और आपके चेहरे पर मुस्कान लायेगा ! हंसते रहिये और ज़िन्दगी जो खुदा की नियामत हैं , भरपूर जीते जाइये . "

English Translation

" Store your all good memories which brings smile in your face only and when you will get enough time after retirement , these memories will keep you alive and feel your worthy. Keep smiling and Live this beautiful gifted life."

Wednesday, November 4, 2009

एक विचार - One thought

"हमारा आज , हमारे कल की देन हैं. हमारा आनेवाला कल , हमारे आज की देन होगा. यह महत्वपूर्ण नहीं हैं की हम आज क्या हैं, महत्वपूर्ण यह हैं की हमारे आज के प्रयास और मेहनत किस दिशा में हैं और हम अपने आने वाले कल में क्या चाहते हैं. "

व्याख्या - कल जो गलतिया हुई हैं , उनसे सबक लेकर अपने आज को बेहतर करना ही उचित हैं ताकि हमारा आने वाला कल सुखद और सफलतादायक हो. अपने आज को योजनाबद्ध कीजिये , कल अपने आप बेहतर होगा.

English Translation -

"Whatever we are today just because of our yesterday and whatever we will be in tommorrow depends on our today. This is not important that where we stand today, important is this - In which direction, we are marching foreword and what we want from our tommorrow."

भगवान आप सबको सफलता के नए मार्ग दिखाए !

Tuesday, November 3, 2009

ललक ...................

" किस और हम चले थे ,

किस और आज पहुच गए.

जिंदगी के इस भूलभुलैया में न जाने कहाँ खो गए.

सोच कुछ बड़े होगे तो सपने पूरे होगे ,

बड़े हुए तो हज़ार और चिंतायों से दो चार हुए.

अब जीना सीख गए की,

जो मिल रहा उसी पर खुश रह लो ,

कल की ख़ुशी के इंतज़ार में, आज को न जाया करो,

ठीक हैं कुछ परेशानिया हैं आज, उनका भी हंसकर सामना करो.

ज़िन्दगी फिर मजे में कटेगी,और तुम्हारी हर इच्छा पूरी होगी. "

Friday, October 30, 2009

Let us live life at its fullest …………….

Whatever the reason of sorrow,
Let us face it.
Whatever the reason of happiness,
Let us celebrate it.
Whatever the reason of failure,
Let us accept it.
Whatever the reason of run,
Let us run for it.

Let us live life at its fullest.
Let us live every moment of it.
Life has comes in our way,
Let us enjoy it.

Thursday, October 15, 2009

Happy Diwali

हे दीपो ! जगमग से भर दो सबका जीवन, अंधियारों को दूर भगा दो,

अनिश्चय के बादल हटा दो, करो सबका मार्गदर्शन,

जो भटके हैं राहो से, राह उनको सही दिखा दो,

सबके जीवन में भर दो प्रकाश इतना, दीयो की इन बातियों से,

हरो सबको दुखो के कारण, जला दो सब दुःख दर्दो को,

दे दो सबको एक नया जीवन.

न किसी की आँखों में आँसू हो, न हो दर्द की चुबन,

हंसते खेलते बीते दिन,रात दिवाली हो हर दिन.

Thursday, October 8, 2009

आह्वान .................

वक़्त आ गया हैं जब हम बदलेंगे तब ये सूरत ऐ हाल बदलेगी ,

हर क्रांति की ज्वाला हमसे ही पहले निकलेगी !

बदलना हैं हमें सब कुछ अब हमने ठान ली हैं,

यूं घिसट घिसट कर जीने से ज़िन्दगी नहीं जीनी !

अब हालातो का बहाना छोड़ कर, मशाल खुद ही जलानी हैं,

सोये हुए लोगो को जगाने की बारी हमारी हैं !

डट जाना हैं अब अंगद की तरह, रावनो को नीचा दिखाना हैं,

हम युवाओ को ही अब आगे आना हैं, परिवर्तन जरूरी हैं .

खेल लिए खेल उन्होंने जितने खेलने हैं, अब क्रांति की जरुरत हैं,

देश और समाज बचने के लिए अब कुर्बानी जरुरी हैं.

आओ की अब साथ जरुरी हैं, मिल कर हुंकार करेंगे ,

अन्धकार के घुप्प अँधेरे में दीये से शमा रोशन करेंगे.

Wednesday, October 7, 2009

सफलता का मतलब

सफलता का मतलब हैं - एक लक्ष्य की प्राप्ति के लिया किया गया सतत प्रयास ,

इश्वर पर अटूट विश्वास , अपनी काबलियत पर भरोसा ,

कुछ कर गुजरने की जिद और कभी हार न मानने की ललक.

रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं,तू होंसला तो कर,

अँधेरे में भी रौशनी दिख ही जाती हैं, तू यकीन कर,

आंधिया भी रुख मोड़ लेती हैं, तू भरोसा रख .

विश्वास के आगे सब कुछ झुक जाता हैं, तू मन में ठान ले,

कुछ कर गुजरने की तमन्ना को, हर दम दिल में जवान रख.

Wednesday, September 30, 2009

कोहरे के मानिंद हैं ज़िन्दगी …………………


धुंध धुंध सी हैं ज़िन्दगी , कोहरे के मानिंद हैं ज़िन्दगी.
थोडी दूर तक जाती हैं नज़र, फिर धुंध धुंध नज़र आती हैं ज़िन्दगी.


सोचो की अगर दिखता हमें सब कुछ बहुत आगे तक, कैसी होती यह ज़िन्दगी.
चाहे अच्छा हो या बुरा कल में, मगर हमें देखने नहीं देती ज़िन्दगी.


बस धुंध धुंध हैं ज़िन्दगी , कोहरे में समेटे लाखो सवाल , बस निकलती जाती हैं ज़िन्दगी.
जो पीछे छूट जाता हैं, उसको भी यादो के गलियारों में ड्ख लेती हैं ज़िन्दगी,


बस इसी तरह से सरकती जाती हैं ज़िन्दगी. सबकी बस यही कहानी हैं ऐ ! ज़िन्दगी.

Monday, September 28, 2009

Life is a race………………

Life is a race………
Everybody is running…………
Running faster and faster………….
Crossing miles and miles…………
There is no end……………………
When one comes to an end……….
Second took the torch to run……………..
Race is always on……..

Who will win the race…………?
This is a million dollar question?
Nobody wins the race ………………
Because the race is never come to end.

So,
Run till your last breath,
This is only in your hand.
Leave your firm footmarks on the way……..
Other will follow your way……….
This will pave the path to others………..
You can feel the satisfaction only this way….

Wednesday, September 23, 2009

कारवां जारी हैं ……..


आ जाओ अगर साथ चलना हैं, मिल कर सफ़र तय कर लेंगे,
ज़िन्दगी की इस सफ़र में, थोडी देर साथ चल लेंगे,
कुछ तुम अपनी कहना , कुछ तुम्हे हम सुनायेंगे ,
इस पथ के पथिक बन कर, फिर भले ही तुम साथ छोड़ देना,
मुझे तो चलना हैं ही, क्यूंकि मेरा कारवां जारी हैं !

Monday, September 21, 2009

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

ज़िन्दगी की इस दौड़ में मैं जीना भूल सा गया था ,

फिर मुझे खुदा ने बेटी का वरदान दे दिया ,

अब मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं !

बार बार गिरकर उसका फिर से अपने को संभालना ,

फिर से उठने की जिद अपने खुद को खड़े करना ,

उठ के फिर से खुशियाँ मनाना, बिना बात के यु ही मुस्करा देना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

उसका वो बेपरवाह अठखेलिया करना, फिर उसका हर बात से बेखबर सोना,

सुबह सबसे पहले जग कर सबको अपने शोर से जगाना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

वो मेरा कभी उसको गुस्सा दिखाना, उसका उस गुस्से से रोना,

फिर थोडी देर मैं फिर से मुझसे चिपकना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

उसका हर चीज़ पर लपकना , हर चीज़ को टटोलना ,

किसी भी अजनबी से पहले तो डरना,

फिर प्यार से हसना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

Friday, September 18, 2009

न बिछुडे माँ से बच्चे …………..


उसका आँगन गूजता था बच्चों के शोर से , वो दोड़ती थी बच्चों के पीछे ,

शोर से आसमान गूजता था,
बच्चों के साथ उस माँ का वक़्त यु ही गुजरता था,

माँ सोचती थी कब बच्चे बड़े होंगे और उसके सपने भी पूरे होंगे,

सोचते सोचते बच्चे कब बड़े हुए, उसको भी पता ना चला.

सब निकल गए घर से एक दिन, उसका आँगन सूनसान हुआ.

आज वो संभालती है हर याद को , निहारती हैं अपनी दीवारों को,

हर जगह से उसके बच्चों की यादे जुडी पड़ी हैं.
वो आँखों से आँसू पीकर चुपचाप ज़माने से लड़ती हैं.

आती हैं कोई खबर दूर परदेश से, तो आसूँ छलका देती हैं,
रात को सोने से पहले , ना परेशां हो मेरे बच्चे , अपने बच्चों के बिछुडन का दर्द सहती हैं.
करती हैं कभी सवाल ज़िन्दगी से , फिर खामोश हो जाती हैं.

नियति को यही था मंजूर , पल्लू ढाके सो लेती हैं.
लगाती हैं जब हिसाब किताब ज़िन्दगी का, खोने का पलडा भारी पाती हैं.

हर रोज़ फिर आस में जीती हैं, काश कुछ ऐसा कर दे भगवान ,
किल्कारिया फिर सुना दे भगवान, भर दे फिर उसका आँगन,

अब जहाँ सूनेपन की आवाज़ भी सुनाई देती हैं.
वो बुडी माँ का दर्द ना जाने भगवान भी नहीं सुनता हैं,

वो पथराई आँखों से फिर भी हर जगह अपने बच्चों के निशान खोजती हैं.
बच्चे जब तक दर्द समझे , वो बिछुरन की आदी हो जाती हैं.

अब उसको कोई दर्द नहीं सालता , वो बैरागी हो जाती हैं.
मत करना भगवान किसी माँ को उसको बच्चों से दूर,ये सजा जीते जी मरने की हैं,

तेरा रूप हैं वो धरती पर , ये सजा मंजूर नहीं हैं.