Monday, August 5, 2013

अजीब कशमकश .....

मै अपनी  बिटिया के साथ जा रहा था , 
रास्ते में एक भिखारी मिला , 
वो  मुझसे  कुछ   रुपये मांग रहा था, 
मै  कई जगह ऐसे भिखारियों से टकराता  हूँ , 
उसको "  बाबा हमें माफ़  करो , आगे बढ़ो " 
कहता हुआ निकला  जा रहा था, 
चंद  कदम आगे भी न बढ़ा था,
मेरी चार साल की बिटिया ने  मुझे पीछे खीचा और कहा ,
" पापा ,  आपने उन बूढ़े अंकल को पैसे  क्यूँ  नहीं दिए, 
वो अपने खाने के  लिए ही तो   पैसे मांग रहे थे , 
 उनके  पास पैसे नहीं होंगे , आप दे देते , 
चलो , उनको कुछ  पैसे दो " 
मैंने कहा ," बेटा , मेरे पास पैसे नहीं हैं " 
तो वह तपाक से बोली, " पापा, झूठ नहीं बोलते , आपके पर्स में पैसे तो हैं" 
मैंने कहा , " बेटे , पैसे तो हैं मगर खुले पैसे नहीं हैं बाबा को देने के लिये " 
तो वह बोली ," तो खुले करवा लो फिर दे दो " 
मैं उसको अनसुना करके आगे बढ़ना लगा,
वो रोने लगी , " पापा , आपने अंकल को पैसे क्यूँ नहीं दिए ? 
अब वो क्या खायेंगे , कहाँ जायेंगे ?"
मैंने बिटिया की आँखों से बहता पानी देखा और 
पर्स निकाल कर दस रुपये का नोट निकाल कर बाबा को आवाज देकर बुलाया ,
बाबा को पैसे देकर थोडा आगे बढ़ा  तो बिटिया को फिर से बढ़ा खुश पाया , 
अब वो उस घटना को भूल चुकी थी, 
मगर मेरे सामने सबको और इंसानियत के कई सवाल छोड़ गयी थी , 
मैंने उसे गोद में उठाया और इधर उधर की बातो में फंसाया, 
वो भोला सा मन फिर से चहकने लगा , 
और मै घबरा रहा था अब कही और कोई मांगने वाला न मिल जाये, 

जिससे मेरी बेटी फिर मेरे पीछे पड़ जाये 

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