Saturday, February 21, 2026

तराजू सा जीवन

 

जीवन इक तराजू सा देखा ,

दो पलड़े - सुःख -दुःख का लेखा ,

इक पलड़े में खुशियों की उजली धूप ,

दूजे में आँसुओं का भीगा रूप। 

 

जब सुःख का पलड़ा झुकता है ,

मन मयूरा सा नाचता है ,

रंग बिरंगे सपनों की छाया ,

हर दिशा में उजियारा पाता हैं। 

 

जब दुःख का पलड़ा भारी ,

जीवन दुश्कर सा लगता हैं ,

खुद को कोसने लगता है जीवन ,

चैन कहाँ फिर पाता हैं। 

 

दोनों का संतुलन ही जीवन है ,

यही सच्चा उसका साधन है ,

सुःख -दुःख के दोनों पलड़े ,

इन्ही में छिपा जीवन सार है। 

Wednesday, February 18, 2026

उम्मीद

 

कुम्ल्हा जाता है शीत में ,

सर्द हवाओं के थपेड़े झेलता है ,

गिरा देता है पत्तियाँ सब ,

बसंत की उम्मीद में जी जाता है। 

 

पहली बसंत की हवा में ,

कपोल फूट पड़ती है ,

ठूँठ सा बना पड़ा था जो ,

पत्तियों से तन ढाँक लेता है। 

 

फिर खिलने लगते है फूल ,

कलरव होने लगता है ,

झूम -झूम कर बासंती हवा में ,

सर्द हवाओं का खौफ भूल जाता हैं। 

 

फिर आता है तपिश का मौसम ,

सूरज आग बरसाता है ,

मुरझा जाती है पत्तियाँ डाल डाल ,

चौमास के इंतजार में जी जाता हैं। 

 

पहली फुहार में रोम रोम ,

फिर से जैसे जी उठता है ,

अठखेलियाँ सा करता बूँदो संग ,

लहराता सावन के गीत गाता हैं। 

 

साल दर साल का चक्र यह ,

नये -नये अनुभव कराता है ,

घबराओ मत -नन्हे पौधों ,

जीवन का पाठ खुद सीख, बताता हैं।  

Friday, February 13, 2026

वक्त

 


वक्त सबको वक्त देता है ,

वक्त को सब अपना वक्त नहीं देते ,

जो देते है , वो वक्त का साथ पाते है ,

जो नहीं देते , उनका वक्त निकल जाता है। 

 

वक्त की सबसे अच्छी चीज ये है " आनन्द ",

ये सदा के लिये किसी एक के पक्ष में नहीं रहता ,

बदलने की फितरत रही है सदा इसकी ,

देर सबेर आता हरेक के हिस्से जरूर हैं। 

 

कभी झटके में बदल जाता है ,

किसी को बेइंतेहां इन्तजार करवाता है ,

परीक्षा लेता है ठोक -बजाकर ,

जब आता है , फिर सिर ताज सजा देता है। 

 

वक्त कभी अच्छा या बुरा नहीं होता ,

सब परिस्थितियों का खेल होता है ,

लगता है वक्त को भी समीकरण बदलने में ,

वक्त को भी थोड़ा वक्त चाहिये होता है।