Monday, August 17, 2026

बेचैनियाँ

 

एक अजीब सी,

बेचैनी पल रही है,
मन के भीतर,
एक अजीब सा,
सन्नाटा पसरा है,
शोरगुल के अंदर।

एक अजीब सा,
अकेलापन है,
हर आदमी के भीतर,
एक अजीब सी,
कसक है,
हर दिल के अंदर।

एक अजीब सा,
उतावलापन है,
हरेक शख़्स के भीतर,
एक अजीब सा,
खालीपन है,
सबके दिल के अंदर।

कोई दौड़ रहा है,
किसी मंज़िल की तलाश में,
कोई ठहर गया है,
अपने ही सवालों के पास में।
चेहरे पर मुस्कान है,
आँखों में नमी छुपी है,
हर किसी की अपनी,
एक कहानी दबी है।

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