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Friday, November 14, 2025

लोकतंत्र में चुनाव


प्रतिनिधि चुनना है , 

जो काम आये लोगों के ,

जो सरकार से बात करे , 

सरकार में शामिल होकर , 

जो जान सके दुःख दर्द , 

जो नब्ज पकड़ सके वक्त -बेवक्त , 

वही जीतना चाहिये , 

उसी को जीताना चाहिए , 

यही है लोकतंत्र का , 

सबसे बड़ा मूलमंत्र , 

अब चुनाव में , 

कौन जीतता है ? 

कौन हारता है ? 

इसके बहुत से है कारक , 

जनता तो उसे ही चुनेगी , 

जिससे लगेगा , 

वक्त पर सुनेगा बात , 

वर्ना जनता तो अपना दुखड़ा , 

रो ही रही है सालों से , 

सुनता कौन है ? 

एक बार चुनाव जीतकर , 

मगर लोकतंत्र की तो आत्मा बसी है चुनावों पर , 

होते रहेंगे जनता से , जनता के लिये , जनता द्वारा , 

जायेंगे सरकार में चुने हुए उम्मीदवार , 

अब उनपर निर्भर , 

कितना अनसुना करेंगे , कितना सुनेंगे , 

आयेंगे फिर लौट कर, 

फिर कहाँ जायेंगे बचकर।  

Saturday, August 11, 2018

चुनाव आने वाले है


विपक्ष जब हर बात में मीनमेख  निकाले ,
बात बात में सरकार को घेरे ,
धरना और हड़ताल जब रोज होने लगे ,
तो समझ जाना चुनाव आने वाले है। 

मुख्य मुद्दों से सरकार जब ध्यान भटकाए ,
अनर्गल विषयो पर बात बढ़ाये ,
उपलब्धियां अपनी न गिनाकर ,
पिछली सरकारों पर ठीकरा फोड़े ,
तो समझ जाना चुनाव आने वाले है। 

नेताजी की अपने चुनाव क्षेत्र में सरगर्मी बढे ,
हाथ जोड़े वो सबसे मिले ,
आलिशान गाड़ी छोड़ जब वो गली गली में चक्कर मारे ,
पैंतरेबाजी सब आजमाये ,
तो समझ जाना चुनाव आने वाले है। 

मीडिया जब शहादत की रिपोर्ट पर कुछ न कहे ,
किसान भले ही आत्महत्या करे ,
ये धर्म , जाति , वर्ण , संप्रदाय पर बहस करे ,
दिन रात मजमा जमाये एक दूसरे पर कीचड़ उछाले ,
"लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि" नारा जब गूंजने लगे ,
तो समझ जाना चुनाव आने वाले है। 

गली गली , सड़क सड़क जब पोस्टरों से अटने लगे ,
कुछ अनजान से चेहरे आपके आगे  हाथ जोड़ने लगे ,
रोज़ रोज़ जब वादों की नयी झड़ियाँ लगने लगे ,
सत्ताधारी और विपक्ष का खजाना खुलने लगे ,
तो समझ जाना चुनाव आने वाले है।