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Tuesday, April 8, 2025

बहस

 

बहुत बहस होती है ,

पुराना ज़माना अच्छा था ,

या नया जमाना अच्छा है ,

जो है , वो सामने है ,

जो सामने है ,

उसमे हम सबका ,

बराबर का योगदान है ,

अगर योगदान है ,

तो चाहे अच्छा है ,

या बुरा ,

हम सब इसके भागीदार है ,

और भागीदारी में ,

जो मिलेगा ,

उसे स्वीकार करना ,

जिम्मेदारी है ,

जिम्मेदारी से ,

अब हर कोई बचना चाहता है ,

बस मुँह फाड़ कह देना है ,

वो जमाना अच्छा था ,

और ये जमाना बुरा है,

जो अब सामने है ,

जैसा है , वही अच्छा है,

जम सकते है तो जमाओ ,

नहीं तो चुपचाप ,

नदी के गंगलोड़ की तरह ,

किनारे लगो ,

और पानी को सपाट ,

बहने दो,

जो बदलेगा , टिकेगा ,

परिवर्तन नियम है संसार का ,

समझदारी यही , तकाजा यही ,

इसके साथ जल्दी हो लो,

गंगलोड़ बनने से कोई ,

फायदा नहीं। 

 

 

 

गंगलोड़ : नदी के द्वारा किनारा किया गया पत्थर 

Wednesday, April 19, 2023

नियम

 

प्रकृति का अपना नियम है संतुलन का ,

उसके लिये कोई अमीर -गरीब होता है क्या ?

 

कुछ भी अकारण नहीं होता जहाँ में ,

किसी का नफा , किसी का नुकसान नहीं होता क्या ?

 

माना कि हरेक की अपनी क़िस्मत होती है ,

कर्मों से बहुतों ने किस्मत बदली नहीं क्या ?

 

सभी बँधे है साँसों की एक अदृश्य डोर से,

आज तक कोई अमर हुआ है क्या ?

 

जितना गुरुर , अहं पाल ले कोई ,

एक दिन मिट्टी में मिला नहीं क्या ?

 

हर रिश्ते की एक अहमियत है ,

अपेक्षा रखने से पहले उपेक्षा देखी है क्या ?

 

सुख़ -दुःख तो आते -जाते रहेंगे ,

वक्त कभी सदा सा रहता है क्या ?

 

कर्मों का स्पष्ट विधान है " आनन्द ",

बिना बीज के कोई पेड़ उगा है क्या ?

 

ज़िन्दगी तो जीना चाहती है हमारे साथ ,

हमारे पास उसकी सुनने के लिए वक्त है क्या ?