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Tuesday, August 13, 2019

स्वतंत्रता की सीमा




स्वतंत्रता की भी एक सीमा है , 
जो बस एक सूत से बँधी है , 
महीन , 
नाजुक ,
कोमल , 
बस छूने भर से टूटती है।  

स्वतंत्रता है , 
अपने निर्णय ,
खुद अपना भाग्यविधाता बनने की , 
अपने कर्मो से , 
खुद का संसार रचने की।  

उस सीमा के बाहर , 
दूसरे की स्वतंत्रता शुरू होती है , 
जितनी बार , 
वो सूत टूटती है , 
उतनी बार स्वतंत्रता , 
अपना दम तोड़ती है।  

Monday, August 14, 2017

आज़ादी के सत्तर वर्ष


आज़ादी को सत्तर वर्ष बीत गए
हम अभी तक  धर्म संप्रदाय में उलझे रहे
दुनिया ने तरक्की के नए आयाम गढ़  लिए
हम अभी तक  " बेटी बचाओ" में फंसे रहे।  

हम मेहनत की कमाई से टैक्स भरते रहे
वो हमारे पैसो से मौज उड़ाते रहे।  
हम जनता " भाईचारा " बनाते चले
वो " फूट  डालो " की नीति पर चलते रहे
आज़ादी को हमारे सत्तर वर्ष बीत गए।  

जनता के लिए - जनता द्वारा - जनता से
सरकार को हमारी सत्तर साल हो गए
गरीब जनता से चुने हुए उसके ही प्रतिनिधि
जाने कब से उसकी किस्मत के "ठेकेदार" हो गए
देखते देखते - आज़ादी को हमारे सत्तर वर्ष बीत गए।

हो सके तो इस दिवस पर - तिरंगे को ध्यान से देखना
इसके लाल रंग में करोडो का बलिदान देखना , 
हरे रंग में सबकी खुशहाली देख लेना , 
चक्र से सबकी प्रगति का मंत्र सीख लेना , 
ध्वज को थामे हुए अपने को देख लेना , 
आज़ादी का सही मतलब खुद ही समझ लेना।  



Wednesday, August 10, 2016

जागो देश के नौनिहालो !

जागो देश के नौनिहालो !
देश आज पुकार रहा !!

देकर मुझे नेताओ के हाथ !
तू क्यों सो रहा ? !!

क्या इसीलिए लाखो ने अपनी क़ुरबानी दी थी ? !
मेरी आज़ादी के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़ी थी !!

माना की तू अपनी रोज़ी रोटी कमाने में व्यस्त हैं !
मगर याद रख - मेरा भी तो तुझपर क़र्ज़ हैं !!

स्वार्थी भेड़िये मुझे नोच नोच कर खा रहे हैं !
अपना दीन ईमान सब बेच रहे हैं !!

रोम रोम मेरा काँप रहा  !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

वर्दी वालो ने वर्दी बेच दी !
नेताओ ने शर्म बेच दी !!

कोई धर्म के नाम पर गरिया रहा !
कोई जात पात की रोटियां सेंक रहा !!

देख कर मेरे घर की हालात !
अदना पडोसी भी धमका रहा !!

चाल दुश्मन चल रहा ,भाई भाई में फूट डाल रहा  !
गंगा जमुना की तहजीब में विष कोई घोल रहा !!

माँ बहनो की इज्जत से रोज़ खिलवाड़ हो रहा !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

अब भी अगर न उठा तू , बहुत देर हो जाएगी !

तेरी "भारत माता" फिर से गुलामी की जंजीरो में जकड जायेगी !! 

Monday, August 8, 2016

आजादी मतलब ज़िम्मेदारी !


खुशकिस्मत हैं हमआज़ाद देश के बाशिंदे हैं !
गुलामी के दंश और  चाबुक की मार नहीं झेले हैं !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी विरासत में पाए हैं !
जुल्मो और अत्याचारो को हमारे पुरखे सहे हैं !!

खुशकिस्मत हैं हमारे पुरखे ,  अपना बलिदान दे गए !
हमारे आज के लिए अपना सर्वस्व त्याग गए !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार बन गयी !
परतंत्रता हमारे लिए किताबी बात हो गयी  !!

यक्ष प्रश्न आज सामने खड़ा और पूछ रहा !
आज़ादी के साथ की जिम्मेदारी को फिर कैसे भूल गए ? !!

अधिकारों को लेकर हर जगह हंगामा हैं !
कर्तव्यों के लिए क्यों सन्नाटा पसरा हैं ?!!

आज़ादी सिर्फ अधिकारों का झोला नहीं हैं !
इस झोले में कर्तव्यों का  वजन भी  भारी हैं !!

आजादी का  जश्न मनाये , कर्तव्यों को  याद रखे !
देश हमारी जिम्मेदारी हैं , इसका हमेशा मान रखे !! 

अपनी अगली पीढ़ी को हमें राह दिखानी हैं !

पुरखो से मिली इस आज़ादी को सही सलामत उनको देकर जानी हैं !!

( आज़ादी की ७० वीं वर्षगांठ पर देश को समर्पित )