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Sunday, April 2, 2023

शब्द

 

लिख कम , पढ़ ज्यादा रहा हूँ आजकल ,

शब्दों की जादूगरी समझ रहा हूँ आजकल। 

 

शब्द पंक्ति दर पंक्ति बहुत कुछ कहते है ,

मगर, खाली स्थानों को भी समझ रहा हूँ आजकल। 

 

भावों को पिरोना आसान काम नहीं है ,

शब्दों का उचित चयन सीख रहा हूँ आजकल। 

 

जो लिखा है , उससे ज्यादा अनलिखा होता है ,

दो शब्दों के बीच फ़ासला समझ रहा हूँ आजकल। 

 

लिखे हुए को पढ़ना इक अलग बात है ,

लिखे हुए का मर्म समझ रहा हूँ आजकल। 

 

अभिव्यक्ति का वरदान है ये शब्द ,

कब, कैसे, क्यों,क्या- समझ रहा हूँ आजकल।  

 

तीर की मानिंद है ये शब्द ,

सार्थक संधान सीख रहा हूँ आजकल। 

Friday, May 5, 2017

शब्द

शब्द -
प्यार हैं - तकरार भी,
शांति हैं - संहार भी, 
आदर भी हैं - अपमान भी।

शब्द ,
गति  है - ठहराव भी, 
उजाला है - अंधकार भी ,
भरोसा भी हैं , विश्वासघात भी।

शब्द -
ममता  हैं - दुत्कार भी ,
प्रेरणा  हैं - तिरस्कार भी,
नम्रता भी हैं -  घमंड भी।

शब्द -
मित्र  हैं- शत्रु भी,
मरहम  है - घाव भी,
आकाश  हैं - पाताल भी।

शब्द -
गीता है , महाभारत भी ,
ख़ुशी है - गम भी ,
पीड़ा है , मरहम भी। 

शब्द-
पसंद है - घृणा भी ,
मित्र है - दुश्मन भी ,
आधार है - शून्य भी।  

Friday, April 21, 2017

शब्द और भावनाये



शब्दों और भावनाओ की आंखमिचौली जारी हैं , 
कभी शब्द -भावनाओ पर ,  
कभी भावनाये , शब्दों पर भारी हैं !

विषय बहुत , मेरा अल्प शब्दकोष  
बहुत जद्दोजहद हैं , 
मेरी लेखन यात्रा में यही शायद एक मुश्किल हैं ।  

शब्द मेरे संगी साथी अब , 
शब्द ही मेरे तीर - तलवार ,
उमड़ घुमड़ करते रहते , 
अद्भुत हैं शब्दों का संसार

ठहर जाओ कुछ पल अब , 
भावनाओ को दे दो आकार , 
मैं यायावर बन गया हूँ , 
तुम्हे ही देना हैं अब साथ।  

मिलकर शायद कुछ पंकितयों का , 
सृजन हम कर ही लेंगे , 
मेरी कलम से कुछ कविताये , 
बन कर जीवन में रस घोलेंगे।