Thursday, September 18, 2014

जीवन एक काव्य.........

कुछ अक्षरो को पिरोयो तो वो शब्द बन जाते हैं ,
कुछ शब्दों को अर्थपूर्ण रखो  तो वो पंक्ति बन जाते  हैं ,
कुछ पंकितयो को भावनाये दे कर सजाओ तो वह कविता बन जाती  हैं ,
कई कविताओ को रचो तो वह काव्य बन जाता हैं।

इसी तरह से जीवन एक  काव्य ही  तो हैं ,
हर पल यहाँ अक्षर के मानिंद ही तो हैं ,
हर घंटा एक शब्द और हर पहर एक पंक्ति ही तो हैं ,
हर दिन एक कविता और ज़िन्दगी भी कई कविताओ से भरा काव्य ही तो हैं !

हर एक का अपना जीवन और हर एक का अपना जीवन काव्य ,
कुछ खट्टी , कुछ मीठी , कुछ खुशियो भरी कविताये और कुछ में निराशा के बादलो की पंक्तियाँ ,
यूँ ही जाने अनजाने ये पल शब्दों में ढल कर पंकितया बनते  जाते हैं ,
पंकितयां फिर कविताओ में ढल काव्य का रूप लेती जाती हैं !

हर रोज़ एक नया पन्ना और एक नयी कविता रचते चले जाते हैं ,
और हम अपने जीवन काव्य में वो नया पन्ना जोड़ते चले जाते हैं ,
सिलसिला ये हर पल , हर पहर , हर दिन चलता रहता हैं ,
हम जीवन का एक एक पल जीते चले जाते है और जीवन काव्य खुद- ब- खुद रचते चले जाते हैं !

लिखो अपना जीवन काव्य करीने से , हर पल को एक नया अर्थ देकर सजाओ ,
हर पहर को एक नयी भावना से जीवित करो और हर दिन को एक नयी कविता रचो ,
जीवन काव्य हमारा हैं और इसको कुछ मायने दो ,
हर कविता में जान डाल दो वर्ना जीवन काव्य अधूरा हैं ! 

Monday, June 30, 2014

मेरी दुविधा .............

बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं , ऐसा नहीं की कुछ सोचा नहीं  !
सोचने का क्रम तो हर वक्त चलता रहता हैं ,
ऐसा भी नहीं की कोई विषय नहीं मिला ,
विषय भी बहुत मिले और उन पर बहुत सोचा भी ,

मगर जब भी भावनाओ को उकेरना की बात आयी ,
कलम थोड़ी दूर जाकर रुक सी गयी !
लिखने को बहुत था मगर दिमाग में ठिठुरन सी  लगी ,

राजनीती अब अवसरवादिता और आरोप -प्रत्यारोप तक सिमट कर रह गयी ,
सामाजिकता अब बस कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन के स्क्रीन में चिपक गयी ,
नैतिक मूल्य अब किताबो के पन्नो में ही रह गए हैं ,
प्यार -मोहब्बत - दोस्ती अब पैसे के तराज़ू में तुलने  लगे हैं ,
कुछ अपना अनुभव लिखो तो आपसे समझदार बहुत हो गए हैं ,
कल्पना शक्ति  रोज मर्रा की चीजो को सुलझाते सुलझाते दम तोड़ गयी हैं।

मगर अब भी उम्मीद नहीं खोयी हैं , हर रोज़ नए विषयो को फिर से सोचता हूँ
सोचता हूँ कुछ तो मिलेगा लिखने को, अपनी भावनाओ को शब्दों में पिरोने का,
इसी उम्मीद में हर समय कागज और कलम साथ रखता हूँ ,
क्या पता कहाँ और कैसे कोई विषय कुछ आकार  ले ले ,
तब तक मैं भी थोड़ा बहुत अपनी रोज़मर्रा की चीजो का जुगाड़ कर लू.

( पढ़ते रहिये क्यूंकि ये कारवां जारी हैं ………………………) 

Tuesday, June 10, 2014

हर बार....

हर बार गिर कर फिर संभलता हूँ मैं  ,
हर गम को भुला कर हँसता हूँ मैं ,

क्यूंकि गिर कर संभला नहीं तो फिर कैसे उठूंगा मैं ,
गम को दिल से लगा कर रखूँगा तो खुशियाँ कैसे मनाऊंगा मैं ,

हार- जीत , ख़ुशी- गम , मिलन - बिछुड़न ये सब जिंदगी के हिस्से ही  हैं ,
ये  ताउम्र चलते रहेंगे ,
फिर सोच सोच कर वक्त जाया क्यूँ करू मैं ,

मैं अपना काम करता चलता हूँ ,
परिणाम नियति पर छोड़ते चलता हूँ ,

ज़िन्दगी के इस कारवां को अपने ,
बेहतर,  और बेहतर करते चलता हूँ. 

Friday, May 2, 2014

ये चुनाव हैं ………………



हर नेता सुर्ख़ियो में रहना चाहता हैं ,
बाते हर तरह की करता हैं ,

पांच साल तो लूटने में लग जाते हैं ,
चुनावो की बेला आते ही फिर ही घर से बाहर आते हैं ,

करके उलजलूल बयानबाजी ,
एक दूसरे को नीचा दिखाते हैं ,

देश की किसी को परवाह नहीं,
बस लाइमलाइट में रहना चाहते हैं.

नेताओ की मेंढ़क दौर ज़ारी हैं ,
कोई आगे न जा पाये टांग खिचाई जारी हैं।

Tuesday, March 25, 2014

चुनावी दंगल ....

बिगुल फूंक गया देखो फिर से , आयी चुनावी बेला !
नेता जी पांच साल में फिर से जागे और बुलाया चेलो का रेला  !!

फिर से पब्लिक के पास जाना हैं , कुछ तो मुद्दा बताओ !
काम तो कुछ किया नहीं हैं , कोई तो मुद्दा सुलगाओ !!

हमने तो अपनी जेबें भर ली मगर कुछ और कसर रह गयी हैं बाकि !
अभी तो दो पुस्तो के लिए जोड़ लिया हैं , पांच पुस्ते रह गयी हैं बाकी !!

पांच साल में एक बार भी मुड़कर देखा नहीं अपने वोटर को !
वो बेचारा रो रो कर कोस रहा था अपने फैसले को !!

नेता जी सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहन हाथ जोड़े पहुँचे पब्लिक पास !
बटवाएं थे पर्चे पहले ही क्या क्या किया उन्होंने काम इन पांच साल !!

लेकिन पब्लिक इस बार समझदार निकली !
नेता जी कि पार्टियो कि खूब मौज उड़ाई !!

कही कही पर कालिख पोती और कही कही खूब डंडे बरसायी !
और कहा ," तुम चुनावी मौसम के हो मेंडक , अब तुम्हे पब्लिक कि याद आयी , लोकतंत्र कि तुमने नेताजी , कैसी धज्जियाँ उड़ाई " !!

संसद में जहाँ जनहित का कानून बनना था , तुमने कुर्सी मेज चलाये !
अपनी तनख्वाह बढ़ाने का विधेयक चंद मिनटो में पास किया ,जनता के हितो के कानून में बार बार रोड़े लगाये  !

अब हम तुम्हे लटकायेंगे और तुम्हारे पाँच सालो के कर्मो का परिणाम सुनाएंगे !
जनता को तुमने अब तक अपने हाथो कि कठपुतली समझा था , अब जनता दरबार में तुम्हारा फैसला सुनायेंगे !!

मत भूलो नेताजी , तुम्हारे लिए भले ही पांच साल का वक्त बहुत कम होता हैं !
जनता का हर रोज़ तिल तिल जीना - मरना होता हैं !!

सुधर जाओ अब भी वक्त हैं - जनता का असली गुस्सा अभी बाकी हैं !
एक बार फिर मौका दे रही हैं - नहीं तो ज़लज़ला अभी बाकी हैं !!

जनता के चुने हुए नुमाइंदे हो , उनके हित की भी सोचो !
लोकतंत्र में खुद को भगवान तो न समझो !!

जिस दिन जनता का पारा थोडा सिर से ऊपर चला जायेगा !
दौड़ा दौड़ा कर मारेगी फिर तू कहाँ जायेगा !!

Tuesday, March 18, 2014

हिसाब किताब ................

जीवन कि इस भागमभाग  में कुछ तो वक्त निकालना पड़ेगा,
कुछ देर कही थोडा बैठकर ,
कुछ तो हिसाब किताब लगाना होगा।

क्या खोया क्या पाया का हिसाब किताब भले ही न लगाये ,
मगर अब तक जो रास्ता तय किया हैं ,
उसको एक बार पलट कर देखना होगा,
आगे फिर कैसे बढ़ना हैं ? इसको तो तय करना  होगा ,

चंद फुर्सत के क्षण अपने को देने होंगे ,
अपने तरकश के तीरो को फिर से तराशना होगा ,
अपने अंदर के जूनून को फिर से जगाना होगा ,
सफ़र लम्बा हैं ज़िन्दगी का ,
अपने पसीने को थोडा सा तो  सुखाना होगा ,
अपने को जो भूल गया हूँ , उसे याद तो दिलाना होगा।

बेशक ! आगे बढ़ने कि ख्वाइश हैं तेरी  ,
उसमे किसी को गुरेज क्यूँ होगा ,
तू अपनी ज़िन्दगी का खुद मालिक हैं ,
किसी और क्या क्यों इस पर अख्तियार होगा ,

मगर  ………………
जीवन कि इस भागमभाग  में कुछ तो वक्त निकालना पड़ेगा,
कुछ देर कही थोडा बैठकर ,
कुछ तो हिसाब किताब लगाना होगा।  

Friday, February 21, 2014

चंद पंक्तियाँ

सपने देखते रहिये क्यूंकि यही आपको आगे ले जायेंगे,
थक भी जाओगे कभी फिर से ऊर्जा भरेंगे ,

लगे रहिये ज़िन्दगी को और बेहतर बनाने कि ओर  ,
मगर कदम जमीन पर ही रखिये ,

आसमान भले ही विशाल दिखता हो मगर,
अपना आसमां खुद ही बनाइये ,

खोने  के लिए कुछ भी नहीं हैं हमारे पास ,
आगे बढ़ते रहने कि ललक मन में बनाइये रखिये ,

सफ़र में थोड़े रोड़े आ भी गए तो क्या हुआ ,
आगे सुहाना सफ़र हैं इसे याद रखिये,

खुद को कमजोर या अकेला कभी मत समझिये ,
वो खुद हर वक्त साथ हैं याद रखिये ,

कभी अगर थोडा बुरा होता हैं तो आँसू छलकाने से भी मत डरिये ,
और अगर अच्छा हो तो अपने को शाबाशी भी देते रहिये ,

जीवन ये खुदा कि नियामत हैं ,
हर समय इसे याद रखिये।  

Sunday, December 15, 2013

मैं और मेरी ज़िन्दगी .......

बहुत कुछ कर गुजरने कि तमन्ना ,
जीने नहीं देती हैं  ,
कुछ न हो पाने कि बेचैनी ,
सोने नहीं देती हैं ,

कश्मकश हर रोज़ चलती हैं ज़िन्दगी और मेरी ,
कभी उसका पलड़ा भारी तो कभी मेरा हाथ ऊपर होता है ,
हम दोनों कभी एक दूसरे को उकसाते हैं ,
तो कभी शांत रहने कि सलाह देते हैं ,

ज़िन्दगी हर रोज़ सवाल करती हैं ,
मेरे बीते दिन का हिसाब पूछती हैं ,
आगे के प्लान के बारे में पूछती हैं ,
कभी मैं हँस के जवाब देता हूँ ,
तो कभी चुप रहने को भी बोलता हूँ ,

जदोजहद चलती रहती है हर रोज़ हमारी ,
शायद इसलिए मै भी लाइन पर रहता हूँ ,
उसके  सवालो से कुड़ता भी हूँ ,
तो मन ही मन उसका शुक्रिया भी अदा  करता हूँ ,
क्यूंकि मेरी ज़िन्दगी मेरा आइना ही तो हैं ,
जिसमे मैं हर रोज़ अपना अक्श टटोलता हूँ .

मैं सिर्फ मैं तक सीमित हूँ
मगर मेरी ज़िन्दगी मेरा व्यक्तिव बनाती हैं ,
हर अच्छे बुरे वक्त में मेरा साथ निभाती हैं ,
बहकता भी हूँ कभी हवा के झोंके में तो ,
मुझे फिर से लाइन पर लाती हैं . 

Sunday, November 24, 2013

इंसानी सोच और दिमाग का कारवां...

अदभुत क्षमता हैं इंसान में ,
बस अपनी पहचान करने कि जरुरत हैं ,

राईट बंधुओ ने पक्षियों को देख कर हवाई जहाज कि कल्पना साकार कर ली ,
नील आर्मस्ट्रांग ने धरती के आकाश से निकल कर एक दूसरे आकाश कि यात्रा की,

एडिसन ने बल्ब देकर अपने नन्हे सूरज से अँधियारो में रौशनी भर दी ,
बेयर्ड ने टी वी बनाकर दुनिया एक बॉक्स में सिमटा दी ,

इंसान कि क्षमताओ से कंप्यूटर ने हमारी ज़िन्दगी बदल ली ,
इंटरनेट ने एक क्लिक पर सारी दुनिया आपकी मुट्ठी में लाकर रख दी ,

किसी ने टायर बनाकर जगहो  कि दूरियां मिटा दी ,
किसी ने रोगो से लड़ने कि दवा बना दी ,

इंसानी क्षमता और दिमाग को शत शत नमन ,
उन लोगो को नमन जिन्होंने हमारे लिए दुनिया इतनी आसान कर दी ,

अद्धितीय हैं इंसान कि क्षमता ,
सीमाओ से परे ,
सागर से गहरी ,
पर्वतो से पार ,

एक नन्ही सी सोच क्रांति ला देती हैं ,
एक नन्हा सा कदम इतिहास बना देता हैं .

क्या इंसान के दिमाग कि कोई थाह हैं ?
मुझे समझ नहीं आता ,
हर बार लगता हैं शायद इसके बाद अब कुछ नहीं ,
अगले पल , वो और आगे चला जाता हैं ......

शायद ये इंसानी सोच और दिमाग का कारवां हैं ,
कहाँ थमेगा कोई नहीं जानता .............

Sunday, November 17, 2013

शुक्रिया सचिन !

आयेंगे और भी सचिन मगर सचिन तेंदुलकर एक ही रहेगा ,
क्रिकेट के आकाश में ध्रुव तारे कि तरह चमकता रहेगा ,
क्रिकेट का पर्याय बन कर अलविदा कह गया उसका एक पूजारी ,
बाइस गज कि पिच से अलविदा हो गया उसका एक महान खिलाडी ,
क्रिकेट के लिए तो तुम याद रखे ही जाओगो ,
उससे ऊपर हमें इस खेल का  आदी बनाने के लिए याद आओगे ,
क्रिकेट हम अब भी देखेंगे , हर जीत पर जश्न और हर हार पर गम मनाएंगे ,
मगर पिच पर तुम्हारे आने से जो एक भरोसा जगता था ,
शायद अब वो न कर पाएंगे ,

शुक्रिया सचिन ! ज़िन्दगी कि इस आपाधापी में कुछ ख़ुशी के पल देने के लिए ,
शुक्रिया सचिन ! एक शिखर पर पहुँच कर भी शालीनता का सबक सिखाने के लिए ,
शुक्रिया सचिन ! क्रिकेट के इस खेल को धर्म बनाने के लिए ,
शुक्रिया सचिन ! एक मानव कैसा महामानव बनता हैं दिखाने के लिए .
शुक्रिया सचिन ! हमें अपने में विश्वास सीखाने के लिए .

क्रिकेट कि जब जब बात होगी , हमारी पीढ़ी तुम्हे जरुर याद रखेगी .
हा ! हमने सचिन को खेलते देखा हैं का गुमान करेगी . 

Thursday, October 24, 2013

आगे बढ़ते रहना होगा ......


कदम बढाएंगे तो ही आगे बढ़ेंगे ,
जडवत होकर तो एक ही जगह ठहर जायेंगे ,

पकडे रखो एक छोर ज़िन्दगी का ,
कहीं न कही तो पहुँच ही जायेंगे ,

कैसा ही समय हो - भला या बुरा ,
"सदा " नहीं रहता हैं ,
बेफिक्र अपने लक्ष्य को बढ़ते चलो ,
कही पर फूल , कही कांटे आते रहेंगे ,
कही पर जाने पहचाने रास्ते और ,
कही पर अनजाने रास्ते भी आयेंगे

किसी मोड़ पर बहुत साथ देने वाले मिलेंगे
तो अगले मोड़ पर अकेले भी रास्ते तय करने होंगे ,

कही पर प्यार तो कही पर दुत्कार भी मिलेगी ,
चलते रहने का नाम ही तो ज़िन्दगी हैं .

आशा और निराशा आती रहेंगी ,
धूप  छाँव भी आँखमिचोली खेलेगी ,
राह दिखने वाले भी मिलेंगे तो ,
राह भटकाने वाले भी रास्ता देखेंगे ,

ठोकरे भी लगेंगी तो कही सहलाव भी मिलेगा ,
कही पर पहाड़ सरीखे रास्ते भी मिलेंगे ,
तो कही ढलान भी मिलेगा ,

कही पर अपना विश्वास भी डोलेगा ,
तो अगले पल प्रेरणा भी मिलेगी ,

इस सफ़र में ये सब चलता रहेगा ,
मगर आगे बढ़ते रहना होगा . 

Tuesday, October 8, 2013

समय…….

समय की शक्ति और सामर्थ्य के आगे सब नतमस्तक ,
समय से बड़ा गुरु और मार्गदर्शक और कोई नहीं ,
जिसने इसकी शक्ति को समझा और जाना ,
उससे बढ़ा इस दुनिया में कोई ज्ञानी नहीं ,

समय ही रंक को कभी राजा तो कभी राजा को रंक बनाता हैं ,
न ये किसी के रोके रुकता हैं और न इसे खरीदा जा सकता हैं ,
ये अटल सत्य है जो अनवरत चलता  जाता हैं ,

न तो यह किसी के लिए कोई भेद करता हैं ,
न किसी को कुछ ज्यादा या कम देता हैं ,
अपने में समेटे हुए कितने दुःख और सुख के पल ,
ये बस बीतता चला जाता हैं ,

बीते हुए समय को हम यादे बना लेते हैं ,
अभी जो समय चल रहा हैं उसे जीते हैं ,
आने वाले समय के लिए ना जाने क्या क्या सपने संजोये रखते हैं ,

हम ताउम्र इसके  साथ तालमेल बैठाने का प्रयत्न करते है ,
मगर इसकी बेवफाई का आलम ये होता हैं ,
जिस पल को हम सबसे ज्यादा जीना चाहते हैं ,
उसी में ये सरपट भागता हैं और जो पल हम जल्दी बिताना चाहते हैं ,
उसी में इसकी रफ़्तार सबसे सुस्त पाते हैं .

हर पल ये छलावा करता रहता हैं ,
अगर अभी सही हैं तो न जाने आने वाले पल में क्या छुपाये बैठा हैं ,
इसलिए न इसकी दोस्ती अच्छी और न दुश्मनी ,
बस इसको अपनी गति से चलते जाने दो ,
हो सके तो इसके हर पल को जीना सीख लो . 

Thursday, September 26, 2013

शिखर...........

शिखर को देख कर हमें भी उसके जैसा होने की लालसा होती हैं ,
उसकी उच्चाई हमें उसके बहुत बढे होने का एहसास कराती हैं ,
हम भी झटपट उस शिखर के बराबार होने चाहते हैं ,
मगर , उस शिखर को शिखर बनने की उसकी कवायद को हम भूल जाते हैं ,

कैसे उसने अपना सफ़र तय किया होगा ,
कितने थपेड़ो  को उसने झेला होगा,
हर मौसम की मार उसने सही होगी ,
कितनी जानी अनजानी रूकावटो से वह लड़ा होगा,

कितने अवरोधों से लड़कर वह आगे बढता रहा होगा ,
ना जाने क्या क्या सहकर वह आज इस मुकाम पर पहुंचा होगा ,
अपने न हारने के जज्बे को उसने कितनी बार समेटा होगा ,
अपने कितने अपनों को उसने इस यात्रा में छोड़ा होगा ,

हमें भी उसके जैसा बनना हैं तो बहुत कुछ छोड़ना होगा ,
लक्ष्य एक बनाकर उसके पीछे भागना होगा ,
रास्ते के ठोकरों को फूल समझकर  पार पाना होगा ,
अपनी हिम्मत और जिद्द को अपना हथियार बनाना होगा .

माना की कठिन हैं राह - मगर हौंसला  तो दिखाना होगा ,
कदम एक तो उठाना होगा ,
खोने के लिए तो कुछ नहीं हमारे पास , जो मिलेगा वो तो पाना ही होगा ,
गर जिगर में आग लग जाए तो फिर उसे बुझाना तो होगा . 

Saturday, August 17, 2013

मेरा देश , मेरा गर्व

क्यों न गर्व करू मैं  अपने देश पर ,
मेरा देश मेरा गौरव हैं ,
इसकी मिटटी से ही तो बना हूँ मैं ,
इसी धरती पर तो रहता हूँ मैं ,
इसकी हवा से सांसे चलती हैं मेरी ,
इसी की मिटटी से उपजा अन्न खाता हूँ मैं ,

माना की समस्याये बहुत हैं मगर ,
इसी की आजाद धरती पर बेपरवाह घूमता हूँ मैं,
ये बुरा हैं , ये अच्छा हैं कहने की ताकत तो रखता हूँ मैं ,
कभी अपनी सरकार को , कभी अपने सिस्टम को ,
कोसने का अधिकार तो रखता हूँ मैं ,

जो हैं  , जैसा चल रहा हैं उसका सीधा भागीदार हूँ मैं,
सरकार भी चुनता हूँ मैं ,
सिस्टम भी बनाता बिगाड़ता हूँ मैं ,
अपने हित के लिए प्रक्रति से खिलवाड़ भी करता हूँ मैं ,
अन्याय का विरोध भी पुरजोर आवाज से नहीं करता मैं ,

फिर मैं देश पर गर्व क्यों न करू ,
इतना कुछ होने के बाद इसी की आगोश में बेफिक्री की नींद सोता हूँ मैं ,
इसी की रोटी , इसी का पानी , इसी की हवा  में जीता हूँ मैं ,
फिर देश को बुरा क्यों कहूँ मैं ,
गर्व करने के हजारो कारण हैं मेरे पास ,
न करने के कुछ गिने चुने ,
मेरा देश तो सबसे महान हैं ,
सारी दुनिया का ताज हैं .........

Monday, August 5, 2013

अजीब कशमकश .....

मै अपनी  बिटिया के साथ जा रहा था
रास्ते में एक भिखारी मिला
वो  मुझसे  कुछ   रुपये मांग रहा था
मै  कई जगह ऐसे भिखारियों से टकराता  हूँ
उसको "  बाबा हमें माफ़  करो , आगे बढ़ो
कहता हुआ निकला  जा रहा था
चंद  कदम आगे भी बढ़ा था,
मेरी चार साल की बिटिया ने  मुझे पीछे खीचा और कहा ,
" पापा ,  आपने उन बूढ़े अंकल को पैसे  क्यूँ  नहीं दिए
वो अपने खाने के  लिए ही तो   पैसे मांग रहे थे
 उनके  पास पैसे नहीं होंगे , आप दे देते
चलो , उनको कुछ  पैसे दो
मैंने कहा ," बेटा , मेरे पास पैसे नहीं हैं
तो वह तपाक से बोली, " पापा, झूठ नहीं बोलते , आपके पर्स में पैसे तो हैं
मैंने कहा , " बेटे , पैसे तो हैं मगर खुले पैसे नहीं हैं बाबा को देने के लिये
तो वह बोली ," तो खुले करवा लो फिर दे दो
मैं उसको अनसुना करके आगे बढ़ना लगा,
वो रोने लगी , " पापा , आपने अंकल को पैसे क्यूँ नहीं दिए
अब वो क्या खायेंगे , कहाँ जायेंगे ?"
मैंने बिटिया की आँखों से बहता पानी देखा और 
पर्स निकाल कर दस रुपये का नोट निकाल कर बाबा को आवाज देकर बुलाया ,
बाबा को पैसे देकर थोडा आगे बढ़ा  तो बिटिया को फिर से बढ़ा खुश पाया
अब वो उस घटना को भूल चुकी थी
मगर मेरे सामने सबको और इंसानियत के कई सवाल छोड़ गयी थी , 
मैंने उसे गोद में उठाया और इधर उधर की बातो में फंसाया
वो भोला सा मन फिर से चहकने लगा
और मै घबरा रहा था अब कही और कोई मांगने वाला मिल जाये

जिससे मेरी बेटी फिर मेरे पीछे पड़ जाये