Wednesday, December 9, 2020

सफर

 

ऐ ज़िन्दगी !

तेरे साथ चलते चलते एक दिन ,

मैं भी थक जाऊंगा ,

तुम आगे बढ़ते रहोगे , मैं हट जाऊँगा ,

फिर तुम्हारे साथ कोई नया होगा ,

शायद मुझसे बेहतर होगा ,

हो जिक्र कभी सफर का ,

बस तुम मुस्करा के कह देना ,

छोड़ आया हूँ पीछे किसी को ,

तुम्हारे सवाल का उत्तर देने से पहले ,

वो याद आ गया। 

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