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Wednesday, July 2, 2025

प्रकोप

 

नदी, नाले, गधेरे, पहाड़, जंगल

आपसे कुछ नहीं कहेंगे ,

मगर जब आप उनका हक़ छीनोगे ,

इक दिन एक झटके में सब ले लेंगे। 


सहने की भी इक सीमा होती है ,

वो उससे ऊपर भी सह जाते है ,

असहनीय अतिक्रमण हो जाता है जब ,

वो भी अपना गुस्सा जाहिर करते है। 


 कुदरत जानती है संतुलन बनाना ,

वो उसका नैसर्गिक स्वभाव है ,

जरूरतें तो पूरी कर सकते है ये सब ,

लालच का तो इनके पास भी नहीं कोई समाधान।  

Saturday, May 24, 2025

पहाड़ जरूर आना

 

तुम इक दिन पहाड़ जरूर आना ,

पहाड़ सिखायेगा तुम्हे ,

उतार -चढ़ाव में संभलने का सलीका ,

कैसे चढ़ाव में झुकना पड़ता है ,

कैसे उतार में सीधा रहना पड़ता है ,

 

पहाड़ सिखायेगा तुम्हें ,

मुश्किलों में कैसे जिया जाता है ,

एकांत क्या होता है ,

कैसे ज़िंदा रहा जा सकता है ,

सिर्फ हवा ,पानी पर। 

 

पहाड़ वो पाठ पढ़ा सकता है तुम्हे ,

जो शायद किताबों में नहीं होता ,

पहाड़ तुम्हें समझायेगा ,

भले ही कितने ही ऊँचे हो जाओ ,

तलहटी में सब बराबर होते है।

 

पहाड़ तुम्हे अनुभूति देगा ,

धैर्य पैदा करेगा तुम्हारे भीतर ,

जीवन का वो सार बतायेगा ,

जो लिखा -पढ़ा नहीं गया है कही पर ,

उतार -चढ़ाव का नियम सब पर लागू बराबर।  

Wednesday, August 9, 2023

पहाड़ों की एक ढलती शाम

 

इक पहाड़ से उगा ,

दूसरे पहाड़ से डूबेगा ,

इन दोनों पहाड़ों के बीच ,

पहाड़ों का एक आकाश ,

उस पहाड़ से जब उगा ,

तो उस पहाड़ में हुआ सवेरा ,

अब इस पहाड़ से नीचे ढलेगा ,

उस पहाड़ पहले होगी सांझ ,

दोनों पहाड़ों को बराबर मिलेगी ,

दिव्य भास्कर की किरणों की बरसात ,

फिर उतरेगा एक पहाड़ से अँधियारा ,

नीचे तलहटी पर घुप्प अन्धकार ,

टिमटिमायेगी कुछ कृत्रिम रोशनाईयां ,

कुछ इस पहाड़ , कुछ उस पहाड़ ,

बस सुनाई देगा अँधेरे में ,

बहते पानी का शोर ,

दूर कही किसी घर में ,

किवाड़ बंद करने की आवाज ,

उतर आयेंगे जंगलों से ,

तेंदुए , बाघ और सियार ,

सन्नाटे को कभी -कभार चीरती ,

दूर कही सड़क पर चलती मोटर कार ,

मनमोहक दृश्य ,नयनभिराम ,

जवान होती रात में ,

पहाड़ खामोश और विराम ,

इन्तजार में अगले सूरज का ,

तब तक पहाड़ों में अटूट विश्राम।