Showing posts with label almora. Show all posts
Showing posts with label almora. Show all posts

Saturday, May 24, 2025

पहाड़ जरूर आना

 

तुम इक दिन पहाड़ जरूर आना ,

पहाड़ सिखायेगा तुम्हे ,

उतार -चढ़ाव में संभलने का सलीका ,

कैसे चढ़ाव में झुकना पड़ता है ,

कैसे उतार में सीधा रहना पड़ता है ,

 

पहाड़ सिखायेगा तुम्हें ,

मुश्किलों में कैसे जिया जाता है ,

एकांत क्या होता है ,

कैसे ज़िंदा रहा जा सकता है ,

सिर्फ हवा ,पानी पर। 

 

पहाड़ वो पाठ पढ़ा सकता है तुम्हे ,

जो शायद किताबों में नहीं होता ,

पहाड़ तुम्हें समझायेगा ,

भले ही कितने ही ऊँचे हो जाओ ,

तलहटी में सब बराबर होते है।

 

पहाड़ तुम्हे अनुभूति देगा ,

धैर्य पैदा करेगा तुम्हारे भीतर ,

जीवन का वो सार बतायेगा ,

जो लिखा -पढ़ा नहीं गया है कही पर ,

उतार -चढ़ाव का नियम सब पर लागू बराबर।  

Thursday, November 30, 2017

उने रे , साल मी एक बार ( (कुमाउँनी कविता)



उने रे , साल मी एक बार 
खोल दिए आपुण घरे द्वार, 
बाँझ झन पड़िए दिए , 
जरूर अये साल मी एक बार।  

खौ मी अब सिसूण जाम गो , 
भेतर हेगी चौबाट , 
पाखेक पाथर चोर ही ल गो , 
बल्लियों में पड़ गे दरार।  

त्यर निशाणी उसकये छीन , 
करनि रोज़ त्यर इंतजार , 
फल - फूलो बोठो में बानर भे गी , 
लुके री मीन त्यर लीजी अनार।  

तु , जा ल छ , खूब तरक्की करिये , 
आपुण गौ -गाड़ नाम रोशन करिये ,
बस एक विनती छू , 
आपुण गौ- गाड़ झन भूलिए।  

उने रे ईज़ा , साल मी एक बार 
खोल दिए आपुण घरे द्वार, 
बाँझ झन पड़िए दिए , 
जरूर अये साल मी एक बार।