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Wednesday, August 5, 2026

मन के अंतरतल में

 

मन के अंतरतल में यादों के दरख़्त गहरे,

उम्मीदों के सफ़र में यायावर चल धीरे-धीरे,

वक़्त एक बँधा हुआ है तेरे संग,

मौज से ख़र्च कर, मुस्करा हौले-हौले।

 

धूप भी तेरी है, छाँव भी तेरी,

राह की हर ठोकर एक सीख है गहरी,

हर मोड़ पर ठहर, ज़रा ख़ुद से भी मिल,

ज़िंदगी खुलती है हौले-हौले।

 

जो बिछड़ गए, उन्हें दुआओँ में रहने दे,

जो मिल गए, उन्हें दिल में बसने दे,

हर रिश्ता मुकम्मल हो, ये ज़रूरी तो नहीं,

कुछ अहसास महकते हैं हौले-हौले।

 

ना मंज़िल की फ़िक्र में सफ़र खो देना,

ना कल की चिंता में आज रो देना,

जो पल हथेली पर आकर ठहर गया,

उसे जी भर जी ले हौले-हौले।

 

जब अंत में मुड़कर देखेगा यह कारवाँ,

दौलत, शोहरत करेगी बयाँ,

बस मुस्कानों की पूँजी साथ रहेगी ,

और मन कहेगा-खूब जिया हौले-हौले।

Tuesday, March 18, 2025

यायावर

 

सुनो यायावर ,

कहाँ तक जाना है ?

और क्या पाना है ?

पता नहीं ,

हाँ ,लेकिन सब कहते है ,

चलते जाना है। 

 

अच्छा,

अभी तक जितना चले हो ,

उसमे से कुछ याद हैं ,

हाँ, धुँधला सा ही है ,

भागते भागते कहाँ कुछ दिखता ,

और याद रहता है। 

 

बताओ ,

किस चीज की तलाश है ,

बहुत कुछ ,

उस बहुत कुछ में ,

क्या -क्या शामिल है ,

पैसा , रुतबा , ईज्जत ,

कामयाबी , प्रसिद्धि ,

प्यार , मोहब्बत ,

सब कुछ। 

 

अभी तक कितना पाया ,

पाने से अधिक तो खोया है ,

झोले में जितना भरता है ,

उससे ज्यादा तो गिरता है ,

सोचा झोली भर जायेगी ,

सुकून मिल जायेगा ,

शांति से फिर सफर चलेगा ,

मगर उल्टा हो रहा है ,

भागदौड़ में बस ,

सफर चल रहा है ,

 

तो सुनो यायावर ,

कोई मंत्र तो नहीं मेरे पास ,

मगर एक तंत्र है ,

क्षण -क्षण का लुफ्त उठाओ ,

सफर में थोड़ा रुको ,

एहसास करो ,

जो है, उसका मजा लो ,

चलना तो है ही ,

हर मील पार करने पर ,

ठहरो , रुको ,

और जश्न मनाओ।