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Saturday, October 7, 2023

श्रीराम वंशावली गाथा

ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए ,

मरीचि फिर कश्यप जने ,

कश्यप के सुत विवस्वान हुए ,

विवस्वान से प्रतापी वैवस्वत मनु हुए। 

 

मनु के कुल में इक्ष्वाकु जन्मे ,

कुक्षि -विकुक्षि से बाण हुए ,

बाण पुत्र अनरण्य चले ,

अनरण्य से महाराज पृथु जन्मे। 

 

पृथु वंश फिर त्रिशंकु बढ़ाये ,

त्रिशंकु से धुन्धुमार हुए ,

धुन्धुमार से युवनाश्व बढ़े ,

युवनाश्व से महान मान्धाता जने। 

 

मान्धाता का तेज सुसन्धि में आया ,

सुसन्धि से ध्रुवसन्धि में तेज बढ़े ,

भरत , ध्रुवसन्धि पुत्र कहलाये ,

इक्ष्वाकु कुल का मान बढ़ाये। 

 

भरत , असित को राजकाज सौंपे ,

असित के पुत्र सगर कहलाये ,

सगरपुत्र असमञ्ज साकेत संभाली ,

असमञ्ज फिर अंशुमान तात कहलाये। 

 

दिलीप जन्मे फिर भरत कुल में ,

महान भगीरथ  पुत्र रूप में पाए,

भगीरथ से ककुत्स्थ जन्मे ,

फिर रघु जैसा प्रतापी राजा पाये। 

 

रघुकुल की हुई बहुत बड़ाई ,  

प्रवृद्ध, शंखण, सुदर्शन,अग्निवर्ण

शीघ्रग , मरु, प्रशुश्रुक ,अम्बरीश,

सब रघुकुल तिलक कहलाये। 

 

अम्बरीश के कुल में नहुष हुए ,

नहुष कुलदीपक ययाति बने ,

ययाति से नाभाग जन्मे ,

नाभाग से शूरवीर अज हुए। 

 

अज के घर फिर दशरथ जन्मे ,

अयोध्या में राज -काज फले ,

दशरथ के भाग्य में पुत्ररूप में ,

नारायण स्वयं " राम " बने। 

 

धन्य है भाग्य अयोध्या के ,

साकेत नगरी खुद साक्ष्य बने ,

कण -कण राममय जिस भूमि का ,

वो " अयोध्या जी महाराज " कहलाये।