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Thursday, January 11, 2024

मेरे राम

 

राम खास है , राम विशेष है ,

राम मनुष्य जगत में सर्वश्रेष्ठ है ,

राम पूजने के लिए नहीं है ,

राम अनुसरण के योग्य है ,

राम मनुष्यता के उदाहरण है ,

राम मनुजता की धरोहर है ,

राम राजा के रूप में अतुलनीय है ,

राम पुत्र रूप के मानक है ,

राम धैर्य और संयम की खान है ,

राम भ्रात प्रेम के रूपक है ,

राम दीन -दुखियों के मित्र है ,

राम दुष्टों के संहारक है ,

राम सबरी के प्रेम में भूखे है ,

राम अहिल्या उद्धारक है ,

राम रघुकुल तिलक है ,

राम सिया संग बीजक है ,

राम हनुमान के प्रिय है ,

राम धर्म के संरक्षक है ,

राम दया है , राम निधान है ,

राम नाम ही सम्पूर्ण है ,

राम खास है , राम विशेष है ,

राम मनुष्य जगत में सर्वश्रेष्ठ है। 





Friday, January 5, 2024

श्रीराम

 

 


बड़भागी भये हम सब जन ,

देख पायेंगे वो दृश्य महान ,

रामलला  विराजेंगे सिंहासन ,

हर तरफ हो मंगलगान। 

 

ख़त्म हुआ दूसरा वनवास ,

आयेंगे फिर रघुकुल निधान ,

कण -कण रोमांचित अयोध्या का ,

राम नाम ही सत्य अहान। 

 

राम सर्वथा , राम सर्वदा ,

राम संयम , राम मर्यादा ,

राम सबके , राम मेरे ,

राम नाम जगत में सदा।

 

युग बदला , समय बदला ,

बदला नहीं बस राम का नाम ,

हर्षित हर तन -मन आज ,

बसो हर ह्रदय हे ! करुणानिधान।

 

Thursday, November 2, 2023

सागर स्तुति

 


हाथ जोड़े तट पर बीत गए दिन तीन ,

जलाधीश का फिर भी मन न पिघला,

आँख बंद , ध्यान लगाए एक शिला पर ,

करते रहे याचना, स्तुति करे जगदीश। 

 

लक्ष्मण पुनि -पुनि समझाये ,

सामर्थ्य पर विश्वास करो कौशलधीश ,

शांति से जहाँ सुलझ जाये बात ,

क्यों उपयोग करो तूणीर –तीर कहे कुलधीश ।  

 

अनुनय -विनय गुण है वीर का ,

उसको सुशोभित होती है ,

युद्ध तो बहुत सरल मार्ग है ,

तलवार फिर शीश  माँगती है।  

 

जड़बुद्धि  विनय समझ न पाया ,

लोभी से कैसे दान की आशा ,

कुटिल न समझे प्रीत की भाषा ,

धैर्य , संयम की भी एक सीमा। 

 

लाओ , लक्ष्मण - तूणीर लाओ ,

अब धनुष पर अग्नि बाण संधान होगा ,

सूखा दूँगा इस जलातिरेक को ,

इस मूर्ख को अब ज्ञान न दूँगा। 

 

क्रोधित राम की आँखे हुई लाल ,

प्रत्यंचा चढ़ा , धनुष हाथ लेकर की टँकार ,

कांप उठे सब जल -थल- आकाश चराचर ,

"त्राहिमाम-त्राहिमाम " जग गया सागर। 

 

प्रकृति विधान सब आपका प्रभु ,

सब आपके आदेश अधीन ,

मैं जड़बुद्धि कैसे न मानूँ ,

जब साक्षात् खड़े हो जगदीश। 

 

युक्ति मैं बतलाता हूँ ,

सागर पार कराता हूँ ,

रामकाज में विघ्न कैसा ,

खुद का परलोक सुधारता हूँ। 

 

Saturday, October 7, 2023

श्रीराम वंशावली गाथा

ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए ,

मरीचि फिर कश्यप जने ,

कश्यप के सुत विवस्वान हुए ,

विवस्वान से प्रतापी वैवस्वत मनु हुए। 

 

मनु के कुल में इक्ष्वाकु जन्मे ,

कुक्षि -विकुक्षि से बाण हुए ,

बाण पुत्र अनरण्य चले ,

अनरण्य से महाराज पृथु जन्मे। 

 

पृथु वंश फिर त्रिशंकु बढ़ाये ,

त्रिशंकु से धुन्धुमार हुए ,

धुन्धुमार से युवनाश्व बढ़े ,

युवनाश्व से महान मान्धाता जने। 

 

मान्धाता का तेज सुसन्धि में आया ,

सुसन्धि से ध्रुवसन्धि में तेज बढ़े ,

भरत , ध्रुवसन्धि पुत्र कहलाये ,

इक्ष्वाकु कुल का मान बढ़ाये। 

 

भरत , असित को राजकाज सौंपे ,

असित के पुत्र सगर कहलाये ,

सगरपुत्र असमञ्ज साकेत संभाली ,

असमञ्ज फिर अंशुमान तात कहलाये। 

 

दिलीप जन्मे फिर भरत कुल में ,

महान भगीरथ  पुत्र रूप में पाए,

भगीरथ से ककुत्स्थ जन्मे ,

फिर रघु जैसा प्रतापी राजा पाये। 

 

रघुकुल की हुई बहुत बड़ाई ,  

प्रवृद्ध, शंखण, सुदर्शन,अग्निवर्ण

शीघ्रग , मरु, प्रशुश्रुक ,अम्बरीश,

सब रघुकुल तिलक कहलाये। 

 

अम्बरीश के कुल में नहुष हुए ,

नहुष कुलदीपक ययाति बने ,

ययाति से नाभाग जन्मे ,

नाभाग से शूरवीर अज हुए। 

 

अज के घर फिर दशरथ जन्मे ,

अयोध्या में राज -काज फले ,

दशरथ के भाग्य में पुत्ररूप में ,

नारायण स्वयं " राम " बने। 

 

धन्य है भाग्य अयोध्या के ,

साकेत नगरी खुद साक्ष्य बने ,

कण -कण राममय जिस भूमि का ,

वो " अयोध्या जी महाराज " कहलाये। 


Tuesday, November 29, 2022

शबरी : धैर्य और प्रतीक्षा

  

नित बुहारती वो पथ ,

न जाने कब राम आ जायेंगे ,

चुन -चुन कर कन्दमूल ,

मेरे राम खायेंगे ,

सावन पर सावन बीते ,

कमर झुक सी गयी श्रमणा की ,

थका नहीं विश्वास मगर ,

गुरु की बात गाँठ बाँधी ,

आयेंगे , आयेंगे ,

मेरे राम आयेंगे ,

पथ पर नित फूल बिछाती ,

दर्शन को प्यासी वो ,

राम -राम ही भजती ,

इक दिन फिर वो ,

चमत्कार हो ही गया ,

जब देखी दो युवकों की परछाई ,

खुल गए भाग्य भीलनी के ,

रघुकुल तिलक सामने पाई ,

जन्म -जन्म की आस ,

देखो कैसे पूर्ण होने को आई ,

खुद चलकर राम आश्रम पधारे ,

कभी राम का मुख देखती ,

कभी बेरों की टोकरी ,

आँसू टप -टप गिरे आँखों से ,

इस धैर्य और प्रतीक्षा  की ,

खुद समय दे रहा था गवाही ,

भाव -विह्वल शबरी ,

देख राम निहाल हो गयी ,

आधे बेर खिलाये राम को ,

आधे बेर जमीन पर गिराई ,

अराध्य और भक्ति के ,

अदभुत मिलन पर प्रकृति मुस्काई ,

लाख -लाख आशीष दे ,

शबरी ने देखो -गति पाई ,

धैर्य जीता , प्रतीक्षा जीती ,

भगवान को कुटिया तक खींच लायी।

Tuesday, February 12, 2019

मैं अयोध्या हूँ




रघुकुल गौरव , 
रामराज्य की साक्षी , 
मैं  कौशलपुर साकेत नगरी हूँ, 
मैं अयोध्या हूँ।    

मैं रामजन्मभूमि -कर्मभूमि 
सीता का ससुराल ,
राजा दशरथ का वचन हूँ, 
मैं अयोध्या हूँ।  

त्रेता युग से कलयुग ,
न जाने कितनी बार ढही , 
फिर भी सरयू तट पर तन कर खड़ी हूँ,
मैं अयोध्या हूँ।  

खड़ाऊं से सिंहासन , 
वो भ्रातप्रेम , 
उच्च आदर्शो के प्रतिमानो  के खम्बो पर टिकी हूँ , 
मैं अयोध्या हूँ।  

राम बसे मेरे कण कण में , 
वैभवशाली इतिहास ,
मैं रामराज्य की अंतिम धरोहर हूँ , 
मैं अयोध्या हूँ।