Showing posts with label raam. Show all posts
Showing posts with label raam. Show all posts

Friday, January 5, 2024

श्रीराम

 

 


बड़भागी भये हम सब जन ,

देख पायेंगे वो दृश्य महान ,

रामलला  विराजेंगे सिंहासन ,

हर तरफ हो मंगलगान। 

 

ख़त्म हुआ दूसरा वनवास ,

आयेंगे फिर रघुकुल निधान ,

कण -कण रोमांचित अयोध्या का ,

राम नाम ही सत्य अहान। 

 

राम सर्वथा , राम सर्वदा ,

राम संयम , राम मर्यादा ,

राम सबके , राम मेरे ,

राम नाम जगत में सदा।

 

युग बदला , समय बदला ,

बदला नहीं बस राम का नाम ,

हर्षित हर तन -मन आज ,

बसो हर ह्रदय हे ! करुणानिधान।

 

Monday, September 25, 2017

रावण - कुम्भकरण संवाद

"उठो , जागो लंका के वीर ,
आपदा आयी है ,
दो मनुज संग वानरों की सेना ,
लंका पर चढ़ आयी हैं।"

सुन रावण की आवाज ,
कुम्भ घोर निद्रा से जागा ,
आयी है कोई घनघोर विपदा लंकेश पर ,
मन ही मन विचारा। 

" हे , लंका के वीर शिरोमणि ,
  इस निद्रा को त्याग अब चिरनिद्रा की बारी है ,
  एक एक कर मारे गए सब कुल के वीर ,
  अब तुम्हारी बारी हैं। "

कुम्भकरण मुस्कराया ,
खूब अपने लिए खाना मँगवाया ,
छक कर खा पीकर बोला ,
" तुम शिवभक्त , परमज्ञानी भ्राता ,
  बताओ ,  कहाँ युद्ध के लिए जाना हैं। "

रावण ने सारी कथा बताई ,
सुनकर कुम्भकरण  बोला ,
" घोर अपराध किया तुमने भाई ,
किसी स्त्री का अपरहण,
बिलकुल भी क्षमायोग्य नहीं हैं ,
इसे बड़ा अपराध दुनिया में कोई नहीं हैं ,
इसलिए शायद अब ,
रावण कुल के विनाश की नौबत आयी हैं।
हे रावण , स्त्री इस जगत का आधार है ,
उसका एक एक आँसू प्रलय समान हैं। "

रावण बोला ,
" जानता हूँ भाई , अपराध मैंने किया हैं ,
  जगत माता सीता का  हरण किया है , 
  राक्षसों के पाप बढ़ गए थे ,
  सत्ता और शक्ति के मद में चूर हो गए थे ,
  अब राक्षस कुल का विनाश जरुरी हैं ,
  राम राज्य स्थापना के लिए हमारा जाना भी जरुरी हैं।
  स्त्री का जब जब भी अपमान होगा ,

  रावण का संहार जरुरी होगा। "