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Monday, March 27, 2023

मौसम

 

मौसम भी आजकल गजब फिरकी ले रहा है ,

इंसानी फितरत को बराबर टक्कर दे रहा है ,

बस अभी एक कमी रह गयी है  फिर भी ,

मौसम फिर भी बदलने की पूर्वसूचना दे रहा है। 

 

गिरगिटों ने अब रंग बदलना छोड़ दिया है ,

इंसानों ने उनसे ज्यादा रँग बदलना सीख लिया है ,

आरोप है उनका - वो सुरक्षा के लिये रंग बदलते है ,

इंसान तो फायदे के लिये रंग बदल रहा है। 

 

साँपो ने भी दुहाई देनी शुरू कर दी है ,

उनके डसने का असर कम हो रहा है ,

इंसानी जुबान में कही ज्यादा विष है अब ,

बिना घाव किये ही तार -तार कर रहा है। 

 

मिट्टी  के लिये बबूल उगाना आसान है अब ,

उर्वरा शक्ति का तो सब नाश हो रहा है ,

जिस पानी को बचाना चाहिये बूँद -बूँद ,

वही पानी जहर बन पाताल रिस रहा है। 

 

शुद्ध हवा की चाह मन में , भटक रहा है ,

न जाने किसको -किसको कोस रहा है ,

जिम्मेदारी किसके मत्थे डाले हालातों की ,

खुद को पाक साफ़ घोषित कर रहा हैं। 

Friday, July 12, 2019

जल



सलिल कहो या पय ,
मेघपुष्प या पानी, 
वारि कहो या नीर , 
तोय या उदक , 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।  

स्वादहीन , 
गंधरहित , 
आकारविहीन , 
पारदर्शी महीन, 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।  

बूँदे बनूँ तो बारिश , 
धार बनूँ तो नदियाँ , 
शांत पड़ा रहूँ  तो सागर , 
उमड़ घुमड़ में बादल, 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।  

प्यासे के लिए अमृत , 
धरा के लिए सखा , 
सागर से लिपटा , 
शिखरों में फैला स्वेत धवल , 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।  

सर्वत्र , 
सर्वव्यापी , 
स्वछंद , 
अनमोल मगर सीमित हूँ , 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।  

संभाल सको ,
तो जीवन हूँ , 
न संभला , 
तो प्रलय हूँ , 
मैं जल हूँ , जीवन हूँ।