Tuesday, January 22, 2013

दुनिया बदल गयी हैं...


लोग कहते हैं दुनिया बदल गयी हैंमगर मैं जब सोचता हूँ
लगता हैं दुनिया तो जस की तस हैं
हमने अपने जीने के अंदाज को बदल लिया हैं
सूरज आज भी पूरब से ही निकलता है
पानी का स्वाद और रंग आज भी वैसा ही हैं
हवा आज भी दिखाई नहीं देती , 
पेड़ आज भी छाया और फल देते हैं
पत्थर आज भी चुपचाप पड़े रहते हैं
इंसान आज भी अमर नहीं हैं
फिर बदला क्या.........?
हमने अपनी ज़िन्दगी को सरल बना लिया हैं 
पैदल की जगह गाड़ियाप्लेन या रेल बना लिए हैं 
सन्देश भेजने के लिए कबूतरों से इन्टरनेट पर  गए हैं .
सोने के लिए डनलप के गद्दे बिछा तो लिए, आँखों से नींद गायब हो गयी हैं.
कल तक दादी अम्मा की कहानी सुनते थे, अब टीवी , फिल्मो से काम चला लेते हैं ,
बीमारी जो कल तक इक्का दुक्का थी, अब हजार कर दी हैं .
खाना बनाने के लिए चूल्हे से ओवेन बना लिए हैं 
दीये को अब हमने अलविदा कह बल्ब में  गए
ऐसा नहीं हैं की सबकी ज़िन्दगी बदल गयी
आज भी कुछ लोग पुरातन जीवन जी कर भी खुश हैं
हम सब कुछ हासिल करने के बावजूद भी दुखी
बदली दुनिया नहीं हैंबदले हैं हम....
जहाँ जीते थे १०० साल अब उम्र अपनी ६० कर ली हैं 
तो जीवन तो हर जगह तेज कर लियामगर अपने दिन भी तो उसी हिसाब से कम कर लिए हैं
अब इसी को दुनिया बदलना कहते हैं , तो शायद दुनिया बदल बहुत  गयी हैं ...

Wednesday, January 9, 2013

चंडी ............


दुम्रलोचन , चंद- मुंड और रक्तबीजो की फिर फ़ौज खड़ी हो गयी , 
मच रहा चारो ओर हाहाकार , 
तुझे छोड़ अपना रूप एक बार फिर से , 
लेना होगा चंडी का अवतार। 
मिल के एक बार फिर देना होगा सरस्वती और लक्ष्मी को , 
तुझको शक्तियां अपार , 
तुझे ही अब रण में उतरना होगा , 
करना होगा दुराचारियो का संहार , 
फिर से बताना पड़ेगा एक बार फिर , 
अबला  रणचंडी भी हैं , 
काल भी उसके आगे लाचार , 
तुझे तलवार और खडग से खुद अपनी रक्षा करनी होगी , 
धृतरास्ट बन गए सब , कृष्णा ने ले लिया संन्यास . 
मान मर्दन करने के लिए , तू हो जा  सिंह पर सवार . 

Wednesday, December 26, 2012

अलविदा 2012 ....


फिर एक नए साल की स्वागत को पलके बिछाए खड़े हम
2012 को अलविदा कहने को कितने उतावले हम
कितनी खट्टी मीठी यादे पीछे छोड़
लो आने वाला हैं एक नया साल आपके सामने
सपनो को फिर पंख लगे गए
नए साल के लिए अरमान फिर हरे हो गए
जनवरी से शुरू होता हर साल , दिसंबर में आकर रुक जाता हैं
फिर कैलेंडर हमारा नया जाता हैं
हर गुजरता साल हमारे जीवन का एक कम हो जाता हैं
हम अपनी उम्र में एक साल और जोड़कर
फिर आगे बढ जाते हैं
हर साल हमारा यूँ ही गुजर जाता हैं
चलो ! 2012 का अध्याय ख़त्म कर आगे बड़ते हैं
2013 का तहेदिल से स्वागत करते हैं
लगायेंगे हिसाब किताब कभी इन बीते सालो का
जब कभी फुर्सत के कुछ पल हमारे पास होंगे
अभी तो भागमभाग की इस ज़िन्दगी में
बस कैलेंडर को बदल लेते हैं
आओ ! फिर से एक नए साल में प्रवेश करते हैं

नए साल की सभी को हार्दिक शुभकामनाये

Thursday, December 13, 2012

खुद की , खुद से ........

क्या हैं हम में वो जुनून और वो जज्बा की , 
हम खुद से मुकाबला करे , 
रोज़ अपने लिए कुछ पैमाने तय करे और, 
और उन पर खरा  उतरे , 
अपने लिए खुद नियम बनाये और 
उन पर अमल करे , 
क्यूंकि हमें दुसरो की नक़ल नहीं करनी , 
हमारा तो खुद से मुकाबला हैं , 
अपने को बेहतर से और बेहतर करने की जंग , 
हमारे ही भीतर तो हैं। 
हमें हमारी सोच बदलनी होगी , 
अपने पंखो को परवाज देनी होगी , 
खुला आसमान हैं ये जहाँ , 
क्षितिज की तलाश हमें खुद करनी होगी , 
न रुकना होगा , न झुकना होगा 
अपने लक्ष्यों तक अपने जूनून से पहुचना होगा , 
लगेगी थोडा देर भले ही , हार ने मानने का जज्बा रखना होगा, 
हिम्मत  रखनी पड़ेगी दुनिया बदलने की , 
हर हालात में मुस्कराये ये कलेजा रखना होगा। 
दुनिया हमें पागल कहे तो भी अपना रास्ता खुद चुनना होगा, 
सफलता और असफलता को बिना ध्यान में रखे , 
हमें  अविरल बहना होगा .  
भेडचाल में चल के बहुत देख लिया अब, 
अपने लिए खुद का  मुकम्मल जहाँ बनाना होगा , 
अपने ज़िन्दगी कारवां को हमें , 
और बेहतर बनाना होगा .

Monday, December 10, 2012

बस यूँ ही ख्याल आया .....

बुरी बात हर एक के लिए अलग अलग हो सकती हैं , 
मगर अच्छी बात  सबके लिए ये हैं की हम जिंदा हैं , 
और कही न कही उपर वाले की दी हुई इस ज़िन्दगी को जी रहे हैं।  
जो बात मेरे लिए अच्छी हैं वो हो सकता हैं आपके लिए बुरी हो, 
और जो आपके लिए अच्छी हो वो किसी और के लिए बुरी, 
ये सब ज़िन्दगी जब तक हैं तब तक चलता रहेगा , 
मगर हम सांस ले रहे हैं इससे अच्छा और क्या हो सकता हैं? 
गिले शिकवे , ख़ुशी गम , सफलता - असफलता , अमीरी गरीबी , 
ये सब जीवन का हिस्सा हैं , 
कुछ भी  स्थायी नहीं हैं , आज जो हैं कल नहीं रहेगा , 
फिर क्यूँ मन को अपने व्यथित किया जाये , 
पल जो हैं हाथ में हमारे  उसको क्यों न जीया जाये , 
अगर ख़ुशी हैं तो इसे भरपूर जिया जाये ,
और अगर कही थोडा दुःख हैं तो इसको भी जीया जाये , 
कल क्या होगा कुछ भी यकीन नहीं हैं , 
कम से कम अपनी जिंदगानी की पोटली को भरा जाये।