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Thursday, January 14, 2021

नयी कविता

 

इंस्टाग्राम में चमकती तुम ,

फेसबुक पर इठलाती हो ,

व्हाट्सप्प पर आकर ,

गुमसुम क्यों हो जाती हो। 

 

सुना तो है 4 जी बड़ा अच्छा चलता है,

तुम्हारे शहर में ,

सब नेटवर्क के टावर भी खड़े है ,

मगर कॉल का जवाब देने में क्यों कतराती हो। 

 

अब तो कितना आसान हो गया सब ,

चिट्टी पत्री , छुप कर निहारना - सब पुरानी बातें है ,

अब तो कनेक्टेड रहते है हरदम ,

ज्यादातर ऑफलाइन क्यों रहती हो। 

 

इजहार करना कितना आसान हो गया अब ,

बिना शब्दों के भी काम चल जाता है ,

बने बनाये भाव व्यक्त हो जाते है ,

तुम इमोजी क्यों इस्तेमाल नहीं करती हो।