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Sunday, April 7, 2019

मताधिकार - जनाधिकार





लोकतंत्र का आधार ,
मताधिकार - जनाधिकार ,
सोच विचारकर बटन दबाना ,
होगा इससे ही भविष्य साकार। 

सियासत की ये कुँजी ,
एक एक मत जरुरी ,
जनता की , जनता द्वारा , जनता से सरकार बने ,
लोकतंत्र की पूँजी । 

सुनना सबकी ,
करना मन की ,
देश प्रगति पथ पर आगे बढ़े ,
यह ध्यान रखना है जरुरी । 

उठो , जागो और विचारो ,
लोकतंत्र का ये महापर्व है ,
अगले पाँच वर्षो का भविष्य
आपके वोट से ही तय होना है। 


Monday, January 8, 2018

जनता जनार्दन, हाजिर हो !



लोकतंत्र  तुम्हारा बिना अधूरा , 
हर पांच साल में प्रमाण दो , 
लोकतंत्र के मतदान पर्व में , 
जनता जनार्दन हाजिर हो।  

चुनकर अपने प्रतिनिधि , 
अपनी रोटी पानी का जुगाड़ करो , 
देश को कुतर जायेंगे , 
जनता -तुम छोटी मोटी बातो में लगे रहो।  

कभी किसी बात पर बर्गलाएँगे , 
कभी समाज में डर फैलायेंगे , 
छोटी सी बात का बतंगड़ , 
मुद्दे की बात गटक जायेंगे। 

पाँच साल बाद हिसाब किताब नहीं देंगे ,
अगले पांच साल का घोषणा पत्र छपवायेंगे , 
जीत कर फिर घोषणा पत्र जलवायेंगे , 
जनता के , जनता से , जनता द्वारा ये प्रतिनिधि , 
 कुर्सी से पांच साल चिपक जायेंगे।  

फिर आयेगा चुनाव , बिगुल बजेगा 
लोकतंत्र का पर्व फिर सजेगा , 
मुनादी होगी बार बार , 
छोड़ छाड़ कर सब अपने काम , 
" जनता जनार्दन " हाजिर हो।  

आधी जनता वोट डालेगी , 
आधी उस दिन छुट्टी मनायेगी , 
वोट न डालने वाले फिर जंतर मंतर जायेंगे , 
सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूकेंगे,
"जनता जनार्दन " हाजिर हो।  

(फोटो साभार - गूगल) 

Friday, February 17, 2017

मतदान बाद , गणना से पहले



नींद उडी हैं नेताओ की , 
ई वी एम  में बंद हो गयी किस्मत।  

कुछ अब सोच रहे जीत गए तो कैसे कमायेंगे ? 
हार गए तो पाँच साल कैसे बितायेंगे ? 

बड़ी कशमकश चल रही हैं , 
ज़िन्दगी नीरस सी लग रही हैं।  

वादों -इरादों के पोस्टरों को जला  दिया हैं , 
अब किसी के हाथ न पड़े , छुपा दिया हैं।  

हर मतदाता को शक की निगाह से देख रहे हैं , 
लिया तो इन्होंने  मुझसे से हैं , वोट पता नहीं - किसे दिया हैं ? 

नेताजी के कट नहीं रहे दिन रात , 
चेले अब भी दिलासा दे रहे हैं - जीतोगे बस आप।  

नेता जी ने अब विपक्षी उम्मीदवारों से भी दोस्ती कर ली हैं , 
अपने भाषणों में उसकी खिल्ली पर माफी माँग ली हैं।  

समझौता हो गया है - तुम जीते तो हमारा भी काम करना , 
हम जीते तो तुम हमें अपना भाई ही समझना।  

दोनों अब साथ साथ कहकहे लगाते हैं , 
चेले दोनों के साथ में अब पार्टी उड़ाते हैं।  

इन्तजार में दिन कट रहे हैं , 
ख्याली पुलाव रोज़ बन रहे हैं।

एक दिन का राजा - मतदाता ,
अपने काम धंधे , रोज़ी रोटी के जुगाड़ में लग जाता हैं।