Thursday, January 21, 2016

बात कहूँगा सीधी और सरल सी


बात कहूँगा सीधी और सरल सी ,  इधर की  उधर की !
 ऊपर की ,  नीचे की ,
 दायें की ,  बायें की ,
 उत्तर की ,  दक्षिण की ,
 पूरब की ,  पश्चिम की ,
 धर्म की   कर्म की ,
 अमीरी की ,  गरीबी की ,
 जात की ,  पात की ,
 ज्ञान की ,  अज्ञान की ,
 उत्थान की ,  पतन की ,
 हार की ,  जीत की ,
 युद्ध की ,  शांति की ,
 मंदिर की ,  मस्जिद की ,
 सिख की ,  ईसाई की ,
 रोज़गार की ,  बेरोजगारी की ,
 हँसी की ,  रोने की ,
 आशा की ,  निराशा की ,
 सहिन्षुणता की ,  असहिन्षुणता की ,
 राजनीति की ,  राजनीतिज्ञों की ,
 शिक्षा की ,  अशिक्षा की ,
 तर्क की ,  वितर्क की ,
 दिन की ,  रात की ,
 सुबह की ,  शाम की ,
 प्रकाश की ,  अन्धकार की ,
 महंगाई की ,  भ्रस्टाचार की ,
 बच्चो के भविष्य की ,  महिलाओ की सुरक्षा की ,
 लाचार बुजुर्गो की ,  दिशाहीन नौजवानो की ,
 संस्कार की ,  कुसंस्कार की ,
 स्टार की ,  सुपरस्टार की ,
 खेल की ,  खिलाडी की ,
 समाज की ,  विज्ञानं की ,
 बंगाल की ,  आसाम  की ,
गुजरात की , पंजाब की
 ऊँच की ,  नीच की ,
 अगड़ो की ,  पिछडो की ,

बस इतना सा कहूँगा की , कब फिक्र होगी हमें अपने भारत माँ  की ?!!

Monday, January 18, 2016

फेसबुकिया दुनिया और व्हाट्सप्प का ज्ञान


रिश्ते की नयी परिभाषा हर रोज़ गड़ी जाती हैं !
जो सबसे पहले लाइक करे वो बेस्ट फ्रेंड हो जाती हैं !!

कही घूमने जाओ तो जगह भले ही देख न पाये !
एन्जोयिंग एट स्टेटस पहले अपडेट जाता हैं !!

दो चार सेल्फ़ी पोस्ट न हो जाये , मजा नहीं आता हैं !
कमेंट्स की फिर बाढ़ आ जाती हैं , दोस्त यार अपने को कोसने लग जाता हैं !!

स्टेटस हर घडी बदलने का रिवाज हैं , आउटडेटिड होने का बड़ा खतरा हैं !
दिन में ३६ बार एक फेसबुक न खोल पाये तो जीना बोरिंग लगता हैं !!

व्हाट्सप्प की दुनिया का अपना अलग मजा हैं !
फ्री का ज्ञान बँटता हैं , फॉरवर्ड होता चला जाता हैं !!

सत्संग भी चलता हैं , चुटकुले की भी बहार हैं !
कोई वीडियो रुलाता हैं - तो कोई हँसा जाता हैं , दो मिनट में हँसी -गम सबका एहसास हो जाता हैं !!

दो फर्लांग पर रहने वाला दोस्त कहता हैं , यार तू कहाँ गायब रहता हैं ?
एक घर पर रहने वाले लोग , " खाना तैयार हैं , खा ले " का मैसेज करता हैं !!

जुड़ गयी हैं दुनिया इस कदर "आनन्द " , सबको जुड़ाव का ख्याली पुलाव हैं !
भूल गए हैं अपने पड़ोसियों को , इंटरनेट  पर दोस्तों का जमाव हैं !!

खोये खोये से रहते हैं , मैसेज की बीप की आवाज से अब पहचान हैं !
चिपका हुआ हैं जो अब मोबाइल से , वही व्यक्ति महान हैं !!

Monday, January 11, 2016

२०१६ की पहली कविता -आम आदमी का दर्द



एक जगह मजमा लगा था ,
एक आम आदमी ऑफिस से घर लौट रहा था ,
एक कंधे में बैग का बोझ , दूसरे में टिफ़िन लटक रहा था ,
कौतूहलवश वो भी पहुँच गया ,
तभी एक पत्रकार ने माइक उसके मुंह में ठूस सा दिया ,
" आपको क्या कहना हैं देश के हालातो के बारे में ?
एक तरफ पाकिस्तान से आतंकवादी रहे हैं ,
देश में   असहिष्णुता फ़ैल रही हैं ,
राजनेता एक दूसरे पर बयानबाजी कर रहे हैं ,
महिलाओ की सुरक्षा खतरे में हैं ,
प्रदुषण ने सांस लेना दूभर कर दिया हैं ,
ऐसे में बताये - आम आदमी क्या सोचता हैं ?
पूरा देश एक आम आदमी को सुनना चाहता हैं। "

वो हकबका सा गया , एक हाथ से टिफीन जैसे छूट सा गया ,
" मैडम, इधर गुप्ता जी की किराने की दूकान थी , जहाँ दाले दो रुपये सस्ती मिलती थी !
वहीं लेने इधर उतरा हूँ , ये भीड़ हटाओगी तो ही ले पाउँगा ,
वर्ना आज भी घर पर डांट खाऊँगा।
रही बात असहिष्णुता की , मैंने और मेरे दोस्त रहमान ने ऑफिस में एक साथ रोटी खायी हैं।
आतंकवादी सिर उठा रहे हैं क्यूंकि हर तरफ राजनेता अपनी अपनी रोटी सेंक रहे हैं। 
रही बात प्रदूषण की , ये आप जैसे लोग ही फैला रहे हैं।“

वह चुपचाप गुप्ता जी की दूकान ढूंढता वहाँ से निकल गया ,
बहस के लिए बुद्धिजीवियों का एक वर्ग इकठ्ठा हो गया !

आरोप प्रत्यारोपों का दौर फिर लम्बा चला होगा ,
आम आदमी खा पीकर कल की फिक्र में सो गया होगा. 

( Picture taken from Internet - RK Laxman cartoon -Common man)

Wednesday, December 30, 2015

2016 - स्वागत हैं !



 अभिनंदन करते नव वर्ष का ,  मंगलमय हो सबका जीवन !
फलीभूत हो सब आशाएँ , तनावरहित हो  जीवन !!

366 दिन  लेकर आया हैं   ये नूतन वर्ष , कर्मो की कूची से भरो  इसमें रंग !
निराशा के बादल छटे , नवउल्लास से भरे सबका मन !!

स्वस्थ रहे , जीवन जीये - मनभेद न हो किसी के संग !
सपने पूरे करे अपने , लक्ष्य से न डिगे कदम !!

खुश रहे और खुशियाँ बाँटे ,  उन्नति करे २०१६ के संग !
सब मोर्चे फतह करे , भरे कामयाबी के रंग !!

सुःख , शांति और समृद्धि  का सानिध्य रहे !
घर , परिवार , नौकरी और व्यापार खूब फले फूले !!

उम्मीदों को नए पंख लगे !
हर उपवन में फूल खिले !!

करे "आनन्द " यही दुआ रब से !
सबको जीवन का  सही अर्थ मिले !!


शुभ स्वागतम 2016……HAPPY NEW YEAR-2016

Monday, December 28, 2015

मैं २०१५ हूँ, जाने से पहले कुछ कहना चाहता हूँ ...................





समय की मशाल अपने बड़े भाई २०१४ से लेकर मैं भी १ जनवरी को चला था !
सीने में ३६५ दिनों का समय आप सबके साथ बाँटने निकल पड़ा था !!

२६ जनवरी को राजपथ पर मोदी के साथ बराक ओबामा को बैठा पाया !
राजपथ पर नए भारत के उदय को अपनी आँखों से सराहा !!

फरवरी में भारत की राजनीती में एक बड़ा बदलाव आया !
केजरीवाल नाम का शख्श दिल्ली में भूचाल लाया !!

मार्च में युगपुरुष अटल बिहारी बाजपेई को भारत रत्न मिलने से मुझमे भी जोश आया !
अप्रैल में नेपाल  भूकंप के कहर से खुद को नहीं बचा पाया !!

मई और जून में सूर्य देवता का प्रकोप भारी था !
हर जगह मेघो के बरसने का इन्तजार था !!

जुलाई में कही घनघोर बारिश और कहीं सूखा था !
" डिजिटल इंडिया" का स्लोगन मेरे सामने ही अस्तिव्य में आया था !!

अगस्त में कंप्यूटर जगत के लिए खुशखबरी थी !
विंडोज 10 हर कंप्यूटर पर छाने को तैयार था !!

सितम्बर में मंगल पर पानी होने की पुष्टि हुई !
एक नए गृह पर जीवन बसाने की उम्मीद जगी !!

अक्टूबर आते आते सीरिया संकट गहरा गया !
मानवता के दुश्मनो को देखकर मैं भी कांप गया !!

नवम्बर में पेरिस नरसंहार हुआ !
इंसान को इंसान का दुश्मन बनते देख मैं बहुत शर्मिंदा हुआ !!

दिसम्बर आते आते मैं भी थक गया !
अब मेरा समय भी पूरा हुआ !!

अब समय की मशाल अपने छोटे भाई २०१६ को देने की बारी हैं !
जैसा बीता आपके साथ , अच्छा रहा - थोड़ा ख़ुशी और थोड़ा गम साझा कर गया !!

याद रखना मेरी अच्छी यादो को , बुरी यादों को मिटा देना !
सुख चैन और अमन से जीना २०१६ के साथ , कभी याद आऊं तो बस मेरे ऊपर पड़ी धूल हटा देना !!


Thursday, December 17, 2015

ख्वाइशों की पतंग बनी , मन की बनी डोर ..............

ख्वाइशों की पतंग बनी , मन की बनी   डोर !
उड चला मन बावरा , करने आसमान से होड़ !!

कभी बादलो से आंखमिचौली की , कभी किरणों से नहाया !
कभी  शाखों से खुद को बचाया , कभी खुले मैदानों को निहारा !!

कहीं पर लहलहाते खेत देखे , कहीं पर बंजर मैदान !
आसमां छूती इमारते देखी , कहीं झुग्गियों का ढेर !!

किसी बूढ़े को पार्क में सिसकते देखा , कही अलमस्त बच्चो का शोर !
कही एकदम वीरानी देखी , कही गाड़ियों की रेल !!

ख्वाइशों की पतंग बनी , मन की बनी   डोर !
उड चला मन बावरा , करने आसमान से होड़ !!


कहीं हिन्दू मुस्लिम को कहकहे लगाते सुना  , कहीं भाई भाई को लड़ते हुए देखा !
कहीं दूर एक औरत को पल्लू डाले कोसो दूर से पानी लाते देखा , कहीं नदियों के पानी को उफनते पाया !!

कहीं भूख से बिलखते बच्चो को देखा , कहीं पार्टियो के बचे हुए खाना का ढेर पाया !
किसान को हताश देखा , बिचौलियों को मौज उड़ाते देखा !!

कहीं नेताओ की   गलबहियां देखीकहीं आग उगलते सुना !
किसी रिश्वतखोर सरकारी अफसर को गरीब से पैसे लूटते भी देखा !!

ख्वाइशों की पतंग बनी , मन की बनी   डोर !
उड चला मन बावरा , करने आसमान से होड़ !!


गजब दुनिया के अजब निराले दृष्य देखे , एक सेठ को पांच रुपये के लिए नौकर को पीटते देखा !
वहीँ एक गरीब को मंदिर के दान पत्र में सौ का नोट डालते मुस्कराते पाया !!

अपने गांव की गलियाँ भी घूम आयाबचपन में एक पेड़ के तने में लिखा नाम ज्यो का त्यों पाया !
स्कूल को अपने पहचान नहीं पाया , टिन के शेड से उसको तिमंजिला बिल्डिंग पाया !!

उस मैदान का भी एक चक्कर लगा आया , जहाँ भूख प्यास भूल कर दिनभर क्रिकेट खेलता था !
मगर अखरोट के उस पेड़ को सूखा पाया , जिसमे पत्थर मारकर अखरोटो को खाता था !!

ख्वाइशों की पतंग बनी , मन की बनी   डोर !

उड चला मन बावरा , करने आसमान से होड़ !! 

Tuesday, November 17, 2015

ये हिन्द हैं मेरा ……..



मिटा सका कोई , मिट गए मिटाने वाले !
बाँट सका कोई , बँट गए खुद बाँटने वाले !!

हर बार चोट से उभरा था , हैं और रहेगा !
ये हिन्द हैं मेरा , यूँ ही मुस्कराता रहेगा !!

दंश झेले कितने सीने में , वीरो ने गौरव गाथा लिखी हैं !
हम हारे नहीं दुश्मनो से , बस कुछ जयचंदो ने नाक कटाई हैं !!

हम एक थे , हैं और रहेंगे !
ये हिन्द हैं मेरा, सब मिलकर आगे बढ़ेंगे !!

कितनी कोशिशे तुम कर लो जगवालो !
नींव की गहराई  क्या तुम हमारी समझ पाओगे !!

साजिश कर लो कितने ही हमें बरगलाने की !
कुव्वत अभी भी है सिकंदर को घुटने में लाने की !!

ये तो हमारे घर में ही थोड़ा वैचारिक मतभेद हैं , वर्ना मजाल क्या तुम्हारी ? 
ये हिन्द है मेरा , ध्यान रहे  - शेर के मुहँ से भी निवाला निकालने की आदत हैं पुरानी हमारी !!



Monday, November 9, 2015

चलो , इस दिवाली कुछ अलग करते हैं




चलो , इस दिवाली कुछ अलग करते हैं !
कुछ मुरझाये चेहरों पर मुस्कान लाते हैं !!

अपने सपने जो बेवजह अँधेरे की गर्त में लिपट गए थे !
उनको फिर से जिन्दा करते  हैं !!

देश के अंधकारमय माहौल में कुछ उजाला करते हैं !
देश के लिए बिना शोर किये कुछ करते हैं !!

अपनी खुशियों में कुछ रोते हुए लोगो को शामिल करते हैं !
चलो , इस दिवाली कुछ अलग करते हैं  !!

माँ लक्ष्मी और गणेश जी की अराधना करते हैं !
सबको बुद्धि , विवेक और सामर्थ्यवान बनाने की प्राथर्ना करते हैं !!

फिर से सब में   विश्वास जगाते हैं !
अँधेरा हर बार हारता हैं , यकीन दिलाते हैं !!

धरती , हवा , पानी और  आसमां को बचाने के लिए प्रयास करते हैं !
चलो , इस दिवाली कुछ अलग करते हैं  !!

दीपावली शुभ हो !


Monday, November 2, 2015

इस शहर को ये क्या हो गया है ?


इस शहर को ये क्या हो गया है ? !
यूँ तो लाखो की तादाद हैं , मगर इंसान क्यों खो गया हैं ? !!
कंक्रीट के घर , कंक्रीट की सड़के , कंक्रीट के ही रास्ते !
मिट्टी की सुगंध का नामोनिशां मिट गया हैं !!
दिखावटी और मिलावटी सब कुछ लगता हैं यहाँ !
एक सच्ची मुस्कान को तरस गया हैं !!

इस शहर को ये क्या हो गया है ? !
हर कोई भाग रहा  हैं , पता नहीं कौन सी दौड़ में हिस्सा ले रहा हैं !
फुर्सत के पलो को तो जैसे ये शहर तरस गया हैं !!
किसी को किसी के लिए वक्त नहीं हैं यहाँ !
मासूम बचपन भी चारदीवारी में दम तोड़ रहा हैं !!
तौली जा रही हैं खुशियाँ यहाँ पैसे में !
जीवन का मतलब ही इंसान भूल गया हैं !!


इस शहर को ये क्या हो  गया है ? !
इंसान का इंसान से भरोसा उठता जा रहा !
हरेक इंसान दूसरे को शक की निगाह से देख रहा हैं !!
बिक रही हैं बाजारों में हर चीज़ !
इंसानियत का  कोई मोल नहीं रहा !!
हवाओ में घुल गया हैं एक अजीब सा जहर  !
घुट घुट कर इंसान जी रहा   !!
रिश्ते अब बस नाम के रह गए !
माता पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ने का चलन बढ़ गया यहाँ !!