Sunday, September 27, 2026

यूँ ही तो नहीं हुआ होगा

 

किसी की नीयत तो डोली होगी,

ताले ऐसे ही नहीं आये होंगे।

 

कोई तो पलटा होगा अपनी जुबान से,

हस्ताक्षर का रिवाज ऐसे ही नहीं बना होगा।

 

किसी के तो भाई के मन में उपजा होगा संदेह,

घर के बँटवारे यूँ ही नहीं हुए होंगे।

 

किसी ने तो की होगी पहली बेवफाई,

इश्क़ के किस्से यूँ ही मशहूर नहीं हुए होंगे।

 

किसी ने किया होगा वह पहला विद्रोह,

राजशाही यूँ ही तो नहीं गयी होगी।

 

किसी ने तो पहली बार उठाई होगी आवाज़,

खामोशियों में यूँ ही दरार नहीं पड़ी होगी।

 

किसी ने तो तोड़ा होगा भरोसा पहली बार,

रिश्तों में यूँ ही दीवार नहीं खड़ी हुई होगी।

 

किसी ने तो किसी अपने को ठुकराया होगा,

अपनों से दूर जाने की वजह यूँ ही नहीं बनी होगी।

 

किसी ने तो देखे होंगे अपनों के बदलते चेहरे,

आँखों में नमी यूँ ही नहीं उतरी होगी।

 

किसी ने तो चाहा होगा बदलना ज़माने को,

हर नई सोच यूँ ही तो नहीं जगी होगी।

 

किसी ने तो सहा होगा दर्द हद से ज़्यादा,

क्रांति की चिंगारी यूँ ही नहीं भड़की होगी।

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