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Tuesday, October 28, 2025

आँसू

 

जब हम सबसे ज्यादा उदास होते है ,

हमें हमारे सबसे अच्छे दिन याद आते है ,

आँखों की कोरे गीली हो जाती है ,

और यादें आँसू रूप में ढल कर ,

हमारे गालों से लुढ़ककर ,

जमीन को स्पर्श करते है ,

हम गलती करते है ,

अपने हाथों से उनको पोछने लगते है ,

बहने दीजिये उन आँसुओं को ,

मिलने दीजिये जमीन से ,

ये जमीन उन आँसुओं को ,

बीज रूप में ग्रहण करती है ,

और आपके अवसादों को ,

उदासियों को सोखकर ,

आपके लिये आशाओं का ,

उम्मीदों की एक नई पौध जनती  है ,

और आपके एक एक आँसुओ को ,

फूल बनाकर आपके जीवन में बिखेरती है। 

Sunday, October 12, 2025

रोते पुरुष

पुरुष दंभ भरते है ,

वो रोते नहीं है ,

उनकी आँखों से ,

आँसू टपकते नहीं है ,

सच है -बिल्कुल सच ,

वो अक्सर दिल के ,

अंदर ही अंदर रोते है ,

और शायद ,

इसीलिये पुरुष अक्सर ,

हृदयघात से ज्यादा मरते हैं।

 

पुरुष रो ले अगर ,

शायद ये दुनिया बहुत बेहतर हो जायेगी ,

आँसुओ से उनके शिलायें पिघल जायेगी ,

मसले बहुत आँसुओ में बह जाते ,

दिल के अवरोध सब निकल जाते ,

मगर बहुत मुश्किल से झरते है ,

आँखों से आँसू पुरुषों के ,

गर होता इतना आसान ये ,

धरती शायद स्वर्ग से कम न होती,

और पुरुष वाकई कोमल हो जाते,

और रोने से  पुरुषत्व और पुरुषार्थ ,

दोनों में कोई कमी नहीं आती।    


Friday, June 22, 2018

परवाज

पंखो को परवाज दिए जमाने हो गए , 
जमाने के आगे बेबस से हो गए , 
क्यों नादानियाँ करने से घबराता है अब दिल , 
क्या अब हम बहुत " सयाने " हो गए।  

दर्द अब भी उठता है सीने में , 
आँसू बहाये जमाने हो गए , 
जबरदस्ती की मुस्कराहट को ख़ुशी मत समझ , 
बेबाक हँसी को होंठ तरस गए ।  

खुद को इतना रमा दिया जगत में , 
अपना वजूद भूल गए , 
ताकते रहते है अब दुसरो का मुँह अब , 
उनके हिसाब से मनोदशा तय होने लगे।  

तेरे जीवन का संघर्ष , 
कौन तुझसे बेहतर जानता है यहाँ , 
अपने दिल से पूछ , 
यहाँ तक पहुँचने में लोगो को जमाने लग गए।

तेरे सपने तेरे अपने है , 
तेरे जूनून को दुनिया क्यों समझे ,
कदम बढ़ाने ही होंगे , 
बिना मेहनत के कहाँ , किसके सपने सच हुए।