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Saturday, December 20, 2025

कहो

 


कहो ,

जो दिल में है , कहो,

कोई सुनने वाला न भी हो ,

तब भी कहो ,

अनकही बातें ,

दिल से होते हुए ,

दिमाग में घुस जाती है ,

और कारण बन जाती है ,

अवसादों के ,

और अवसाद में पड़कर ,

धीरे -धीरे शरीर भी ,

कमजोर होने लगता है ,

कहो ,

कोई न मिले ,

तो दीवारों से कहो ,

किसी पहाड़ी में जाकर ,

जोर से कहो ,

कोई नहीं भी सुनेगा तो ,

प्रकृति सुन लेगी ,

और मन , दिमाग , शरीर ,

सब हल्का होकर ,

आराम देगा ,

खाली हुई जगह में ,

नई ऊर्जा और ,

नया सामर्थ्य भरेगा,

मन से ,

दिमाग से ,

गुबार निकाल देने वाले ,

अक्सर ज्यादा जीते है ,

और स्वस्थ रहते है।    

Tuesday, October 28, 2025

आँसू

 

जब हम सबसे ज्यादा उदास होते है ,

हमें हमारे सबसे अच्छे दिन याद आते है ,

आँखों की कोरे गीली हो जाती है ,

और यादें आँसू रूप में ढल कर ,

हमारे गालों से लुढ़ककर ,

जमीन को स्पर्श करते है ,

हम गलती करते है ,

अपने हाथों से उनको पोछने लगते है ,

बहने दीजिये उन आँसुओं को ,

मिलने दीजिये जमीन से ,

ये जमीन उन आँसुओं को ,

बीज रूप में ग्रहण करती है ,

और आपके अवसादों को ,

उदासियों को सोखकर ,

आपके लिये आशाओं का ,

उम्मीदों की एक नई पौध जनती  है ,

और आपके एक एक आँसुओ को ,

फूल बनाकर आपके जीवन में बिखेरती है। 

Saturday, June 9, 2018

कशमकश

माथे पर चिंताओं की लकीरें  क्यों है ?
चेहरे पर ये मायूसी सी क्यों है ?
खोया खोया सा हर शख्स यहाँ , 
बेचैनी का तूफ़ान लिए क्यों है?  

आज़ादी की तमन्ना लिए दिल में , 
हर सांस में घुटन में क्यों है ?
खुद अपनी राह बनाने निकला , 
भीड़ में  शामिल क्यों है ?

सीने में तूफानों से जज्बात , 
सहमा सहमा सा क्यों है ?
रिश्तो में पला बढ़ा , 
रिश्तो से अब चिढ़ क्यों है ?

उसूलो की ताकत , 
हकीकत के धरातल पर तड़पती क्यों है ?
घिरा हुआ है भीड़ से , 
फिर भी अकेला क्यों है ?

कुछ पाने की ख़ुशी नहीं , 
सब कुछ पा लेने की ज़िद्द क्यों है ?
अपनी पहचान बनाने चला था , 
दुसरो के अक्स में अपने को तलाशता क्यों है ?

मेहनत ही सफलता की कुंजी , 
परिश्रम से घबराता क्यों है ?
धैर्य और संयम का पाठ , 
हर मोड़ पर भूलता क्यों है ? 

कशमकश ये कैसी , 
रातो की नींद गायब क्यों है ?
खिलखिलाता चेहरा जिसकी पहचान , 
हर हँसी में दर्द  छलकता क्यों है ? 

कुछ तो बदली है आबो हवा , 
कुछ पानी में जहर है , 
घुट घुट कर सिसक रही ज़िन्दगी , 
ज़िन्दगी को शायद कुछ सुकून की जरुरत है।