Showing posts with label Friends. Show all posts
Showing posts with label Friends. Show all posts

Friday, January 20, 2023

दो दोस्त

ओहो , कैसे हो यार तुम , 

बिल्कुल बदल गए हो , 

कितने दुबले -पतले थे , 

अब तो जैसे कुप्पा हो गए हो , 

कितने घुँघराले हुए करते थे तुम्हारे बाल , 

अब तो बस अधपके से आधे हो गए है , 

क्या हुआ तुम्हारे चेहरे के तेज को , 

गालों के गड्डे भर से गए है , 

वो जोशो -जूनून कहाँ गायब हो गया , 

हर बात पर दुनिया बदलने की बात करने वाला ,

क्यों खोया -खोया सा है ? 

औरों से सुनता रहता हूँ , 

तुम्हारी कामयाबियों के कहानियाँ , 

फक्र से कहता हूँ , 

कई बरस पहले ,हम सच्चे दोस्त थे।  


अरे यार , बताओ तो सही , 

क्या -क्या किया इतने सालों में , 

सुना है खूब तरक्की कर लिए हो , 

लेकिन चेहरे पर वो सुकून क्यों नहीं है , 

लाइफ तो सेटल होगी यार तुम्हारी , 

सब कुछ तो अब तुम्हारे पास है , 

हमारा क्या है यार , 

वही हड्डी , वही खाल है , 

जिस लकीर को पकड़े थे , 

बस उसी पर अटके है , 

लोग असफलताों का टैग जरूर देते है , 

मगर हम जानते है , 

हम बड़े सुकून से हैं , 

तुम मंजिल की तलाश में थे , 

पा लिये और दुआ है - आगे बढ़ो , 

तुम्हे पता है हमारी फितरत की , 

सफर का पूरा लुफ्त लेकर , 

तुमने चाहा तो ,

मिलेंगे फिर हम कहीं न कहीं।  

Thursday, June 13, 2019

बचपन की यारी


चल , भागते है 
कटी पतंग लाते है , 
आ जरा , पानी में छपकी , 
दोनों पैरो से लगाते है।  

थक गया , मेरे कंधे में हाथ रख , 
स्कूल जाते है , 
रास्ते में वो आम का पेड़ है न , 
दो चार आम चुराते है।  

फिक्र मत कर होम वर्क की , 
मैं भी फाड़ देता हूँ , 
चल , क्लास में दोनों , 
साथ में डाँट खाते है।  

आज मैं तेरी पसंद की सब्जी लाया हूँ , 
दोनों मिलकर खाएंगे , 
तेरे घर की रोटी में बहुत स्वाद है , 
मिलकर मौज उड़ायेंगे।  

जब मैं बड़ा होऊँगा , 
बहुत बड़ा आदमी बनूँगा , 
तू फिक्र मत कर , 
तुझे भी साथ रखूँगा।  

छुट्टी के बाद , 
साथ घर वापस जायेंगे , 
उसने कल पन्गा किया था न , 
आज उसको मिलकर मजा चखायेंगे।  

देखना , एक दिन हमारा राज होगा ,
हमारी दोस्ती पर नाज होगा , 
छू लेंगे आसमान भी  , 
जब तू मेरे साथ होगा।  

फोटो साभार - गूगल 

Wednesday, July 5, 2017

आओ - कभी

आओ - कभी यूँ ही बतियाते हैं , 
कुछ तुम सुनाओ - कुछ हम सुनाते है।  

बहुत दिन हो गए - रूबरू नहीं हुए हैं, 
समय निकालो , साथ में चाय पीते है ,
यूँ तो फोन से बातचीत हो ही जाती हैं , 
मगर तुम्हारे संग चाय पीने की बात निराली हैं।  

अब समय न होने का बहाना मत बनाना , 
तुम न आ सकते तो हमें ही बुला लेना , 
काम तो रोज़ होंगे और  करने भी पड़ेंगे ,  
आओ , की जरा  फिर से बेबाक हँसेंगे।  

वर्षो बीत गए दिल खोल के हँसे नहीं , 
दिल की बात किसी से कहें नहीं , 
बहुत कुछ खोया - बहुत कुछ पाया ,
हर बार ज़िन्दगी का मतलब अलग समझ आया।  

आओ की जरा दिल का गुबार उड़ाते हैं , 
कुछ तुम सुनाना , कुछ हम सुनाते हैं।