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Friday, September 5, 2025

कल -आज -कल

  

भविष्य का सोच आज परेशान है ,

वर्तमान पिछली बातें सोच हैरान है ,

कहाँ है "अभी" वक्त जो हाथ में है ,

दो कल के बीच में फँसा पड़ा हैं। 

 

सबब ये है ध्यान बीती बातों में ,

चिंता आने वाले वक्त की सदा ,

मजा ले सकते है अभी में ,

वक्त का भी यही है तकाज़ा। 

 

बीता वक्त अब लौट नहीं सकता ,

आने वाले वक्त का बस कयास ही सही ,

तन -मन लगा अभी पर बस "आनन्द " ,

यही सुलझायेगा  कड़ियाँ  सभी। 

Tuesday, August 27, 2024

समय के बीज

 


 

समय के धरातल पर ,

जो बीज बोये जाते है ,

भविष्य में फिर वही ,

पेड़ बनकर समय की ,

छाती में उग आते है ,

बीज क्या बोया गया था ,

इसी बात पर पेड़ निर्भर है ,

फलदार होगा या कँटीला ,

ये बीज पर निर्भर है ,

समय अपने पास किसी का ,

कुछ बकाया नहीं रखता ,

वो देर -सवेर सब वापस कर देता है ,

वापस किसको ,कब करना है ,

ये समय का अपना निर्णय होता है ,

बीज को पनपने और पेड़ बनने में ,

समय भी तो अपना समय देता है,

और इस नाते इतना हक़ तो ,

समय का भी बनता है।