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Saturday, September 1, 2018

लोग क्या कहेंगे ?

अजब मर्ज है - लोग क्या कहेंगे ?
जिन्हे हम जानते तक नहीं , 
फिर भी डरते है उनसे , 
सवाल दिल ही दिल पूछते है , 
लोग क्या कहेंगे ?

लोगो ने कहना कब छोड़ा है ,
उन्होंने तो सीता -राम  तक को नहीं छोड़ा है , 
मत पालिये ये भ्रम उनके कहने का , 
जो आपके दिल को अच्छा लगे , 
बेबाक और बिंदास करिये , 
लोगो की परवाह से , 
अपना जीना दूभर मत करिये।  

लोगो की ज़िन्दगी के अपने किस्से बहुत है , 
कम वो भी किसी से नहीं है , 
लाग लपेट कर बात करना , 
शगल उनका पुराना है ,
अपनी ज़िन्दगी में रूचि कम ,
दुसरो की ज़िन्दगी में जरूर झांकना है।  

जो आपके साथ दे , 
उनकी सुनना वाजिब है ,
बाकियो की बाते पर ध्यान न दीजिये , 
मन ही मन उन्हें कुढ़ने दीजिये , 
ज़िन्दगी एक बार मिली है , 
सपने पूरे करने में अपनी ताकत लगा दीजिये।  

Saturday, December 30, 2017

अन्तर्युद्ध


अंतर्मन की बड़ी दुविधा है ,
किस राह को अब चुनु ?

दिल और दिमाग की जोर आजमाइश है ,
चौराहे में खड़ा अब किस ओर चलूँ ?

आते है जीवन में क्षण ऐसे , पैर ठिठक जाते है
इस राह चलूँ की , उस राह चलूँ। 

भटक रहा मन जीवन पथ पर ,
यक्ष प्रश्न बन कर उभर रहा ,
मरीचिका सा भविष्य सामने ,
मार्ग कौन सा चुनूँ - दिल घबरा रहा। 

मन और मस्तिष्क के इस अन्तर्युद्ध में ,
शरीर बस कटपुतली बन रहा ,
किस राह पर चलूँ अब ,
किंककर्तव्यविमूढ़ सा खड़ा रहा। 

चलना तो नियति है ,
इसके बिना कहाँ फिर गति है ,
मुझे ही इससे पार पाना होगा ,
जहाँ मन लगे , वहाँ जाना होगा। 

मेरा जीवन मेरी थाती है ,
भूलकर सब , नव प्राण फूँकना होगा ,
चल चलाचल , वैतरणी को ,
खुद ही पार करना होगा।