अजब मर्ज है - लोग क्या कहेंगे ?
जिन्हे हम जानते तक नहीं ,
फिर भी डरते है उनसे ,
सवाल दिल ही दिल पूछते है ,
लोग क्या कहेंगे ?
लोगो ने कहना कब छोड़ा है ,
उन्होंने तो सीता -राम तक को नहीं छोड़ा है ,
मत पालिये ये भ्रम उनके कहने का ,
जो आपके दिल को अच्छा लगे ,
बेबाक और बिंदास करिये ,
लोगो की परवाह से ,
अपना जीना दूभर मत करिये।
लोगो की ज़िन्दगी के अपने किस्से बहुत है ,
कम वो भी किसी से नहीं है ,
लाग लपेट कर बात करना ,
शगल उनका पुराना है ,
अपनी ज़िन्दगी में रूचि कम ,
दुसरो की ज़िन्दगी में जरूर झांकना है।
जो आपके साथ दे ,
उनकी सुनना वाजिब है ,
बाकियो की बाते पर ध्यान न दीजिये ,
मन ही मन उन्हें कुढ़ने दीजिये ,
ज़िन्दगी एक बार मिली है ,
सपने पूरे करने में अपनी ताकत लगा दीजिये।

