निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में , लिए शब्दों का पिटारा ! भावनाओ की स्याही हैं , कलम ही मेरा सहारा !!
Showing posts with label naukri. Show all posts
Showing posts with label naukri. Show all posts
Thursday, July 23, 2026
Sunday, March 30, 2025
सैलरी
सैलरी तुम चाँद जैसी हो ,
पूर्णिमा पर आती हो ,
अमावस पर ख़त्म हो जाती हो ,
मगर अमावस से फिर ,
पूर्णिमा आने तक ,
वो इन्तजार हद तक गुजर जाता है,
साँसे अटकी , जेब खाली ,
शरीर हलकान रहता है।
Wednesday, April 17, 2019
प्राइवेट कर्मचारी
घुटती ज़िन्दगी ,
बेदम साँसे ,
लड़खड़ाते कदम ,
टूटते शब्द
उनींदी ऑंखें
आँखों के नीचे घेरे ,
माथे पर बल ,
लटका हुआ चेहरा ,
आधे अधूरे सपने ,
दौड़ता भागता जिस्म ,
थोड़ा छटपटाहट ,
थोड़ा बेचैनी ,
आधा अधूरा विश्वास ,
नकली सी हँसी ,
घबराया मन ,
कंधे पर लटकता बैग ,
हाथ में टिफ़िन ,
बड़बड़ाता मुँह ,
घडी पर नजर ,
ऑफिस से आता हुआ ,
एक प्राइवेट कर्मचारी।
Image source - Google
Labels:
job,
job pressure,
naukri,
pressure,
private employee
Friday, March 8, 2019
मैं और मेरी नौकरी ( व्यंग्य कविता )
जब तुम मेरे पास नहीं थी ,
मैं तुम्हारे होने के सपने देखता था
,
सोचता था अक्सर ,
तुम मिल जाओगी ,
तो मेरा जीवन सुधर जायेगा ,
ज़िन्दगी की तमाम खुशियाँ मेरे ,
दामन में आ बिखरेंगी ,
और जीवन कितना सुहाना हो जायेगा।
तुम आयी ,
जैसे मेरे पंखो को परवाज लग गए ,
सपने मेरे जैसे हकीकत में बदल गए ,
इज्जत में ऐसी बढ़ोत्तरी हुई ,
हम भी क़ाबिलो की कतार में खड़े हो गए।
मगर ,
धीरे धीरे न जाने क्यों तुमसे बेरुखी
सी होने लगी ,
न जाने क्यों रोज चिंता की लकीरें माथे
पर पड़ने लगी ,
उस मय्यसर की चाहत धीमी पड़ने लगी ,
अपने को रोज़ एक कैदखाने में बंद सा
पाने लगा ,
रोज़ एक ही ढर्रे पर चलने से मन उकताने
लगा।
फिर ,
दिमाग में एक अलग फ़ितूर सा छाने लगा
,
हरदम अपने को ठगा सा महसूस होने लगा
,
समय तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा गुजरने
लगा ,
एक डर सा हरदम साया बनकर रहने लगा
,
"तुम बनी रहो " हर तिकड़म
करने लगा।
परिणाम ,
तुम्हे साथ लेकर चलना मजबूरी बन गयी
,
"तुम्हारे न होने" की सोचकर
भी रूह घबराने लगी ,
घर-बार , रिश्ते -नाते सब दूर होने
लग गए ,
समय की कमी अब हरदम सताने लगी ,
खुद को साबित करने की ,
हर रोज़ एक नयी " जंग " होने
लगी।
अब ,
बने रहें दोनों हर हाल में ,
मैं तो तेरा बिना अधूरा ,
तेरी चाहत में खड़े है लोग कई ,
मन , बेमन - अब कोई मायने नहीं रखता
मेरे लिए ,
"नौकरी " तू बनी रहना - यही
प्रार्थना मेरी।
Subscribe to:
Posts (Atom)


