Wednesday, May 24, 2017

हाइकू - भाग -३

धन , दौलत और जवानी ,
किसी की सगी नहीं होती ,
आज इसके घर , कल उसके घर। 
******** 

दौलत और ताकत ,
वालो के लिए एक नसीहत ,
सिर्फ 'कर्म " जायेंगे साथ ऊपर। 
 *********

ज़िन्दगी ,
सबसे क्षणभंगुर हैं ,
सिर्फ साँसो पर टिकी हैं। 
*********** 

कुदरत का एक ही वार ,
काफी हैं इंसान को ,
अपनी हद में रहने के लिए। 
************ 

तंग आकर इस्तीफा लिखा  ,
तभी घर से फ़ोन गया ,

अगले महीने बहन की शादी तय हो गयी हैं।  
*************

Wednesday, May 17, 2017

हाइकू -२

"सब माया हैं "
कहने वाले गुरु जी ,
तिरछी निगाह से दानपेटी पर नजरे  गड़ाए थे। 
 .................................................................................

भाई -बहन रिमोट के लिए झगड़ रहे थे ,
माँ ने बेटी से कहा ,
" भाई को दे दे ,तू खाना बना।  "

.............................................................................. 

कार ने रिक्शे को टक्कर मारी  ,
भीड़ कार पर खरोच देखकर ,
आगे बढ़ गयी। 
 .............................................................................

बारात में सब खुश थे ,
दुल्हन के पिता पर दोहरी मार थी ,
प्यारी बिटिया और ज़िन्दगी भर की कमाई जा रही थी। 
................................................................................

बूढ़े माँ बाप के इकलौते बेटे को ,
“घर छोटा  हैंकहकर ,
बहु पति के साथ नए घर में चल दी।  

 ......................................................................................................................................


दो भाइयो ने जमकर मेहनत की ,
कंपनी खड़ी की ,
उनके बेटो में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गयी। 

 ..................................................................................................................................

साथ जीने मरने की कसम ,
प्रेमी की नौकरी जाते ही ,
स्वाहा हो गयी। 


Tuesday, May 16, 2017

हाइकू

फेसबुक पर दोस्त बने ,
व्हाट्सप्प पर खूब सपने सजे ,
मुलाकात हुई , रिश्ता ख़त्म।  
............................................................................

भ्रस्टाचार  मिटा के ही दम लेंगे ,
कहने वाले नेताजी ,
ट्रैफिक पुलिस को सौ रुपए दे रहे थे ।
 ....................................................

नारी सशक्तिकरण पर भाषण देकर  ,
एक सज्जन घर पर अपनी बीवी को ,
बिटिया को कॉलेज न भेजने की सलाह दे रहे थे।  
.......................................................

मैनेजर  जूनियर को समझा रहा था ,
घर बार सब भूल जाओ ,

दो घंटे से ऑफिस के फोन से घर बतिया रहा था।    

Friday, May 5, 2017

शब्द

शब्द -
प्यार हैं - तकरार भी,
शांति हैं - संहार भी, 
आदर भी हैं - अपमान भी।

शब्द ,
गति  है - ठहराव भी, 
उजाला है - अंधकार भी ,
भरोसा भी हैं , विश्वासघात भी।

शब्द -
ममता  हैं - दुत्कार भी ,
प्रेरणा  हैं - तिरस्कार भी,
नम्रता भी हैं -  घमंड भी।

शब्द -
मित्र  हैं- शत्रु भी,
मरहम  है - घाव भी,
आकाश  हैं - पाताल भी।

शब्द -
गीता है , महाभारत भी ,
ख़ुशी है - गम भी ,
पीड़ा है , मरहम भी। 

शब्द-
पसंद है - घृणा भी ,
मित्र है - दुश्मन भी ,
आधार है - शून्य भी।  

Friday, April 21, 2017

शब्द और भावनाये



शब्दों और भावनाओ की आंखमिचौली जारी हैं , 
कभी शब्द -भावनाओ पर ,  
कभी भावनाये , शब्दों पर भारी हैं !

विषय बहुत , मेरा अल्प शब्दकोष  
बहुत जद्दोजहद हैं , 
मेरी लेखन यात्रा में यही शायद एक मुश्किल हैं ।  

शब्द मेरे संगी साथी अब , 
शब्द ही मेरे तीर - तलवार ,
उमड़ घुमड़ करते रहते , 
अद्भुत हैं शब्दों का संसार

ठहर जाओ कुछ पल अब , 
भावनाओ को दे दो आकार , 
मैं यायावर बन गया हूँ , 
तुम्हे ही देना हैं अब साथ।  

मिलकर शायद कुछ पंकितयों का , 
सृजन हम कर ही लेंगे , 
मेरी कलम से कुछ कविताये , 
बन कर जीवन में रस घोलेंगे।  

Friday, April 7, 2017

लेखन यात्रा



निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में ,
लिए शब्दों का पिटारा ,
भावनाओ की स्याही हैं ,
कलम ही मेरा सहारा।

लिखूंगा , और बेबाक लिखूंगा ,
गद्य लिखूंगा -पद्य लिखूंगा ,
कभी कल्पनाओ में गोते ,
और कभी सच को धार दूँगा।

कभी आपको हँसाऊंगा ,
कभी शायद पलके नम करूँगा ,
यायावर बनकर अब ,
ज़िन्दगी के और नजदीक पहुँचूंगा।

मिलेंगे अपने जैसे मुझे और कई ,
शब्दों का जाल बुनता रहूँगा  ,
जीवन के इस नए सफर में ,
शायद ज़िन्दगी का सार मिलेगा।

अच्छा लगे तो हौंसला देते रहिएगा ,
बुरा लगे तो भी बताइयेगा ,
इस यात्रा में हो सके तो ,
मेरा साथ देते रहियेगा।  

Thursday, April 6, 2017

शब्द कम

शब्द कम ,
भाव बहुतेरे ,
दिल ग़मगीन ,
देखकर मंजर ,
उमड़ घुमड़ रहे हैं विचार अनेक ,

आशा लिखूं ,
निराशा लिखूं ,
कुछ खोने का दर्द लिखूं ,
चंद सिक्के मिले जो उनकी खनक लिखूं ,

यादो का पिटारा खोलूँ ,
वर्तमान का सच लिखूं ,
या भविष्य का कुछ खाका बुनू ,

लिखना तो आदत हैं मेरी ,
बिना लिखे रह भी पाउँगा ,
आड़े तिरछे पिरोकर चंद शब्दो को ,
शायद अधूरी कविता ही लिख पाउँगा। 

फिर भी नाउम्मीदी में उम्मीद को तरजीह देता हूँ ,
घुप्प अँधेरे में प्रकाश की एक लकीर देखता हूँ ,
हर ज़िन्दगी के संघर्ष में ,
उसकी आँखों में एक नयी तस्वीर देखता हूँ। 

उस उदास सूरज को अस्त होते देखता हूँ ,
चाँद को अपनी मुंडेर से झांकते देखता हूँ ,
चहचाहट फिर उन पंछियो की ,
हर सुबह पहली किरण के साथ सुनता हूँ। 

ज़िन्दगी पर फिर रोज़ भरोसा सा होता हैं ,
निकल पड़ता हूँ घर से ,
दिन भर ज़िन्दगी की तमाम उलझने देखता हूँ ,
किसी के चेहरे पर सुकून ,
किसी के चेहरे पर मासूमियत ,
किसी को सब कुछ पा लेने की चाहत ,
किसी को 'कुछ होने पर भी' मस्त देखता हूँ। 

हर रोज़ नए किस्से ,
नई कहानियां ,
नए गीत बनते देखता हूँ। 

कैसे लिखूं और क्या क्या लिखूं ?
शब्द कम ,

भाव बहुतेरे।  

Saturday, March 25, 2017

किंकर्तव्यविमूढ़

मेरा देश बड़ी  मुश्किल में हैं , इधर जाये या उधर जाये ! 
बड़ा किंकर्तव्यविमूढ़ सा हैं !! 

विकास की दौड़ में सबसे आगे रहना चाहता है , 
फिर घर की हालात देखकर ठिठक जाता हैं , 

खुशहाल बनने की ललक दिल में हैं , 
किसानों की दशा देखकर सहम जाता हैं , 

बराबरी का हक़ सबको मिले , 
महिलाओ पर होते अत्याचारो से जार जार रोता हैं, 

पूरे विश्व में शांति दूत बनना चाहता हैं , 
पड़ोसियों की हरकतों से बार बार जख्म खाता हैं , 

संताने उसकी मुक्कमल जहां बनाये , 
बढ़ती बेरोजगारी - हथोड़े सा वार करता हैं , 

सबको तरक्की के अवसर मिले , 
भ्रस्टाचार और बेईमानी राह में रोड़ा बनता हैं , 

सर्वधर्म समभाव रहे , 
कुछ लोगो को ये अखरता हैं , 

उम्मीद अभी हैं उसे , 
सदियो से वजूद उसका यूँ ही  कायम नहीं  हैं , 

उठ खड़े होंगे जब ढाई सौ अरब हाथ इक दिन , 
दुनिया में उसके जैसा फिर कोई नहीं हैं।  

Sunday, March 19, 2017

चलो , देश बदलते हैं



चलो , देश बदलते हैं , 
थोड़ा हम और थोड़ा दुसरो को बदलते हैं। 

मंद गति से चल रही विकास यात्रा को , 
आओ ढाई सौ अरब हाथो से थोड़ा धक्का लगाते हैं, 
चलो  , देश बदलते हैं। 

हम सब पहले भारतवासी हैं , 
जात -पात - धर्म- ऊँच - नीच  की राजनीति से थोड़ा ऊपर  उठते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

जो पिछड़े , अशिक्षित , गरीब हैं , 
उनको सब मिलकर ऊपर उठाते हैं , 
चलो  , देश बदलते हैं। 

जो जहाँ हैं , वही से शुरू करते हैं , 
अपना काम मेहनत और  ईमानदारी से करते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

क़र्ज़ बहुत बड़ा हैं देश का सब पर , 
थोड़ा इस क़र्ज़ को कम करते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।

कराह रही अपनी भारत माता के, 
चेहरे पर मुस्कान लाते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

Friday, March 17, 2017

ये चुनाव कुछ कहते हैं



उत्तर में भगवा लहराया , 
गोवा में थोड़ा सा कमल मुरझाया , 
मणिपुर में कमल शुरुवात हुई , 
पंजाब ने हाथ पर भरोसा जमाया।  

मोदी लहर ने फिर दिखाया कमाल , 
पंक्चर हुई "साइकिल" - "हाथ" हुआ लाल, 
"हाथी" की बदल गयी चाल , 
बाकियो का किसी ने न पूछा हाल।  

सारे मिलकर मंथन कर रहे हैं , 
हार का दोष अब एक दूसरे पर  मढ़  रहे हैं , 
कई  ई वी एम् को शक से देख रहे  हैं ,
अपनी कथनी  करनी कोई देख नहीं रहे हैं।  

मतदाता फिर से चुपचाप हो गया हैं , 
नेताओ को सबक सीखा दिया हैं , 
पांच साल बाद ही अब जागेगा , 
किस्मत अपनी नेताओ को देकर अपने काम में लग गया है।