Thursday, December 22, 2016

कवि और कविता

जो देखता हूँ , वो लिखता हूँ !
शब्दो को आड़े तिरछे - आगे पीछे पिरोता हूँ !!

जो महसूस होता हैं !
शब्दो के जरिये बयां करता हूँ !!

अपने को कवि नहीं कहता  !
फिर भी कविताये लिखने का प्रयास करता हूँ !!

खालिस कवि तो विरला होता हैं !
वो शब्दो को मोती बना कविता को पिरोता हैं !!

कल्पना को अपनी शब्दो में जीवंत करता हैं !
एक  एक शब्द से पूरा सार गढ़ता हैं !! 

कभी भावनाओ के अतिरेक में बह कर विद्रोही सा लगता हैं !
कभी किसी विषय पर आँखों के कोरे गीली कर देता हैं !!

कवियों का संसार भी अजब हैं !
हर कोई दिल से यायावर और मस्तमौला हैं !!

हर चीज में उन्हें कविता सूझ जाती हैं !
ज़िन्दगी की  इस आपाधापी में भी  कलम बेबाक चलती हैं !!

Saturday, November 19, 2016

बदलाव की बयार ( नोटबंदी )

एक कोशिश हुई कुछ बदलने की , 
जो हम दिल से चाहते हैं !
किसी ने तो पहल की वो दुनिया बनाने की , 
जिसमे हम रहना चाहते हैं !! 

बदलाव की बयार बह रही हैं , 
हमें भी कुछ बदलना होगा !
अपने " आने वाले कल" के लिए,
 " आज " संघर्ष करना होगा !! 

देश आज दोराहे पर खड़ा हैं , 
कोई रास्ता तो चुनना होगा !
या तो ऐसे ही चलते रहो , 
या फिर परिवर्तन का हिस्सा बनना होगा !! 

बेशक अभी परेशानी बहुत हैं , 
हर तरफ हाहाकार हैं !
लोगो के सब्र का ये कड़ा इम्तेहान हैं , 
" देश " के लिए आज यही तो बलिदान हैं !! 

Monday, November 14, 2016

नोटबंदी के साइड इफेक्ट्स

पूरा विपक्ष एकजुट हो गया , भूल गया अपने उसूल !
कालेधन पर हथौड़ा मारा हैं , उनसे पूछे बिना मोदी जी ने शायद कर दी भूल !!

कुछ समय तो देते मोदी जी उनको , ठिकाना लगाना था काला धन !
वर्षो की मेहनत पर उनके , उड़ेल दी सारी धूल !!

"ऐसा भी कोई करता हैं" - एक झटके में ऐसे फैसला लेता हैं !
खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे , सारे देश को कोई क्या  लाइन में लगाता हैं ? !!

 सारा देश लाइन पर लग गया , छोड़ के सारे काज !
क्या ऐसे कोई करता हैं "काले धन " का पर्दाफाश ? !!

 आतंकवादी - आतंक भूल गए , उनके आकाओ को गया पसीना !
दुश्मन भी चित हुआ - बिना वार किये दिखा दिया छप्पन इंची सीना !!

गरीब आज खुश हुआ , मिला उसे बराबरी का ताज !
बड़े बड़े धन्ना सेठो कोचिंतित देखा आज !!

 ऐसा अवसर इतिहास में यदा -कदा ही आता हैं !
जब छोटा नोट , बड़े नोट को उसकी औकात  दिखाता हैं !!

खुल गए खजाने सब , टूट गयी तिजोरियाँ !

बनने चल दिया मेरा 'भारत ' फिर से 'सोने की चिड़िया ' !!

Wednesday, November 9, 2016

ऐ ! सैलरी , जरा धीरे धीरे गुजर। ( सभी वेतनभोगी कर्मचारियों को समर्पित)


तेरे इन्तजार में न दिन देखा-न रात ,
अब आयी हैं तो जरा ठहर !

मुझे तेरे होने का एहसास तो होने दे ,
कुछ वक्त तो मेरे साथ गुजार ले !

तेरे आने की आहट से ही दिल सुकून से भर जाता हैं ,
तेरे जाने पर दिल मेरा जार जार रोता हैं !

जब तक तू मेरे साथ रहती हैं ,
मेरा हर दिन होली , रात दिवाली होती हैं !

तेरे चले जाने के बाद ,
हर दिन बेरंग और रात अमावस होती हैं !

तू तो इतरा कर चली जाती हैं ,
तुझे इल्म नहीं हैं शायद , उसके बाद मुझपर क्या बीतती हैं ? !

तेरे फिर से आने के ख्यालो से जी लेता हूँ ,
हर रोज़ जी और मर लेता  हूँ !

अब आना -तो थोड़ी फुरसत लेकर आना,
कुछ दिन और रुककर मुझे ज़िंदा होने का एहसास करा जाना !

तेरी बाट जोहूंगा ,
हो सके तो समय पर आ जाना ! 

काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक

मोदी जी हद कर दी , 
एक झटके में ५०० और १००० के नोटों की गड्डी रद्दी कर दी !

कितने जतनो से कमाई थी , 
नजर न लगे किसी की , सबसे छुपाई थी !

न जाने कहाँ कहाँ लक्ष्मी माता कैद रखी थी , 
तुम्हारे एक एलान से झटके में मुस्कराई थी !

काली तिजोरियो में हड़कंप हैं , 
पहली बार १०० के नोट के आगे ५०० का नोट बेदम हैं !

अब कैसे लड़े जायेंगे चुनाव -कैसे होगा हवाला कारोबार , 
इस सर्जिकल स्ट्राइक में वाकई दम हैं !

हर बार कुछ गजब कर जाते हो , 
इतना बड़ा जिगर कहाँ से लाते हो ? !

लगता हैं कुछ कर जाओगे , 
इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरो में लिख जाओगे।  

Tuesday, November 8, 2016

पलायन का दर्द




छोड़ कर अपना घोंसला एक दिन , 
उड़ पड़ा  पंछी नया आसमां ढूंढने , 

नए पंखो की उड़ान लंबी थी , 
सब कुछ नाप जाने की ललक भी थी , 

नई उम्मीदे , नए हौंसले 
नव किरण की आस लिए 

माँ ने समझाया - बाप ने बुझाया ,बहनो ने रिझाया - भाइयो ने हड़काया। 
सबकी अनसुनी कर , उड़ चला वो मस्तमौला अपनी दुनिया से अनजानी दुनिया में रम गया।।

वो नयी दुनिया पाकर मस्त हो गया , घोंसला उसका बिखर गया ।  
उसको नया आसमां रास आ गया , पीछे उसका सब कुछ छूट गया।।  

बहुत कुछ मिल गया उसे ,  पा लिया सबकुछ  जिसकी उसको चाह थी।  
मगर बैचैनी थी  कुछ उसे , शायद उस मिटटी में कुछ अलग बात थी।। 

चकाचौंध की अपनी नयी दुनिया में, अब उसे सुकून की तलाश थी।  
रौंदा था जिस मिटटी को बचपन में , शायद उसको उसकी खुशबूं अब भी याद थी।।

स्वंछंद और बेफिक्रे घूमने की शायद  उस पर पाबन्दी थी।  
डरा डरा रहने की शायद , नए आकाश में  मजबूरी थी।।  

Sunday, November 6, 2016

फिजायें कुछ बदली सी हैं .... ( देश की राजधानी और उसके आसपास के वातावरण पर समर्पित कविता )

आबो हवा कुछ बदली सी हैं , कोहरे की चादर ओढे सुबह रो रही  हैं !
सूरज अपनी किरणे भेजता तो हैं , ये अजीब सी धुंध अपने अंदर सोख रही हैं !!

फक्र होता था जिन हवाओ पर कभी , आज वही जहरीली सी क्यों हैं ? !
लगता हैं कही कुछ साजिश हैं , हवाओ को कैद करने की मंशा तो नहीं हैं ? !!

आँखे लहूलुहान , फेफड़ो का दम घुट रहा हैं !
कही इसके लिए हम सब तो जिम्मेदार नहीं हैं ? !!

प्रक्रति तो अपने तय नियमानुसार ही चलती हैं !
जैसे करोगे वैसा भरोगो - बार बार कहती हैं !!

हवाओ ने भी अब सीधा सबक सिखाने की ठान ली हैं !
दंभ और आडंबर ओढ़े हम इंसानो को अपनी करनी याद दिला दी हैं !! 

Friday, October 21, 2016

हिटो ददा भूली , हिटो भे -बेणियओ ( कुमाउँनी कविता )




हिटो ददा भूली , हिटो भे -बेणियओ- पहाड़ बुलौनी !
नौव ठण्ड पाणी , बांज बूझाणी - सब धात लगौनी !!

पौरो  की बखई, धार मी कौ घाम - सब तरसनि !
गद्दुआ का झाल , उ भट्टाक डुबुक - तुमर राह देखणी !!

आलूक गुटुक - काकड़ फूलुन - तुमकू बुलौनी !
का छा रे नान्तिनो - गोल्ज्यू और गंगनाथ ज्यूँ बुलौनी !!

आमेक बुबु फसक - गुड़ कटक चाह -धरिये रौनी !
आपण नान्तिनो लीजि पहाड़ आंस बहूनि !!

Friday, October 7, 2016

बहरूपिये


इधर उधर - यहाँ वहाँ बहरूपिये घूम रहे हैं !
अंदर से कुछ और , बाहर से कुछ और - अपने मौके ढूंढ रहे हैं !!

शेर की खाल का लबादा ओढे बहुत सियार  घूम रहे हैं !
बचा के रखो खुद को , दोस्त बनकर कुछ दुश्मन खंजर लिए घूम रहे हैं !! 

रिश्ते नाते , सच्चाई को ताक पर रख रहे है !
कुछ लोग भरे बाजार चंद रुपयो में ईमान बेच रहे हैं !!

दौर गजब का चल रहा हैं !
नालायकी शबाब पर और लायक बड़ी मुश्किल से गुजर बसर कर रहे हैं !!

सही रास्ते पर चलने की सीख देने वाला दकियानूसी हैं !
बरगलाने वाले  - शुभचिंतक बन रहे हैं !! 

सच्चे और ईमानदार अभी भी चुपचाप  नेक काम कर रहे हैं !
बहरूपिये ताल ठोककर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं !! 

Wednesday, October 5, 2016

बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं


झूठे को बढ़ावा , सच को अनदेखा करने का !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं      !!

देश के लिए शहीद होने वालो के लिए चुप्पी , देशद्रोही की मौत पर हंगामा  करने का !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं    !!

समाज को जो सुधारने चलता हैं उसके पीछे कोई नहीं , फरेबी और मक्कारो के पीछे भीड़ !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!

 माँ -बाप के सुझावों की अनदेखी , पराये लोगो की सलाह को बच्चो को लेते देखा हैं !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!  

परिवार के बीच एक छत के नीचे ख़ामोशी को पसरा देखा, फोन पर मायावी दुनिया में शोर होते देखा हैं !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!

विषय की जानकारी भले ही शून्य हो , मगर ताल ठोककर अपनी राय देते सुना हैं !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!

शेरो को झुण्ड में और गीदड़ो को दहाड़ते सुना हैं !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!

कर्मयोगी का तिरस्कार और कामचोरों को पुरुष्कार लेते देखा हैं !
बड़ा अजीब चलन चलते देखा हैं !!

Friday, September 30, 2016

नयी इबारत


चल फिर से ज़िन्दगी की नयी इबारत लिखते हैं !
देर कभी नहीं होती , आज से ही शुरू करते हैं !!

बीते लम्हो को याद बनाकर आगे बढ़ते हैं !
आगे कैसे सुनहरा हो ? प्लान बनाते हैं !!

क्या खोया , क्या पाया - इस बात की फिक्र छोड़ते हैं !
आज फिर से एक कोरे कागज से ज़िन्दगी शुरू करते हैं !! 

चल बेहतर से बेहतरीन बनते हैं !
ज़िन्दगी को अपनी कुछ सरल करते हैं !!

फिर से बच्चा बनकर चीजो को नए सिरे से समझते हैं !
हजारो सवालो के उत्तर फिर ढूंढते हैं !! 

न किसी से कोई शिकायत , न कोई रंजो गम दिल में रखते हैं !
चल फिर से नयी ज़िन्दगी शुरू करते हैं !!

Sunday, August 21, 2016

सलाम हैं सिंधु और साक्षी


नाज है बेटियो पर आज हिंदुस्तान को !
साक्षी और सिंधु ने लाज बचायी हैं !!

रियो के खेलकुंभ में आपने ही !
विजय पताका फहराई हैं !! 

जब रियो में तुमने तिरंगा फहराया !
भारत का एक  एक कोना गौरव से फूला समाया !!

जब जब हिंदुस्तान की इज़्ज़त की बात आयी हैं !
धन्य हैं इस माटी की , बेटियाँ ही काम आयी हैं !!

लड़की को बोझ समझने वालो के मुहं पर ! 
ये एक जोरदार तमाचा हैं !!

सिंधु और साक्षी आज सारे हिंदुस्तान को !
तुम दोनों पर फख्र हैं !! 

Wednesday, August 10, 2016

जागो देश के नौनिहालो !

जागो देश के नौनिहालो !
देश आज पुकार रहा !!

देकर मुझे नेताओ के हाथ !
तू क्यों सो रहा ? !!

क्या इसीलिए लाखो ने अपनी क़ुरबानी दी थी ? !
मेरी आज़ादी के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़ी थी !!

माना की तू अपनी रोज़ी रोटी कमाने में व्यस्त हैं !
मगर याद रख - मेरा भी तो तुझपर क़र्ज़ हैं !!

स्वार्थी भेड़िये मुझे नोच नोच कर खा रहे हैं !
अपना दीन ईमान सब बेच रहे हैं !!

रोम रोम मेरा काँप रहा  !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

वर्दी वालो ने वर्दी बेच दी !
नेताओ ने शर्म बेच दी !!

कोई धर्म के नाम पर गरिया रहा !
कोई जात पात की रोटियां सेंक रहा !!

देख कर मेरे घर की हालात !
अदना पडोसी भी धमका रहा !!

चाल दुश्मन चल रहा ,भाई भाई में फूट डाल रहा  !
गंगा जमुना की तहजीब में विष कोई घोल रहा !!

माँ बहनो की इज्जत से रोज़ खिलवाड़ हो रहा !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

अब भी अगर न उठा तू , बहुत देर हो जाएगी !

तेरी "भारत माता" फिर से गुलामी की जंजीरो में जकड जायेगी !! 

Monday, August 8, 2016

आजादी मतलब ज़िम्मेदारी !


खुशकिस्मत हैं हमआज़ाद देश के बाशिंदे हैं !
गुलामी के दंश और  चाबुक की मार नहीं झेले हैं !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी विरासत में पाए हैं !
जुल्मो और अत्याचारो को हमारे पुरखे सहे हैं !!

खुशकिस्मत हैं हमारे पुरखे ,  अपना बलिदान दे गए !
हमारे आज के लिए अपना सर्वस्व त्याग गए !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार बन गयी !
परतंत्रता हमारे लिए किताबी बात हो गयी  !!

यक्ष प्रश्न आज सामने खड़ा और पूछ रहा !
आज़ादी के साथ की जिम्मेदारी को फिर कैसे भूल गए ? !!

अधिकारों को लेकर हर जगह हंगामा हैं !
कर्तव्यों के लिए क्यों सन्नाटा पसरा हैं ?!!

आज़ादी सिर्फ अधिकारों का झोला नहीं हैं !
इस झोले में कर्तव्यों का  वजन भी  भारी हैं !!

आजादी का  जश्न मनाये , कर्तव्यों को  याद रखे !
देश हमारी जिम्मेदारी हैं , इसका हमेशा मान रखे !! 

अपनी अगली पीढ़ी को हमें राह दिखानी हैं !

पुरखो से मिली इस आज़ादी को सही सलामत उनको देकर जानी हैं !!

( आज़ादी की ७० वीं वर्षगांठ पर देश को समर्पित ) 

Tuesday, August 2, 2016

गुजारिश

ज़िन्दगी कुछ चाहती रही , हम कुछ और चाहते रहे !
कशमकश  चलती रही , फासले बढ़ते गए !!

ज़िन्दगी दिल से चलती रही , हम दिमाग की सुनते रहे !
चले दोनों एक साथ थे , अब मीलो के फ़ासले हो गए !!

वो मेरी एक मुस्कान को तरसती रही !
हम बेफिजूल उस पर झल्लाते रहे !!

वो अब भी हर रोज़ फिर से मौका देती हैं !
मुस्करा कर हर रोज़ स्वागत करती हैं !!

हम उलझे रहते हैं हर रोज़ , उसकी मुस्कान को किनारा करते हैं !
वह हर रोज़ अपनी वफ़ा निभाती हैं, उसकी हिम्मत की दाद देते हैं !!

उसकी तो गुजारिश बस इतनी सी रहती हैं !
जब तक साथ हूँ , जी भर के मुस्कराते जी ले !!