रूस यूक्रेन को गरिया रहा है ,
अमेरिका -इजराइल मिलकर ईरान को समेट रहे है ,
ईरान , अरब पर मिसाइलें दनादन ठोक रहा है ,
यू एन ओ सब ख़ामोशी से देख रहा है।
ट्रम्प नाटो से खफा है ,
रूस -चाइना ईरान को हौंसला दे रहे है ,
दुनिया गैस -तेल को रो रही है ,
होर्मुज का गला ईरान रेत रहा है।
पाकिस्तान बौखलाहट में अफगानिस्तान में ,
हवाई आफत बरसा रहा है ,
अफगानी डुरंड रेखा को ही ,
मिटाने पर तुला है।
ख़ामोशी से हिसाब किताब लगा रहे बाकी देश ,
कोई किसी के पाले नहीं आ रहा है ,
टकटकी लगाये सब देश मंजर देख रहे है ,
नया वर्ल्ड आर्डर तेल गैस की चिंता में फँसा पड़ा है।
भारत आपदा में अवसर तलाश रहा है ,
कूटनीति की बिसात बिछा रहा है ,
धुरंधर -२ ने उड़ा रखा है गर्दा हर ओर ,
हर कोई बस इसी की बात कर रहा है।
निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में , लिए शब्दों का पिटारा ! भावनाओ की स्याही हैं , कलम ही मेरा सहारा !!
Tuesday, March 24, 2026
वर्ल्ड आर्डर
Monday, March 23, 2026
धुरंधर
कौन है धुरंधर ?
वो जो सही वक्त पर ,
सही कदम उठाकर ,
अपने जूनून और हौंसले से ,
अपने लक्ष्य की तरफ ,
एकाग्र और एकनिष्ठ ,
मंजिल की तरफ बढ़े ,
फिर हार हो या जीत ,
आत्मसात करे ,
और फिर उठने का साहस करे ,
जगाये अंतर्मन को पुरजोर ,
दृढ़ निश्चय कर ,
आगे बढ़े ,
तब तक जब तक सीने में ,
कुछ कर गुजरने का ,
जज्बा कायम रहे ,
वही धुरंधर , वही धुरंधर।
Friday, March 20, 2026
वक्त
जो बीत गया , वो बीती बात है ,
जो सामने है , वही सच है ,
कल की फिक्र कर बस इतनी ,
आज जो है सामने ,उसको व्यर्थ न कर।
खरीद फरोख्त के इस जहाँ में ,
बस वक्त ही इक अपवाद है ,
फिसल इक बार लौट कर न आयेगा ,
बस वक्त की ही तू कद्र कर।
वक्त के संग चलना सीख ले,
रुकना इसका स्वभाव नहीं,
जो ठहर गया वो छूट गया,
इसमें कोई ठहराव नहीं।
हर पल में छिपी एक सीख है,
हर क्षण में इक अवसर है,
जो समझ गया इस रहस्य को,
उसका जीवन ही बेहतर है।
न बीते पर तू अश्रु बहा,
न आने वाले से डर,
जो हाथ में है वही अमृत है,
बस उसी में अपना घर कर।
Wednesday, March 18, 2026
चैत्र प्रतिपदा - नूतन वर्ष
शीत की कठोर धारा अब थम सी गई,
धरती के आँगन में फिर हँसी खिल गई।
वृक्षों के तन पर नव पल्लवों की चादर,
फूटे हैं कोंपल बन उमंगों के झरने अंदर।
मधु-गंध से भरा है आलोकित आकाश,
गूँज रहे हैं पंछियों के स्वर, मीठे सुवास।
स्नेह से भिगोता हर कण, हर शाख,
मानो कहता हो "जीवन की नई आस !"
समृद्धि का संदेश लाए यह श्रीमान् मास,
भर दे प्राणों में अनुराग और उल्लास।
प्रतिपदा का प्रभात नव स्वप्न जगाए,
नववर्ष नहीं, नवजीवन मुस्काए।
हर कली बने कविता, हर पवन बने गान,
चैत्र में प्रकृति रचती अपना नया विधान।
जहाँ हर जीव में फिर विश्वास जगता है,
वहीं मानव मन पुनः प्रेम से भरता है।