Tuesday, June 28, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग -५

हर ज़िंदगी की अपनी कहानी , अलग अलग हैं दास्तान !१!
कोई मेहनत से लिखता , किसी पर किस्मत मेहरबान !२!
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समय एक सा नही रहता , गाँठ बांध लीजिए यह  बात !१!
झक उजाला हैं भी अगर , अपनी बारी आनी हैं  रात !२!
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सुनी सुनाई बातो पर मत कीजिए यकीन !१!
अफवाहो का बाजार गर्म हैं चलते रहते हैं तीर !२!
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"हाँ जी" नौकरी हैं , "ना जी" का घर !१!
बचा के रखिए नौकरी, नही तो दरबदर !२!
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सच्चा प्यार मिल जाये तो उसकी करिये कद्र !१!
दिखलावटी संसार मे किसी को किसी की नही हैं फिक्र !२! 
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ज्ञान देना - अभिमान नहीं , धन देना - अहंकार नहीं !१!
स्वास्थ्य देना - रोग नहीं , जीवन हँस कर जीना - रो कर नहीं !२!
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लक्ष्य बनाइये जीवन का , तब कुछ हासिल हो पाय !१!
समय अपनी चाल चलता रहे  , और जीवन बीत जाय !२!
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यादों की पोटली में बांधते रहिये कुछ खुशनुमा पल !१!
जीवन सफर में जब उदास हो, गुदगुदाएंगे ये पल !२!
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सुबह आँख खोलते ही लीजिए उस प्रभु का नाम !१!
एक नया सवेरा फिर दिया , करने पूरे काम !२!
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मुमकिन कोशिश करिये - दीजिये अपने सपनो को उड़ान !१!
मुश्किल थोड़ा आये भी अगर - मत टूटने दीजिये विश्वास !२!

Thursday, June 23, 2016

अाधुनिक कहकहे - भाग -४

गुस्से  को काबू मे रखिए , बोलते रखिए ध्यान !१!
गलती हो जाए तो मान लीजिए , नही घटेगा मान !२!
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हुनर बढ़ाते रहिए , तरकश मे  बढ़े  तीर !१!
जीवन  सफर का वही सच्चा वीर !२!
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सूरज छुप जाए बादलो मे , रात नही होती !१!
आ जाए थोड़ा परेशानी , ज़िंदगी बोझ नही होती !२!
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जीवन मंत्र यही हैं , धीरज रखिए साथ !१!
मौके न गवांये , खुले रखिए आंख और कान   !२!
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सोच सोच कर न कीजिए अपने दिमाग को परेशान !१!
कर्मो से अपने उठा दीजिए तूफान !२ !
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राजदार बनाये उसी को , जो बात पचा पाय !१!
वरना ढिढोरा पीटे , जग आप पर मुस्काय !२!
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जब छा जाए घनघोर निराशा , बात रखिए एक ध्यान !१!
खुशियाँ देने से पहले , भगवान ले रहा इम्तेहान !२!
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नौकरी कोई भी हो , सिद्दत से करिए काम !१!
बॉस से बना कर रखिए , नही तो काम तमाम !२!
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चुगलखोरो और झूठो से हरदम रहे सावधान !१!
अपने स्वार्थ के लिए कर सकते हैं ये परेशान !२!
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अतीत को सोचकर कोई फायदा नही , बीत गयी वो बात !१!
 भविष्य वक्त के गर्भ मे हैं , जी लीजिए बस आज !२!

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Tuesday, June 21, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग -3


बरसो मेघो इस कदर , सब कुछ धुल जाये !१ !
अहंकार , पाप , लालच - सब कुछ बह जाये !२ !
 X
 झूलती हैं हर रोज़ ज़िन्दगी , नौकरी और परिवार के साथ !१ !
दोनों जगह की आशायें बहुत हैं , ज़िन्दगी करती सीत्कार !२ !
X
दोस्ती के पैमाने बदल गए , नहीं रही कृष्ण-सुदामा जैसी मिसाल !१ !
अब दोस्ती सोच समझकर होती , रखा जाता हैं स्वार्थ का ध्यान !२ !
X
चुनाव से पहले नेताजी जोड़े सबके हाथ , "हम जनता के सेवक , करेंगे सेवा दिन रात " !१ !
चुनाव जीतने के बाद -जनता नेताजी को ढूंढे , नहीं मिलते फिर पाँच साल !२ !
X
बँट रहा हैं ज्ञान सब जगह , ज्ञानियों की बढ़ गयी हैं तादाद !
दूसरों को लोभ -मोह- माया से दूर रहने को कहे , अपना हो रहे हैं आबाद !!
 X
खूब तरक्की कर ली हैं इंसान ने , चाँद पर रख दिए हैं पाँव !१ !
अपनी धरती को ख़त्म करने के लिए , जुटा लिया हैं सब सामान !२ !
 X
एक क्लिक से खुल जाता हैं - एक अदभुत संसार !१ !
घर बैठे ही कर लीजिए - प्यार हो या व्यापार !२ !
 X 
जिसके पास बड़ा बंगला - महँगी कार , वही आज इज्जत का हकदार !१ !
कर्म भले ही जैसे हो , होती हैं उसकी ही जय जयकार !२!
 X
टेक्नोलॉजी ने जीवन कर दिया कितना आसान, एक क्लिक पर दुनिया तमाम  !१ !
 कहीं जाने की जरूरत नही हैं अब , एक स्मार्टफ़ोन से होंगे आपके सारे काम !२ !
X
शॉर्टकट सब ढूंढे , मेहनत कोई अब क्यों करे ? !१ !

स्मार्ट बनने के इस जमाने मे समय जाया क्यों करे? !२ !

Tuesday, June 14, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग -२

गुरु शिष्य अब स्टूडेंट टीचर हो गए , न रही अब परम्परा की बात !1
टीचर की बात को कैसे झुठलाये ?, लेता इंटरनेट का साथ !2!
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माँ कुछ बेटी से कहे , प्राइवेसी में दखल हो जाता हैं !1
पिता कुछ बेटे से कहे , आपको क्या मालूम ? कहता हैं !2!
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जीवन मूल्य बदल गए , बदल गए उसूल !1
सच्चाई पर कदम कदम पर भारी पड़ रहा है झूठ !2!
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गर्लफ्रेंड कहती बॉयफ्रेंड से ," प्यार व्यार सब ठीक हैं , बैंक बैलेंस कितना हैं तुम्हारे पास ? !1
सास ससुर की सेवा, खाना बनाना, बच्चे पालना नहीं हैं मेरे बस की बात !2!"
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होने वाली पत्नी कहे," घर में न सास ससुर चाहिए , न कोई ननद का राज !1
मेरे ऊपर कोई पाबन्दी नहीं चाहिए , सोई रहू चाहे दिन रात !2!”
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देशप्रेम अब शब्द रह गया , नहीं खौलता खून !1
देशभक्त को कोई न जाने , देश द्रोहियो की सब करे पूछ !2!
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धन दौलत के लालच में , सब कुछ गए भूल !1
ताक पर सब मान मर्यादा , बदल गए उसूल !2!
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सबको हर चीज़ की जल्दी हैं , धैर्य नहीं किसी के पास !1
बीज अभी बोया नहीं , फल की करे आस !2!
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फेसबुक ने पुराने साथी मिलाये , व्हाट्सप्प कराता बात !1
बोर होने के दिन लद गए , जबसे  स्मार्टफोन आया हाथ !2!
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भावनायें व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं , इमोजी चाहिये !1
घर का खाना सादा होता हैं , जंक फ़ूड के साथ कोक चाहिए !2!
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Monday, June 13, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग १

कुर्सी की खातिर बिक गया सब दीन -ईमान !
सत्ता के लिए इकठ्ठा हो गए सब बेईमान !!
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नाममात्र के  रिश्ते रह गए , ख़त्म हो गया अपनापन !
बेटा पूछे बाप सा , कितना छोड़ जाओगो मेरे लिए धन !!
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हवा में जहर घुल गया , पानी हुआ दूभर !
धरती सारी बंजर हुई , अब कहाँ उपजे अन्न !!
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बेटी जब बहु बनी , माँ बनी सास !
घर में क्लेश मच गया , न बची कोई आस !!
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दिन में महिला शक्ति की बात , रात में उठाए बीवी पर हाथ !
बेटी बचाओ के नारे लगाए , जन्मे दूसरे के घर में -मन में ये बात !!
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 बात बात में टूट रहे रिश्ते , खो रहा धैर्य और विश्वास !
कोई झुकने को तैयार नहीं , सबका अपना अपना स्वार्थ !!
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दादी - नानी की कहानियाँ , अब हो गयी पुरानी बात !
पोगो, हंगामा , डिज्नी अब दे रहे बच्चों का साथ !!
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 बदल गयी हैं दुनिया , बदल गयी इसकी रीत !
घर के मुखिया सब बन गए , नहीं रही अब वो प्रीत !!
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बेटा कहे बाप से - आउटडेटेड हो गए हो आप , आपको दुनिया की समझ नहीं !
बाप बोला बेटे से , चालीस साल पहले मेरे पिताजी ने भी यही बात मुझसे कही !!
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दोस्त अब ऑनलाइन मिलते हैं , घंटो बतियाते हैं !

मुश्किल घड़ी आ जाये तो ऑफलाइन और अंरेचेबल हो जाते हैं !!
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दौड़




'आनंद' इस संसार में लगी हुई दौड़ !
भाग रहे हैं सब बेतहाशा - पता नहीं  किस ओर !!

गरीब दौड़ रहा रोटी की खातिर , अमीर दौड़ रहा और अमीरी  की खातिर !
कोई दौड़ रहा  दौलत की खातिर , कोई दौड़ रहा और इज्जत की खातिर !!

मध्यम वर्ग किंकर्तव्यविमूढ़ सा हैं , उसे कुछ नहीं सूझ रहा !
थोड़ा हैं , और थोड़े के लिए वो भी जूझ रहा !!

सबकी दौड़ का मकसद अपना अपना , इंसानियत की खातिर कोई दौड़े, मुश्किल हैं ढूँढना !
इस दौड़ में कोई कुचल रहा , कोई कराह रहा और कोई डींगे हांक रहा  !!

लक्ष्य क्या हैं और कहाँ पहुँचना हैं ? यक्ष प्रश्न हैं किसी को नहीं पता हैं  !
आत्मा कचोटती हैं हर दिन , फिर भी अगले दिन दौड़ में शामिल होना हैं !!

हर कोई इस दौड़ में बस आगे - और आगे रहने का मंसूबा पाले हैं !
कुचले चाहे नैतिक मूल्य कितने ही , दौड़ में बस आगे रहना हैं !!

कुछ लोग इस अंधी दौड़ से किनारे हो गए हैं ,  जीवन के सच्चे अर्थ को समझ गए हैं !
जिंदगी  तो बस वही जी रहे हैं , बाकी सब दौड़ में दौड़े जा रहे  हैं !!  

Wednesday, June 8, 2016

जंगल में सभा


जंगल में बड़ा हो-हल्ला था , शेर राजा ने आपातकालीन मीटिंग बुलाई थी !
इंसान के बढ़ते प्रभुत्व से  सबकी जान पर आफत आयी थी !!

सबके हाथो में शिकायतों के पुलिंदे थे , हर चेहरे पर निराशा थी !
राजा भी हताश सा था , जबरन चेहरे पर मुस्कान थी !! 

अपने अस्तित्व के लिए सबने एक सुर में इंसानो के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया !
सबने तालियाँ बजाई उस वक्त जब कुत्ते ने मार्मिक भाषण दिया !!

गाय ने अपना दुखड़ा रोया , इंसानो को जम कर कोसा !
हाथी ने अपने आशियानों को उजाड़ने का आरोप जड़ा !!

पक्षियों की अपनी शिकायतें थी , जलचरों की अपनी फ़रियाद  थी  !
इंसानो ने हवा, पानी , जंगल - सब पर अपनी मिल्कियत जमाई थी !!

न अब हवा स्वच्छ थी , पानी भी दूषित था !
जंगल सब कट चुके थे , हर जगह इंसानो का कब्ज़ा था !!

एक सुर में सबने इंसान पर दोषारोपण कर दिया !
जंगल के राजा ने भी मौका देख कर इंसान को नोटिस भेज दिया !!

इंसानो को अपना प्रतिनिधि भेजने को कहा गया !
हाजिर हो समय पर , साफ़ साफ़ लिखा गया !! 

नोटिस भेज भेज कर जंगल का कंप्यूटर क्रैश हो गया !
कोई प्रतिनिधि तो क्या इंसानो से नोटिस प्राप्ति की रसीद तक नहीं आया !!

जंगल में मीटिंग्स होती रही , नोटिस पर नोटिस जाते रहे !
इंसान बेफिक्री से अपने काम में लगे रहे !!

देख इंसानो की मूर्खता , जानवर भी शर्मा गए !
जिस थाली में खाता हैं , उसी में छेद करता हैं सोचते रह गए !!

अंत में सबने ये मान लिया - अपने को बुद्धिमान कहने वाला  इंसान सबसे निरा मूर्ख हैं !
अपनी करनी का फल भुगतेगा , हम तो बुद्धिहीन जानवर हैं- एक दिन उसका भी अस्तित्व मिट जायेगा।।  

Saturday, May 28, 2016

परिवर्तन


बहुत परिवर्तन  देखा हैं ,
चिट्ठियों के दौर से गुजरकर ईमेल को देखा हैं,
आँगन में होती गपशप को व्हाट्सप्प में होते देखा हैं ,
टेलीग्राम की किटकिट से ट्विटर की उड़ती चिड़िया को देखा हैं ,
लैंडलाइन फोन की ट्रिन ट्रिन से सबके हाथो में स्मार्टफोन देखा हैं।

बहुत परिवर्तन  देखा हैं ,
पिताजी को डैड और माताजी को मॉम होते देखा हैं ,
पैर छूने की परम्परा को हाथ मिलाने में परवर्तित होते देखा हैं ,
छोटे छोटे बच्चों को गुल्ली डंडा से अब सोनी प्ले स्टेशन पर गेम खेलते देखा हैं ,
साइकिल को तरसने वालो लोगो को महंगी गाड़ियों में घूमते देखा हैं !

बहुत परिवर्तन  देखा हैं ,
रिश्तों  में अपनापन से स्वार्थ को पनपते देखा हैं ,
बड़ो की इज्जत और छोटो को प्यार- मूड के हिसाब से बदलते देखा हैं ,
संयुक्त परिवारों की ख़ुशी से एकल परिवारों को दीवारों से बात करते देखा हैं,
निस्वार्थ दोस्ती से अब प्रोफेशनलिज्म दोस्ती का चलन देखा हैं। । 

बहुत परिवर्तन  देखा हैं ,
निश्वार्थ नेताओं से लेकर कुर्सी के लिए ईमान बेच दे -ऐसे नेताओं को देखा हैं ,
पचास पचास रुपये में बिक जाये ऐसे वोटरों को देखा हैं ,
जनकल्याण के पैसो को अपने लॉकर में ताला लगते देखा हैं ,
गरीब जनता का अब सिस्टम से विश्वास उठते देखा हैं। 

बहुत परिवर्तन  देखा हैं ,
हरे भरे जंगलों को कंक्रीट से ढकते देखा हैं ,
मुफ्त पानी को बोतल में बंद कर बिकते देखा हैं ,
सैर सपाटे से अब बंद कमरे में ट्रेडमिल पर लोगो को दौड़ते देखा हैं ,
किसानो की खुशहाली से अब किसानों को आत्महत्या करते देखा हैं। 



Friday, May 27, 2016

ज़िन्दगी


न जीत की ज़िन्दगी , न हार की ज़िन्दगी !
हर परिस्थिति में जो खुश रह सके वही जीता हैं ज़िन्दगी !!

न सूर्योदय  में ज़िन्दगी , न सूर्यास्त में ज़िन्दगी !
हर पल को जो जी ले , वही जीता हैं ज़िन्दगी !!

न दोस्ती में ज़िन्दगी , न दुश्मनी में ज़िन्दगी !
प्यार से जो गुजार दे , वही हैं ज़िन्दगी !!

न कुछ पाने की ज़िन्दगी , न कुछ खोने की हैं ज़िन्दगी !
जो हैं उसी को भरपूर जीने का नाम हैं ज़िन्दगी !!

न ज्ञान में ज़िन्दगी , न अज्ञान में ज़िन्दगी !
सही समय पर सही फैसले से ही संवरती हैं ज़िन्दगी !!

कुछ आशाओ की , कुछ निराशाओं की नहीं हैं ज़िन्दगी !
संयम और आत्मविश्वास से ही जी जाती हैं ज़िन्दगी !!

न उतार की , न चढ़ाव की ज़िन्दगी !
अपने कदमो पर जिसकी नजर हैं , वही सम्भालता हैं ज़िन्दगी !!

न भूत में ज़िन्दगी , न भविष्य में ज़िन्दगी !
वर्तमान को जो जीये , वही हैं ज़िन्दगी !!

अनगिनत पलो की कतार हैं ज़िन्दगी !

कुछ खट्टे , कुछ मीठे पलो की लढी हैं ज़िन्दगी !!


Saturday, April 9, 2016

जीवन कारवां का एक पड़ाव


पहुँच गया हैं मेरे जीवन का कारवां एक पड़ाव पर , सोचता हूँ थोड़ा आराम कर लेता हूँ !
गठरी मेरी यादो की जरा भारी हो गयी हैं , थोड़ा इसको हल्का कर लेता हूँ !!

अच्छी यादो को फिर से गठरी में करीने से रखता हूँ !
और कड़वी यादो को अब यही छोड़ चलता हूँ !!

जो सबक सीखे हैं उन्हें जरा तरोताजा कर लेता हूँ !
गलतियां जो की हैं उन्हें न दोहराने की शपथ लेता हूँ !!

अब कारवां का सफर थोड़ा मुश्किल है , जिम्मेदारियों का असर ज्यादा हैं !
अब तक तो सिर्फ अपने लिए जिया , अब थोड़ा दूसरों के लिए जीने की कोशिश करता हूँ !!

अभी तक के सफर के लिए , ज़िन्दगी का तहेदिल से शुक्रिया करता हूँ !
जो बिछड़  गए इस कारवां में  , जरा आँखे बंद कर उन्हें याद कर लेता हूँ !!

किसी की आँखों में अगर मेरी वजह से आँसू आये हो तो पश्च्ताप कर लेता हूँ !
किसी की वजह से मेरा दिल दुःखा हो तो उसे माफ़ करता हूँ !!

खोने पाने का हिसाब करने से कोई फायदा नहीं हैं !
लाया ही क्या था ? ये गैर जरुरी सा हैं !! 

फिर नए उत्साह और उमंग से मुझे आगे बढ़ना  हैं !
अपने तजुर्बे और थोड़े ज्ञान का इम्तेहान देना हैं !!

कितने लोगो से और मिलना और सीखना हैं  !
जीवन कारवां का आगे का सफर ख़ुशी ख़ुशी तय करना हैं !! 

Monday, April 4, 2016

प्यार - मोहब्बत






एक रोज़ किसी ने मुझसे पूछा,
आपने प्यार मोहब्बत पर कुछ नहीं लिखा ,
मैंने भी हामी भरी ,
और कहा ,
" प्यार - मोहब्बत पर लिखने की औकात नहीं हैं मेरी  ,
ये विषय आधार हैं इस जहाँ का ,
शब्दों में बांधने की इसे ताकत नहीं हैं मेरी ,
प्यार - मोहब्बत शब्दों से परे का एक एहसास हैं ,
शब्दों से बयां हो ये जज्बात -आसान नहीं।

ये तो ऐसा एहसास हैं जो रूह तक उतरता हैं ,
गहराई का अनुमान करो  तो सागर तल भी छोटा लगता हैं ,
जज्बातो का सैलाब ऐसा -आसमां भी कम पड़ता हैं ,
अलग ही दुनिया सजती हैं जब प्यार होता हैं !!

यही एहसास एक दूसरे को बाँध के रखता हैं ,
जो शब्दों से ज्यादा आँखों से बयां होता हैं ,
जीवन डगर बड़ी आसान हो जाती हैं ,
जिस दिल में ये प्यार ताउम्र रहता हैं। " 

ख़ुशी और गम



थक गयी ज़िन्दगी भी  मुझे दर्द देते देते !
बोल ही उठी आखिर एक दिन मुझसे !!

“तू चल अब अपने रस्ते , मैं चलती हूँ अपने रस्ते !
परख लिया तुझे बहुत अब , उकता गयी हूँ तुझे  देखकर हर बार हँसते”!!

मैंने फिर मुस्कराते हुए जवाब दिया , “जब भी कभी गुमां हो जाये तुम्हे दर्द किसी को देते देते !
मेरा दरवाजा खुला हैं , तब भी मिलूंगा यू ही हँसते हँसते” !!

ज़िन्दगी ने कहा , " खुश हूँ तेरी ज़िंदादिली देखकर , कुछ माँग ले अपने लिए "!
मैंने कहा ," कुछ देना हैं तो एक काम करना ए - ज़िन्दगी , दर्द उसी को देना जो उसे संभाल सके " !!

"कितनो को तेरे  दर्द के बोझ तले तड़पता देखा हैं !
माफ़ करना तेरा नाम ही बदनाम होता हैं !!

दर्द देती हैं तो मरहम भी देना , मुस्कराते चेहरों को तवज्जो देना !
एक ज़िन्दगी मिली हैं सबको - ज्यादा से ज्यादा खुशियां और कम से कम गम देना”!!

Thursday, March 31, 2016

एक सन्देश ...................



मन में तसल्ली  और दिमाग में सुकून रखिये,
ईश्वर पर अटूट आस्था और दिल  में धैर्य रखिये !

जो हैं उसका मजा लीजिए , जो नहीं हैं उसके लिए प्रयत्न कीजिये ,
इच्छाओं की कोई थाह नहीं होती , इंद्रियों को थोड़ा काबू में रखिये !!

जो बीत गया उसके लिए गम मत कीजिये , जो है उसमे खुश रहना सीखिए ,
भविष्य अच्छा हो , अपना कर्म करते रहिये !

प्यार , स्नेह और मुस्कराहट फैलाते रहिये ,
अपनी तरफ से सबका अच्छा सोचते रहिये !!

सीखने  की ललक को बनाए रखिये ,
अपने स्वास्थ्य का अच्छा ख्याल रखिये !

भागदौड़ बहुत हैं ज़िन्दगी में - मगर दो चार पल अपने लिए दीजिये ,
अपनों को आपकी बहुत जरुरत हैं - रिश्तों में गर्माहट बनाए रखिये !!

अपने हौंसले के धनुष पर विश्वास के तीर चलाते रहिये ,
ज़िन्दगी ईश्वर का उपहार हैं आपको , जिंदादिली से भरपूर जीते रहिये !

करते रहिये कुछ काम ऐसे - ज़िन्दगी के नए पैमाने गढ़ जाइये ,

ज़िन्दगी की किताब में अपना  नाम भी दर्ज कीजिये!!

Sunday, March 20, 2016

होली हैं........................

फाल्गुन का महीना , मस्त हुई बयार !
डाल डाल टेसू खिले , रंगो से धरती का हुआ श्रंगार  !!

अबीर गुलाल लेकर हाथो में , सबको करो सरोबार !
भूल कर सब मनभेद , खुल कर खेलो होली इस बार !!

रंगो के इस त्यौहार में सब मतभेद उड़ा दो !
फाल्गुनी रंगो से सबके तन को रंग दो !!

होली के इस त्यौहार में , रंगो की हो बरसात !
बुरा न मानो होली हैं , हास्य की हो फुहार !!

राग छेड़ो प्रेम का , सद्भाव का बनाओ गुलाल !
मस्ती  का अबीर लेकर , कर दो सबको लाल !! 

Monday, March 7, 2016

नारी शक्ति



नारी शक्ति अपरम्पार , तुझसे ही जीवन आधार ! 
तू ही दुर्गा , तू ही काली - तेरे रूप हजार !!

तू शक्तिस्वरूपा , धैर्यमूर्ति , त्याग का हैं पर्याय !
प्यार की परिभाषा तुझसे , रिश्तो को देती हैं आयाम !! 

एक जीवन में कई जीवन जीती हैं एक नारी !
अपने दुःखो को भूलकर मुस्कराती हैं एक नारी !!

माँ रूप में जगतजननी , पत्नी रूप में पथ प्रदर्शक !
बहन रूप में स्नेह की छाया , बेटी रूप में कुल की इज्जत !!

शब्दों की अपनी सीमा हैं , तेरी महिमा उससे परे !
नारी को जो सम्मान न दे , उसका जीवन  नरक तले !!

नारी शक्ति अपरम्पार , तुझसे ही जीवन आधार ! 
तू ही दुर्गा , तू ही काली - तेरे रूप हजार !!