Thursday, February 16, 2023

क्यों

 

अतीत और भविष्य के ,

मध्य एक संधिबिंदु आज पर ,

हतप्रभ सा मैं खड़ा हूँ ,

आश्चर्य ये है न अतीत पर ,

और न भविष्य पर ,

मेरा कोई नियंत्रण ,

मैं दोनों के बारे में ही ,

अपने आज में  ,

सोचता रहता हूँ।

 

आज को अभी ही ,

बेहतर किया जा सकता है ,

भूत -भविष्य से निकलकर ,

जीया जा सकता है ,

मगर अक्सर ये नहीं होता ,

और इस “क्यों “ का ,

उत्तर नहीं होता मेरे पास।

 

 

Friday, January 20, 2023

दो दोस्त

ओहो , कैसे हो यार तुम , 

बिल्कुल बदल गए हो , 

कितने दुबले -पतले थे , 

अब तो जैसे कुप्पा हो गए हो , 

कितने घुँघराले हुए करते थे तुम्हारे बाल , 

अब तो बस अधपके से आधे हो गए है , 

क्या हुआ तुम्हारे चेहरे के तेज को , 

गालों के गड्डे भर से गए है , 

वो जोशो -जूनून कहाँ गायब हो गया , 

हर बात पर दुनिया बदलने की बात करने वाला ,

क्यों खोया -खोया सा है ? 

औरों से सुनता रहता हूँ , 

तुम्हारी कामयाबियों के कहानियाँ , 

फक्र से कहता हूँ , 

कई बरस पहले ,हम सच्चे दोस्त थे।  


अरे यार , बताओ तो सही , 

क्या -क्या किया इतने सालों में , 

सुना है खूब तरक्की कर लिए हो , 

लेकिन चेहरे पर वो सुकून क्यों नहीं है , 

लाइफ तो सेटल होगी यार तुम्हारी , 

सब कुछ तो अब तुम्हारे पास है , 

हमारा क्या है यार , 

वही हड्डी , वही खाल है , 

जिस लकीर को पकड़े थे , 

बस उसी पर अटके है , 

लोग असफलताों का टैग जरूर देते है , 

मगर हम जानते है , 

हम बड़े सुकून से हैं , 

तुम मंजिल की तलाश में थे , 

पा लिये और दुआ है - आगे बढ़ो , 

तुम्हे पता है हमारी फितरत की , 

सफर का पूरा लुफ्त लेकर , 

तुमने चाहा तो ,

मिलेंगे फिर हम कहीं न कहीं।  

Sunday, January 1, 2023

संधान

 

कैसे मान लूँ अभी से हार , जब तरकश में कई तीर बाकी है।

अभी तो बस अभ्यास शुरू किया है ,संधान अभी बाकी हैं ।1। 

 

छल ले कितना ही दुनिया , मेरे हौंसलो में कोई कमी नहीं है। 

इन्तजार करूँगा अपनी बारी का , कोशिश मेरी जारी हैं।2।

 

कितना इम्तेहान लेगा वक्त भी , सब्र की मेरी भी इंताह नहीं है।

बदलने की तो फितरत है तेरी , मुझे भी कहाँ ,कोई जल्दी हैं।3।

 

बिछे होंगे मेरी राहों में काँटे , मुझे छालों की कहाँ परवाह है।

तपा रहा हूँ खुद को , इल्म है मुझे - असली संघर्ष अभी बाकी हैं।4।

 

ऐसा नहीं है कि हाथ पर हाथ रखकर बैठा हूँ , आत्म -निरीक्षण जारी है। 

हौंसले का धनुष , क्षमताओं का तरकश, विश्वास के तीर -तराश जारी हैं।5।

 

कश्मकश हर कदम पर , परिस्थितियों का बोझ भारी है। 

जीवन पथ बतलाता है , जीतने के लिए हारना भी जरुरी हैं।6।

 

लक्ष्य पता है - पहुँचने का भी अटल और अडिग इरादा है।

पीछे खींचे है कुछ कदम , लम्बी छलाँग के लिए ये भी जरुरी हैं।7।

Thursday, December 8, 2022

प्रयास

 उम्मीद तब तक मत छोड़ो , 

जब तक अंतिम प्रयास न हो जाये, 

और अंतिम प्रयास ऐसा करो , 

वो प्रयास का पर्याय हो जाय। 


फँसे हो कभी घुप्प अंधेरों में , 

कोई जुगनू ही सहारा हो जाये , 

हो हार निश्चित तब भी , 

एक पुरजोर कोशिश की जाय।  


दुःखों का भँवरजाल हो सामने , 

"खड़े हो ", इसी का जश्न मनाया जाये , 

सफलता - असफलता जो मिले राहों में , 

"स्वीकार कर" , आगे बढ़ा जाय।   


सफर बढ़ रहा रोज़ आगे , 

क्या फर्क पड़ता है - कौन आगे , कौन पीछे 

जहाँ भी ख़त्म हो  सफर अपना  , 

वहाँ एक " शिलालेख " गढ़ जाय।  

Tuesday, November 29, 2022

शबरी : धैर्य और प्रतीक्षा

  

नित बुहारती वो पथ ,

न जाने कब राम आ जायेंगे ,

चुन -चुन कर कन्दमूल ,

मेरे राम खायेंगे ,

सावन पर सावन बीते ,

कमर झुक सी गयी श्रमणा की ,

थका नहीं विश्वास मगर ,

गुरु की बात गाँठ बाँधी ,

आयेंगे , आयेंगे ,

मेरे राम आयेंगे ,

पथ पर नित फूल बिछाती ,

दर्शन को प्यासी वो ,

राम -राम ही भजती ,

इक दिन फिर वो ,

चमत्कार हो ही गया ,

जब देखी दो युवकों की परछाई ,

खुल गए भाग्य भीलनी के ,

रघुकुल तिलक सामने पाई ,

जन्म -जन्म की आस ,

देखो कैसे पूर्ण होने को आई ,

खुद चलकर राम आश्रम पधारे ,

कभी राम का मुख देखती ,

कभी बेरों की टोकरी ,

आँसू टप -टप गिरे आँखों से ,

इस धैर्य और प्रतीक्षा  की ,

खुद समय दे रहा था गवाही ,

भाव -विह्वल शबरी ,

देख राम निहाल हो गयी ,

आधे बेर खिलाये राम को ,

आधे बेर जमीन पर गिराई ,

अराध्य और भक्ति के ,

अदभुत मिलन पर प्रकृति मुस्काई ,

लाख -लाख आशीष दे ,

शबरी ने देखो -गति पाई ,

धैर्य जीता , प्रतीक्षा जीती ,

भगवान को कुटिया तक खींच लायी।

Thursday, November 24, 2022

आज

 

किसने देखा है आने वाला कल ?

कौन बदल सकता है बीता कल ?

आज ,जो अभी है - वही सामने है ,

जो है , बस यही है , यही है - सच। 

 

कल क्या हुआ था , इतिहास बन गया ,

कल क्या होगा ,  किसको है खबर,

जो हाथ में है , उसका शुक्र मना ,

कर्मों से आज अपना भाग्य जगा। 

 

किसको फुर्सत है यहाँ ,

तेरे संघर्ष पर चर्चा करने की ,

कहते थे लोग , कहते रहेंगे ,

लक्ष्य साध , और मुस्कराते जा। 

 

ये जो "आज" है , वही जादुई है ,

जो कर गुजरना है , यही तेरे हाथ है ,

भरोसा रख खुद पर , कर्मों का विधान है ,

आज सही तो फिर सफर आसान हैं। 

Friday, October 21, 2022

एक जोड़ी पैर

 

बायें पैर ने दायें पैर से शिकायत की , 

हर बार चलने के लिए तुम ही क्यों उठते हो ?

मैं भी तो शुरुवात कर सकता हूँ , 

मुझे हर बार तुम्हारे पीछे ही क्यों लगना पड़ता है ?

दायें पैर ने शांत स्वर में समझाते हुए कहा ,

" पगले , तुम्हारे ऊपर दिल का भार है , 

तुम्हारी ख्वाईश को पूरा करने के लिये , 

तुम्हे संकोच न रहे ,मैं पहल कर लेता हूँ, 

नाराजगी छोड़ , तैयार हो जा , 

चल , दोनों दिल को कही घुमा लाते है।  " 


Saturday, October 8, 2022

प्रथम प्रेम

 

प्रेम कैसे उपजा होगा ?

कौन होगा जिसने ,

सबसे पहले इजहार किया होगा ,

क्या कहा होगा उसने ?

या फिर सिर्फ आँखों से ,

इजहार किया होगा ,

क्या दूसरे ने स्वीकार किया होगा ?

झट से ,

या फिर इन्तजार कराया होगा ?

क्या विरोध किया होगा किसी ने ?

कैसे उन्होंने बताया होगा ,

दुसरो को ,

प्रेम क्या होता है ?

वह प्रेम जिसने फिर ,

सारी कायनात की ,

दिशा और दशा ,

दोनों बदल दी ,

प्रेम इतिहास के ,

शुरुवाती पन्ने

लिखे ही नहीं गये।

Friday, September 30, 2022

उस पार

 

नहीं , वो मर नहीं सकता ,

फफक -फफक वो रो पड़ी ,

गयी भी नहीं देखने ,

अंतिम बार उसका चेहरा ,

बंधनो में जकड़ी थी ,

याद था उसको वादा ,

जो वर्षों पहले उसने ,

किया था एक दिन ,

उसने भी दोहराया था ,

बीत गए थे न जाने कितने वसंत ,

वादा मगर हमेशा ताजा रहा ,

उम्मीद पर अनगिनत दिन गुजर गए ,

साँझ हो गयी जीवन की ,

मगर वादा बूढ़ा न हुआ ,

आज ऐसी अनहोनी कैसे हो गयी ,

वो कैसे जा सकता था ?

अब तो मिलने के लिए ,

शायद उसको भी ,

उस पार जाना ही होगा,

बस "धड़ाम " की हल्की आवाज हुई ,

उस पार शायद मिलन ,

जरूर हुआ होगा,

इस पार तो उनका प्रेम ,

बेड़ियों में ही जकड़ा रहा। 

Saturday, August 27, 2022

ये वक्त गुजर जायेगा।

 

मेरे पास एक अच्छी खबर है ,

और एक बुरी खबर है ,

बताओ पहले कौन सी सुनोगे ,

अच्छी खबर पहले सुनोगे ,

तो फिर बुरी खबर को टाल जाओगे ,

बुरी खबर सुनोगे तो ,

अच्छी खबर पर कहा ध्यान लगा पाओगे ,

ख़बरें दोनों सही और सच्ची है ,

बोलो , पहले कौन सी सुनोगे ?

ऐसा नहीं हो सकता क्या ,

दोनों को मिलाकर सुना दो ,

हो सकता है , तो सुनो ,

"ये वक्त गुजर जायेगा। "

Wednesday, August 17, 2022

हल्के दर्जे का कवि

 

किसी ने मुझसे कहा ,

तुम बहुत हल्के दर्जे के कवि हो ,

ऊपर से , हिन्दी में लिखते हो ,

तुर्रा ये , खुद को कवि कहते हो ,

तुम्हारी कवितायेँ साहित्य श्रेणी में नहीं आती ,

तुम्हारी हर कविता में कोई न कोई कमी है ,

प्रेम पर तुम्हारा  ज्ञान अधूरा है ,

सामयिक विषयों में समझ की कमी है ,

रस ,लय या अलंकार भी कोई चीज होती है ,

चंद पिरोये शब्दों से कोई कविता नहीं बनती है, 

तुकबंदी भी आपसे ढंग से नहीं होती है,

कलम की धार तुम्हारी कच्ची है ,

तुम्हारी लिखाई दिल को चुभती है ,

तुम्हारी लेखनी बस इक उम्मीद देती है ,

वास्तविकता के धरातल से परे होती है ,

तुम बस आवेश के वशीभूत लिख देते हो ,

शायद खुद के लिये ही लिखते हो ,

मैं , निरुत्तर , बस सुने जा रहा था ,

बस इतना सा बोल पाया ,

दिल की गहराइयों से बहुत -बहुत धन्यवाद ,

बस आप ही हो जो मुझे गंभीरता से पढ़ते हो।

Thursday, August 11, 2022

प्रेम गति

 

" मांगो , राधा -कुछ भी माँगो ,

मैं तुम्हे सब कुछ दे सकता हूँ ,"

द्वारकादीश बोले बूढ़ी राधा से ,

राधा एकदम निहार रही थी ,

द्वारकादीश में "कान्हा " ढूँढ रही थी ,

खोई हुई मग्न यादों में ,

" माँगो ,राधा , माँगो " से चेती थी ,

कृष्ण आप द्वारकादीश हो ,

जानती हूँ -सब दे सकते हो ,

मैं “द्वारकादीश” से कुछ नहीं चाहती ,

"कान्हा " बन कुछ दे सकते हो तो बोलो ,

बँसी पर क्या वही तान छेड़ सकते हो ?

कान्हा ने मुरली अधरों से लगायी ,

तान छेड़ी राधा सुध-बुध खो बैठी ,

कान्हा बंद चक्षु सुर छेड़ गए ,

स्वरलहरियों में राधा समाई ,

नेत्र खुले जब द्वारकादीश के ,

राधा कहीं नजर न आई ,

ध्यान गया जब बाँसुरी पर ,

हल्की बाँसुरी जरा भारी पाई ,

कृष्ण हौले से मुस्कराये ,

राधा -कृष्ण के प्रेम ने अंततः गति पायी। 

 

( ऐसा वर्णित है कि राधा वृद्धावस्था में कृष्ण से मिलने द्वारका गयी थी और वही उनके अलौकिक और दिव्य प्रेम का पटाक्षेप हुआ था , जो भौतिक न होकर आध्यात्मिक प्रेम था। )

 


Sunday, July 31, 2022

गजब

बड़ा गजब खेला चल रहा है ,
जिसे मौका मिले वो रेल रहा है ,
जहाँ देखो वहाँ अजब शोर हो रहा है ,
सियारों की बारात में शेर नाच रहा है ,
छीना झपटी का खुला खेल चल रहा है ,
बाजार इश्तहारों से अटा पड़ा है ,
नकली सामानों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है ,
असली नेता , नकली नेता सब गड़बड़झाला है ,
घरों से नोटों का अम्बार निकल रहा है ,
सामाजिकता सिमट कर एक टुनटुने में आ गई ,
सोशल मीडिया का हर जगह बवाल चल रहा है ,
जनता की हाय कौन सुने यहाँ ,
कोई "भक्त " , कोई " चमचा " में तुल रहा है ,
असमंजस ही असमंजस है हर जगह ,
बस वो चौराहे पर बैठा पागल - दिल खोलकर हँस रहा है।   

Saturday, July 16, 2022

हवा का एक झोंका

आया हवा का एक झोंका ,

ज़िन्दगी किताब को झकझोर गया ,

एक एक पन्ना जैसे ,

खुदबखुद खुलने लगा।

 

किसी पन्ने में सिसकियाँ ,

किसी पन्ने से खुशियाँ झरने लगी ,

कही से बचपन झाँक रहा ,

कहीं लड़कपन ने अंगड़ाई ली।

 

कही दोस्ती की कसमे खाई ,

किसी कोने पर वो पहले प्यार की अंगड़ाई ,

कुछ फूल जो सूख चुके थे उसकी निशानी ,

किसी पन्ने पर  जुदाई।

 

मुड़ा हुआ वो पेज भी आया ,

जिस पर लिखी थी एक अधूरी कहानी ,

लौटकर आऊंगा कभी मुड़कर ,

सोचा था पूरी करूँगा वो कहानी।

 

साल दर साल वो लिखावट में अंतर ,

सपनो के पीछे हकीकत का वो अस्तर ,

कुछ पाने की खातिर कुछ छूटने का मंजर ,

                                                      उस हवा ने टटोल दिया मेरा मन मंतर।


Monday, June 27, 2022

सोहबत

 

सफर है ये ज़िन्दगी , कुछ कदम दे दे।

खोने -पाने का मसला नहीं , कुछ यादें दे दे।1। 

 

दूर निकल आया हूँ , वापसी का कोई हल दे दे। 

छूकर देख लिया सब , सच्चा कोई अर्थ दे दे।2।

 

भागते -भागते थक गया , थोड़ी छाँव में आराम दे दे । 

बहुत शोर है अंदर -बाहर , एक नींद सुकून की दे दे ।3। 

 

यूँ तो गुजरा नहीं वक्त अभी, एक नयी उम्मीद दे दे।

चलना तो अभी बहुत है ,  तू अपनी सोहबत दे दे ।4।

 

अब मुझे मोहब्बत नहीं , सोहबत दे दे।

इल्म अब इश्क का नहीं , जरा वक्त दे दे ।5।