मुकद्दर जागेगा इक दिन ,
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।
मंज़िल मिलेगी इक दिन ,
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।
समय बदलेगा जरूर इक दिन ,
मैं समय की इज्जत तो करूँ।
सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का ,
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।
कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है ,
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।
जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की ,
काँटों से फिर क्यों डरूँ।
प्रारब्ध जो भी होगा मेरा ,
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।
मंज़िल मिलेगी इक दिन ,
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।
समय बदलेगा जरूर इक दिन ,
मैं समय की इज्जत तो करूँ।
सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का ,
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।
कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है ,
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।
जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की ,
काँटों से फिर क्यों डरूँ।
प्रारब्ध जो भी होगा मेरा ,
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।









