Thursday, June 26, 2025

शाबाशी

 

दे सकते हो तो उम्मीद दो ,

बाँट सकते हो तो दर्द बाँटो ,

उलझे है सब यहाँ " आनंद "

बुरा तो दुश्मन का भी न सोचो। 

 

चिंताओं में वक्त मत गँवाओ ,

वो देख लेगा - दिल को समझाओ ,

हाथ में जो वर्तमान है "आनन्द ",

जैसा भी है , स्वीकारो और जियो। 

 

कौन क्या सोचता है ,

ये उसकी तकलीफ है ,

वक्त वैसे भी फिसला जा रहा ,

फालतू चीजों पर वक्त न जाया करो। 

 

खुशियाँ ढूँढने से नहीं मिलती ,

बड़ी कामयाबियाँ रोज़ नहीं होती ,

संघर्ष तो सभी की ज़िन्दगी में है ,

खुद को भी शाबाशी देना सीखो। 

Friday, June 13, 2025

इन्तजार

तुम मिलोगे दुबारा ? 

मैं नहीं जानता , 

मगर उम्मीद है , 

ज़िन्दगी के किसी न किसी , 

मोड़ पर , 

हम फिर टकरायेंगे , 

वो बात अलग होगी , 

तुम भी न जाने कितना सफर,

तय कर आये होगे, 

और मैं भी , 

मगर विश्वास तब तक , 

कायम रहेगा फिर मिलने का , 

जब तक ये दुनिया गोल रहेगी।  

जीवन

 

जीवन कौन चला रहा है ? 

क्या हम ?

कतई नहीं , 

हमें तो पता भी नहीं , 

अगले पल क्या होने वाला है ? 


फिर किसके हाथ में डोर है ? 

प्रकृति की , 

नहीं , 

इसको भी कोई और नियंत्रित कर रहा है , 


फिर किसके हाथों की कठपुतली है हम ? 

कौन हमें नचा रहा है ? 

किसकी मर्ज़ी से साँसे चल रही है ?

किसकी ईच्छा से ये संसार चल रहा है ? 


सबके अपने -अपने नाम है , 

सबका अपना -अपना विश्वास है , 

कोई तो है कहीं न कही , 

जो अदृश्य होकर भी कण -कण में बसा हैं।   

Sunday, June 8, 2025

शनैः शनैः

 शनैः शनैः , 

हम धैर्य खो रहे है , 

हम संयम खो रहे है , 

हम विश्वास खो रहे है , 

हम आस खो हो रहे है।  


शनैः शनैः , 

हम ईश्वर को भूल रहे है , 

हम रिश्ते भूल रहे है , 

हम मानवता भूल रहे है , 

हम करुणा , दया भूल रहे है।  


सच ये भी है  , 

धरती पर मानव सभ्यता , 

इन्ही गुणों से शताब्दियों तक , 

बची रही है।  

Thursday, June 5, 2025

पहाड़

आधे  से अधिक पहाड़ , 

पहले ही मैदानों में पहुँच चुका है , 

जो आधा बचा था गाँवों में , 

उसमे भी तीन चौथाई अब , 

सड़क किनारे बस चुका है , 

बचा एक चौथाई त्रस्त है , 

बन्दर , लंगूरो , सूअरों के आतंक से , 

गाँव के जीर्ण घरो के आँगन में , 

सिसूण जम चुका है , 

और जंगलों में चीड़ सिर उठा रहा है , 

जंगलो के रास्ते गुम हो चुके है , 

इन सबमे जंगल में , 

फिर से आ चुके है बाघ, 

गाँव अब गाँव नहीं रह गए , 

सड़क दूर गाँव अब सब , 

फिर से जंगल होने के कगार पर है।   

Saturday, May 24, 2025

पहाड़ जरूर आना

 

तुम इक दिन पहाड़ जरूर आना ,

पहाड़ सिखायेगा तुम्हे ,

उतार -चढ़ाव में संभलने का सलीका ,

कैसे चढ़ाव में झुकना पड़ता है ,

कैसे उतार में सीधा रहना पड़ता है ,

 

पहाड़ सिखायेगा तुम्हें ,

मुश्किलों में कैसे जिया जाता है ,

एकांत क्या होता है ,

कैसे ज़िंदा रहा जा सकता है ,

सिर्फ हवा ,पानी पर। 

 

पहाड़ वो पाठ पढ़ा सकता है तुम्हे ,

जो शायद किताबों में नहीं होता ,

पहाड़ तुम्हें समझायेगा ,

भले ही कितने ही ऊँचे हो जाओ ,

तलहटी में सब बराबर होते है।

 

पहाड़ तुम्हे अनुभूति देगा ,

धैर्य पैदा करेगा तुम्हारे भीतर ,

जीवन का वो सार बतायेगा ,

जो लिखा -पढ़ा नहीं गया है कही पर ,

उतार -चढ़ाव का नियम सब पर लागू बराबर।  

Monday, May 19, 2025

अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति

 

अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में आजकल ,

गजब बवाल चल रहा है ,

नए समीकरण बन रहे है ,

पुरानो का हिसाब किताब चल रहा है।

 

ट्रंप साहब बौराये से घूम रहे है ,

पुतिन जी अपनी धुन में रमाये है ,

जिंगपिंग साहब का पड़ोसी से मोह हो गया है ,

नेतन्याहू अरब में गरज रहे है। 

 

अस्त्र शस्त्रों का व्यापार जोरों पर है ,

समीकरण इधर -उधर हो रहे हैं ,

भय जनता में बैठाया जा रहा है ,

कमीशन से मालामाल नेता हो रहे है। 

 

बगल में इक पड़ोसी को समझ नहीं आ रहा है ,

दाना -पानी को मोहताज न जाने किस युग में जी रहा है ,

हेकड़ी न जाने किस बात की है ,

अंतर्राष्ट्रीय भीख लेकर आतंकी पाल रहा है। 

 

अब भारत नए युग में जी रहा है ,

जैसे को तैसा का नया सूत्र गढ़ रहा है ,

बहुत सबक सीख लिये हमने इतिहास से ,

शक्ति से शांति का मार्ग चुन रहा है। 

 

Saturday, May 3, 2025

अक्सर

 अक्सर , 

हम सोचते कुछ है , 

होता कुछ है , 


अक्सर , 

हम चाहते कुछ है , 

मिलता कुछ है , 


अक्सर , 

हम बनना कुछ चाहते है , 

बन और कुछ जाते है , 


अक्सर , 

हम करना कुछ चाहते है , 

कर और कुछ रहे होते है , 


बस इसी अंतर को , 

बड़े -बुजुर्ग और ज्ञानी , 

नियति, नीयत और कर्मो का हेर-फेर कहते है।  

Friday, April 18, 2025

क्षमता

 


हम , अधिकतर , 

अपनी क्षमताओं को कमतर आँकते है , 

और जो , अपनी क्षमताओं से ऊपर बढ़कर , 

कार्य कर जाते है , 

वही इतिहास बना जाते है, 


दुर्भाग्य से , अधिकतर , 

किसी भी कारणवश , 

अपनी क्षमताओं का प्रयोग , 

किये बिना ही , 

समस्त जीवन गुजार देते है।  

Tuesday, April 8, 2025

बहस

 

बहुत बहस होती है ,

पुराना ज़माना अच्छा था ,

या नया जमाना अच्छा है ,

जो है , वो सामने है ,

जो सामने है ,

उसमे हम सबका ,

बराबर का योगदान है ,

अगर योगदान है ,

तो चाहे अच्छा है ,

या बुरा ,

हम सब इसके भागीदार है ,

और भागीदारी में ,

जो मिलेगा ,

उसे स्वीकार करना ,

जिम्मेदारी है ,

जिम्मेदारी से ,

अब हर कोई बचना चाहता है ,

बस मुँह फाड़ कह देना है ,

वो जमाना अच्छा था ,

और ये जमाना बुरा है,

जो अब सामने है ,

जैसा है , वही अच्छा है,

जम सकते है तो जमाओ ,

नहीं तो चुपचाप ,

नदी के गंगलोड़ की तरह ,

किनारे लगो ,

और पानी को सपाट ,

बहने दो,

जो बदलेगा , टिकेगा ,

परिवर्तन नियम है संसार का ,

समझदारी यही , तकाजा यही ,

इसके साथ जल्दी हो लो,

गंगलोड़ बनने से कोई ,

फायदा नहीं। 

 

 

 

गंगलोड़ : नदी के द्वारा किनारा किया गया पत्थर 

Tuesday, April 1, 2025

मकड़जाल

 

धीरे -धीरे हमारे चारों तरफ ,

इक मकड़जाल आकार ले रहा है ,

शनैः शनैः हम फँसते जा रहे है ,

और हमें मज़ा आ रहा है।

 

धीरे -धीरे पकड़ मजबूत हो रही है ,

जाल और कसा जा रहा है ,

आभाषी दुनिया का इक आवरण ,

जाल के ऊपर फैलाया जा रहा है।

 

छदम वातावरण असल पर हावी है ,

नये आख्यानों से जाल बुना जा रहा है ,

पँख उलझने लगे है महीन तारो से अब ,

आभासी क़ैदख़ाना तैयार हो रहा है।

Sunday, March 30, 2025

सैलरी



सैलरी तुम चाँद जैसी हो , 

पूर्णिमा पर आती हो , 

अमावस पर ख़त्म हो जाती हो , 

मगर अमावस से फिर , 

पूर्णिमा आने तक , 

वो इन्तजार हद तक गुजर जाता है, 

साँसे अटकी , जेब खाली , 

शरीर  हलकान रहता है।  

Tuesday, March 18, 2025

यायावर

 

सुनो यायावर ,

कहाँ तक जाना है ?

और क्या पाना है ?

पता नहीं ,

हाँ ,लेकिन सब कहते है ,

चलते जाना है। 

 

अच्छा,

अभी तक जितना चले हो ,

उसमे से कुछ याद हैं ,

हाँ, धुँधला सा ही है ,

भागते भागते कहाँ कुछ दिखता ,

और याद रहता है। 

 

बताओ ,

किस चीज की तलाश है ,

बहुत कुछ ,

उस बहुत कुछ में ,

क्या -क्या शामिल है ,

पैसा , रुतबा , ईज्जत ,

कामयाबी , प्रसिद्धि ,

प्यार , मोहब्बत ,

सब कुछ। 

 

अभी तक कितना पाया ,

पाने से अधिक तो खोया है ,

झोले में जितना भरता है ,

उससे ज्यादा तो गिरता है ,

सोचा झोली भर जायेगी ,

सुकून मिल जायेगा ,

शांति से फिर सफर चलेगा ,

मगर उल्टा हो रहा है ,

भागदौड़ में बस ,

सफर चल रहा है ,

 

तो सुनो यायावर ,

कोई मंत्र तो नहीं मेरे पास ,

मगर एक तंत्र है ,

क्षण -क्षण का लुफ्त उठाओ ,

सफर में थोड़ा रुको ,

एहसास करो ,

जो है, उसका मजा लो ,

चलना तो है ही ,

हर मील पार करने पर ,

ठहरो , रुको ,

और जश्न मनाओ। 

Thursday, March 13, 2025

मकसद

 सारी चिंताएँ , 

कुछ खोने का डर , 

कुछ पाने की बेचैनी है।  


सारा संघर्ष , 

कुछ पाने का , 

कुछ और पाने का हैं।  


सारा दुःख , 

अपना नहीं है , 

दूसरों के सुःख का भी है।  


सारी अशांति , 

बाहर ही नहीं है , 

मन के भीतर भी है।  


सारी असफलताएँ , 

खुद की वजह से ही नहीं है , 

किसी के साथ नहीं देने से भी है।  


सारी सफलताएं , 

अकेले की नहीं है , 

बहुतों से साथ से भी है।  


सारी खुशियाँ , 

हमारी वजह से ही नहीं है , 

समय का साथ भी जरुरी है।  


हमारा जीवन , 

सिर्फ हमारा नहीं है , 

किसी न किसी मकसद का है।  


हमारा मकसद , 

हमने नहीं चुना है , 

उसने चुनकर भेजा है।  

Saturday, March 1, 2025

प्रवाही जीवन

 

सरल , सहज और प्रवाही जीवन ,

कठिन ,उलझा और रुका हुआ मन ,

इच्छाएँ अनेक  , साधन सीमित ,

जग बौराया ,  चिंताएँ अनंत।

 

ऊबड़खाबड़ रास्ते , दौड़ अंधाधुंध ,

साँसो की नाजुक डोर पर टिका नन्हा तन ,

किस्मत और कर्मों की जोर आजमाइश ,

कुछ पल सुकून को तरसता जीवन।

 

उपाय क्या है जिससे आसान बने जीवन ,

कर्म किये जा , न कर फल की चिंता ,

भरोसा रख , उम्मीद जगा , कम कर ईच्छा ,

वक्त को इज्ज़त बख्श , हर हाल मुस्करा।

 

स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है , नसीब जगा ,

धीरे -धीरे ही सही , मंजिल की तरफ कदम बढ़ा ,

बहुत उलझनों में खुद को न उलझा ,

एक राह पकड़ बस , उसी पर चलते जा।